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Mamta Banerjee : वर्तमान में देश की एकलौती महिला मुख्यमंत्री, जानिए उनका जीवन और राजनितिक यात्रा

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Sunidhi Raj

ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) जो पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में जानी जाती हैं। तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली ममता बनर्जी अभी भारत के 29 राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्रीयों में अकेली महिला मुख्यमंत्री हैं।

राजनितिक यात्रा

ममता ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 70 के दशक में की थी। पश्चिम बंगाल के सुपर सीएम के रूप में अपना दस साल का कार्यकाल पूरा कर तीसरी बार बंगाल की सीएम बनने वाली ममता की पहचान देश के उन नेताओं में है जो अपने फैसले और आक्रामक रवैये के लिए जानी जाती हैं।

लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाली वो देश की दूसरी महिला हैं। तीसरी बार मुख्यमंत्री का कार्यकाल पुरा करने के बाद वो सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाली महिला होंगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने 1975 में पश्चिम बंगाल की महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी बन राजनीति में कदम रखा था। तृणमूल कांग्रेस का गठन ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस (Congress) से अलग होने के बाद गठित किया था। 13 साल की राजनीतिक यात्रा के बाद यह पार्टी 2011 में बंगाल की सत्ता में आ गयी और ममता बनर्जी पहली बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनी। वो पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।

2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने में सब से बड़ी बात यह थी कि जिस पार्टी को बेदखल कर ममता की पार्टी सत्ता में आई थी वह पार्टी यानी कि सीपीएम (CPM) वह 3 दशक तक वहाँ की प्रमुख पार्टी और सत्ता प्रमुख रही थी।

जन्म और जीवन

ममता बंगाल में ही जन्मी और पली बढ़ी थी। ममता का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ था और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं प्राप्त की थी। ममता के सिर से उनके पिता का साया काफी कम उम्र में उठ गया था। वो केवल 9 वर्ष की थी जब उनके पिता का देहांत हो गया था। ममता ने कोलकाता के ही जोगमाया कॉलेज से ग्रैजुएशन और फिर कलकत्ता यूनिवर्सिटी से इस्लामिक हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएशन किया। इसके अलावा उन्होंने जोगेश सी चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री भी हासिल की।

70 के दशक में मात्र 15 साल की उम्र मे कांग्रेस पार्टी से जुड़ने वाली ममता बनर्जी ने सबसे पहले एक पदाधिकारी के रूप में 1975 में अपना काम संभाला। इस दौरान वो 1975 में पश्चिम बंगाल में महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी नियु्क्त की गईं। इसके बाद 1978 में ममता कलकत्ता दक्षिण की जिला कांग्रेस कमेटी की सेक्रेटरी बनीं।

1984 में ममता बनर्जीपहली बार कोलकाता की सांसद बनी। उन्हें पहली बार लोकसभा चुनाव का टिकट भी कांग्रेस पार्टी से ही मिला और इस चुनाव में वो दक्षिण कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) की सांसद बनीं। इसके बाद 1991 में वो दोबारा लोकसभा की सांसद बनीं और इस बार उन्हें केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग में राज्यमंत्री भी बनाया गया था।

तृणमूल कांग्रेस का गठन

1996 में ममता एक बार फिर सांसद बनीं, लेकिन 1997 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़कर अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का गठन किया। तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1 जनवरी 1998 को हुई। पार्टी गठन के शुरुआती दिनों में ममता बनर्जी तब बीजेपी के सबसे बड़े नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)की करीबी रहीं। इसके अलावा उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेलमंत्री के रूप में भी काम किया। 2002 में ममता बनर्जी ने रेलवे के नवीनीकरण की दिशा में बड़े फैसले लिए। इसके अलावा एक्सप्रेस ट्रेनों में सर्विसेज बढ़ाने से लेकर IRCTC तक की स्थापना में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है।

संसद से राज्य की सत्ता तक का सफर करने की दिशा में ममता बनर्जी लगातार तब की वामपंथी सरकार का पश्चिम बंगाल में खुला विरोध करती रहीं। सीपीएम (CPM) के नेतृत्व वाली इस सरकार के मुखिया पहले ज्योति बसु (Jyoti Basu) और फिर बड़े वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्या (Budhdev Bhatacharya) थे। 2005 में ममता ने भट्टाचार्य की सरकार के जबरन भूमि अधिग्रहण के फैसले का विरोध शुरू किया। इसके बाद सिंगूर और नंदीग्राम के हिस्सों में ममता बनर्जी ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर आंदोलन किए। इस आंदोलन को परोक्ष रूप से बीजेपी का समर्थन भी मिला। खास बात यह है कि 2005 में जिस बीजेपी (BJP) का सपोर्ट ममता को मिला आज उसी पार्टी को करारी शिकस्त दे कर ममता तीसरी बार बंगाल की गद्दी पर काबिज़ हुई हैं।

2005 में भूमि अधिग्रहण कानून के विरोध में ममता ने जो आंदोलन शुरू किया था उसका असर और व्यापक जनसमर्थन देखते हुए ममता ने एक प्रमुख राजनीतिक दल के रूप में पश्चिम बंगाल के 2011 विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपनी पार्टी को चुनाव में उतारा। 1998 में पार्टी के गठन के बाद 13 साल की अल्प यात्रा में ही तृणमूल कांग्रेस पहली बार 34 वर्षीय सत्ता वाली वामपंथी सरकार को सत्ता से हटाने में कामयाब हो गई, जो कि अपने आप मे एक बड़ी उपलब्धि थी।

मुख्यमंत्री का सफर

2011 के चुनाव में ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की 184 सीटों पर जीत मिली। जिस राज्य में कभी वामपंथी और कांग्रेस की विचारधारा का प्रभाव था। दोनों में एक नई लीक खींचकर ममता ने चुनाव में 184 असेंबली सीट पर जीत हासिल की। इसके बाद वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं। इसके बाद 2016 में ममता पहले से अधिक सीटों के साथ राज्य की सत्ता जीतने में कामयाब हुईं।

ममता बनर्जी इन चुनावों के बाद देश के एक प्रमुख राजनीतिक दल की मुखिया के रूप में तेजी से उभरीं। 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद बीजेपी को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कड़ी चुनौती दी। देश के तमाम करिश्माई नतीजों के बावजूद इन चुनावों में पश्चिम बंगाल की 42 सीटों पर ममता बनर्जी का दल विजयी हुआ।

2019 के लोकसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी का दल पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनकर उभरा। 42 सीटों में से 22 सीट जीत कर ममता की पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। इसके अलावा बीजेपी को 18 सीटों पर विजय मिली। बड़ी बात ये कि मोदी विरोध के लिए ममता बनर्जी हमेशा बीजेपी के खिलाफ रहीं। ये वही ममता बनर्जी थीं, जो कि कभी एनडीए की सबसे प्रमुख सहयोगी रही थीं। सीएए, एनआरसी, जीएसटी, नोटबंदी और किसान आंदोलन तक ममता ने मोदी सरकार के तमाम फैसले का विरोध किया और अब उन्होंने 213 सीटें जीत कर एक बार फिर से बंगाल की सत्ता पा ली है।

मुख्यमंत्री पद पर तलवार

हालांकि ममता खुद नंदीग्राम में अपने पूर्व सहयोगी और तत्कालीन बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई लेकिन फिर भी उनकी पार्टी 213 सीटों के साथ सत्ता में है और ममता लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी हैं। टीएमसी का गढ़ रहा नंदीग्राम इस बार हाथ से निकल गया और साथ ही ममता बनर्जी का विद्यायक का पद भी। बिना कोई सीट जीते ममता मुख्यमंत्री तो बन गयी हैं पर उन्हें 6 महीने के अंदर उन्हें राज्य की किसी विधानसभा से सीट जीतना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा।

ममता बनर्जी की पार्टी का इस बार सत्ता में आना इसलिए भी चर्चा में बना हुआ है क्योंकि बीजेपी के प्रमुख नेता चाहे वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) हों या फिर गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) , सब ने ममता को हराने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। फिर भी ममता बनर्जी की पार्टी ने 2016 चुनाव से अच्छा प्रदर्शन करते हुए 213 सीटों पर विजय हासिल की। ममता बनर्जी अपने जज्बे, फैशले और आक्रामक रवैये के लिए जानी जाती हैं। जहाँ से उठ कर उन्होंने से मुकाम हासिल किया है वो दूसरों के लिए प्रेरणा है।