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गरीबी को शिक्षा का ज्योत दिखा रहीं हैं 16 साल की आरुषी

Arushi Aggarwal
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ज्ञान कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे केवल हासिल किया जाये और बाद में जंग लगने के लिए छोड़ दिया जाये। शिक्षा का वास्तविक मूल्य तभी सामने आता है जब आप वास्तव में इसका उपयोग कुछ फर्क लाने के लिए करते हैं। न्यू जर्सी की 16 साल की लड़की आरुषी अग्रवाल का यही हाल है। आरुषी हम सभी के लिए एक प्रेरणा बन गयी है क्यूंकि वो कम पढ़े लिखे बच्चों को ज्ञान अर्जित करने में मदद करती है। उन्होंने, न्यू जर्सी की लड़की के रूप में सुर्खियां बटोरीं, जिसने बिहार के कमज़ोर बच्चों को पढ़ाया है।

वो कहावत सही है की ‘charity begins at home’, और आरुषी ने 16 साल की उम्र में इसे सच भी साबित कर दिया है। आरुषी अग्रवाल एक ऐसी लड़की है जो बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद कर रही है और वो भी मुफ्त में। 2018 में आरुषी ने Unknown16 नामक पहल की। इस पहल के तहत आरुषी ने प्रोग्रामिंग पाठ्यक्रम तैयार किया, जिसका उपयोग छात्रों को पढ़ाने के लिए किया जा सकता है और उन्होंने इसे पूरे भारत के विभिन्न एनजीओ के साथ साझा किया। हरयाणा में जन्मी आरुषी ने अपनी स्कूली शिक्षा बेंगलुरु में शुरू की और फिर 10 साल की उम्र में न्यू जर्सी चली गयी।

आरुषी अग्रवाल की विस्तृत जानकारी के लिए क्लिक करें

https://www.linkedin.com/in/arushi-aggarwal-292597170

आरुषी ने बिहार के लहानी क्लब में युवा सामूह के साथ काम करना शुरू किया और सप्ताह के अंत में वर्चुअल क्लास भी लेना शुरू कर दिया। वह बिहार के कुंबाडीह, नैयाडीह, जबराह और गोविंदपुर के लगभग 300 छात्रों को पढ़ाती हैं। उसने छात्रों के लिए कंप्यूटर लैब स्थापित किया। वर्तंमान में आरुषी, बिहार में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ना और लिखना सीखा रहीं हैं, क्यूंकि कोडिंग के लिए भाषा का बुनयादी ज्ञान बहुत आवश्यक है। एक बार जब वे यह सीख लेते हैं, तो वह उन कमजोर बच्चों के लिए कोडिंग की मूल बातें से शुरू करेंगी।

आरुषी ने अक्टूबर 2019 में GoFundMe पर एक अभियान शुरू किया, जिससे उन्हें एक हज़ार डॉलर जुटाने में मदद मिली। इन पैसों से उन्हें कंप्यूटर और फर्नीचर खरीदने सहित बुनियदी ढांचा के निर्माण में काफी मदद मिली। आरुषी एक यूएन क्लाइमेट एक्शन स्पीकर और एक्टिविस्ट भी है। उन्होंने अपना पहला बुक प्रोजेक्ट ‘हैकथॉन’ भी लॉन्च किया है जो की अमेज़न पर उपलब्ध है। इस पहल की सफलता से उन्होंने साबित कर दिया है की जब आप वास्तव में कोई बदलाव लाना चाहते हैं तो दूरी और उम्र कोई बाधा नहीं होती।

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