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Patna में सर्वे टीम के आने से पहले नगर निगम का नया प्रयोग, अब स्कूल, कॉलेज और रेस्टोरेंट की भी होगी स्वच्छता रैंकिंग

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PATNA : राजधानी पटना काे स्वच्छता सर्वे में बेहतर रैंक दिलाने की मुहिम में नगर निगम अपने स्तर पर एक नया प्रयोग करने जा रहा है. इसके लिए स्कूल, हॉस्पिटल, होटल, रेस्टोरेंट, मोहल्ला, मार्केट और मॉल को भी निगम की ओर से इस बार रैंकिंग दी जाएगी. नगर निगम अपने शहर में ही स्वच्छता रैंकिंग आयोजित करेगा. मार्च में स्वच्छता सर्वे टीम के आने से पहले नगर निगम अपने स्तर पर संस्थाओं को रैंकिंग प्रदान करेगी.

सभी पांच कैटेगरी में टॉप-5 संस्थानों की रैंकिंग होगी. इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए संस्थानों को रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 24 जनवरी है. संस्थान नगर निगम की वेबसाइट www.pmc.bihar.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. सभी संस्थानों के लिए अलग-अलग पैरामीटर तय किए गए हैं.

जानकारी के मुताबिक इस बार सर्वेक्षण में सीनियर सिटीजन और युवाओं से अधिक फीडबैक लिया जाएगा. कोरोना वेस्ट मैनेजमेंट के साथ ही धार्मिक व सामाजिक आयोजन से निकल रहे कूड़े के निस्तारण की क्या व्यवस्था है, इसके भी अंक तय किए गए हैं.

इसके लिए निर्धारित सभी अंकों को मिलाकर सबसे अधिक नंबर प्राप्त करने वाले संस्थानों को रैंकिंग दी जाएगी. अस्पताल के लिए बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण और इसके लिए तय मापदंडों का पालन हो रहा है या नहीं, यह चैलेंज दिया गया है. मार्केट और मॉल के लिए कचरा कलेक्शन का सिस्टम और साफ-सफाई के लिए परखा जाएगा.

स्कूलों के लिए कचरा वेस्ट के निष्पादन और साफ-सफाई को लेकर नए प्रयोग के लिए चैलेंज दिया गया है. मोहल्लों या वार्ड के नागरिकों को सफाई के पैमाने पर परखा जाएगा. होटल या रेस्टोरेंट से निकलने वाले वेस्टेज के निष्पादन और हाइजीन को लेकर भी चैलेंज दिया गया है. सभी को अपनी श्रेणी में मुकाबला करना है.

बता दें, सभी संस्थानों को रैंकिंग देने के लिए नगर निगम विशेषज्ञों की टीम का गठन कर रहा है. सभी अलग-अलग संस्थानों का निरीक्षण करने के लिए टीम वहां जाएगी, जिसने स्वच्छता रैंकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन किया है. नगर निगम से मिलने वाली रैंकिंग को संस्थान अपने प्रचार-प्रसार के तौर पर भी उपयोग कर सकते हैं.

पिछले साल स्वच्छ सर्वेक्षण में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के 2000 अंक निर्धारित किए थे. इस मर्तबा 3000 किया गया है. सर्विस लेवल प्रोग्रेस में प्लास्टिक या पॉलिथीन पर प्रतिबंध, गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग उठने की व्यवस्था, कूड़े का निस्तारण और सीवरेज की सफाई भी शामिल है. शहर में सफाई का काम मैनुअल है या मशीनी, इसे भी परखा जाना है. इसमें कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा के मानदंड भी सर्वेक्षण में तय किए जाएंगे. अगर सफाई कर्मियों को कोरोना वैक्सीन नहीं लगी है तो अंक कट भी सकते हैं.

आपको बताते चले इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 के तहत शहर की सफाई की परीक्षा 7500 अंक की होगी. जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह 6000 अंक की थी. शहरों की सफाई के आंकलन करने के लिए कई नए मापदंड जोड़े गए हैं.

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