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KOLKATA के दुर्गा पूजा को विश्व स्तर पर मिली पहचान, UNESCO ने किया हेरिटेज लिस्ट में शामिल

Durga-Puja-Kolkata
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DESK: भारत एक सामाजिक और संस्कृति में समृद्ध देश है. हर क्षेत्र में अलग संस्कृति अलग तरह की परम्परा होने के बावजूद हर एक त्योहार को यहां तवज्जो दी जाती है. खास कर देवी पूजा का भारत में एक खास महत्व होता है. बात जब देवी पूजा की हो तो दुर्गा पूजा सब से पहले दिमाग में आती है. और जब ज़िक्र दुर्गा पूजा का हो तो कोलकाता के दुर्गा पूजा को कैसे भूल सकते हैं. हमारे देश में प्रशिद्ध कोलकाता की दुर्गा पूजा को अब यूनेस्को के मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Heritage) की लिस्ट में शामिल किया गया है.

कोलकाता के दुर्गा पूजा के यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Heritage) की लिस्ट में शामिल होने को ले कर पीएम मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए ट्वीट किया, ‘हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी की बात! दुर्गा पूजा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विशेषताओं के सर्वोत्तम पहलुओं पर प्रकाश डालती है. और, सभी को कोलकाता में दुर्गा पूजा का अनुभव होना चाहिए।’

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNESCO) ने ट्विटर पर देवी की मूर्ति से जुड़ी एक तस्वीर करते हुए लिखा, ‘कोलकाता में दुर्गा पूजा को अमूर्त विरासत लिस्ट में शामिल किया गया है. भारत को शुभकामनाएं’

ममता बनर्जी ने कहा, ‘खुशी से झूम रहे हैं हम’

वहीं इस मौके पर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर ख़ुशी जाहिर की है. उन्होंने लिखा, ‘बंगाल के लिए गर्व का क्षण! दुनिया भर में हर बंगाली के लिए, दुर्गा पूजा एक त्यौहार से कहीं अधिक है, यह एक भावना है जो सभी को एकजुट करती है. और अब, दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में जोड़ा गया है. हम सब खुशी से झूम रहे हैं!’

बंगाल वासियों के लिए यह वार्षिक उत्सव हिंदी महीने के अनुसार कार्तिक मास में मनाया जाता है. 10 दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार में देवी दुर्गा की पूजा की जाती है. त्योहार से पहले के महीनों में, कारीगर पवित्र गंगा नदी से लाई गई मिट्टी का उपयोग करके देवी दुर्गा और उनके परिवार की मूर्तियों को बनाते हैं. ऐसे में बंगाल भर के असंख्य कारीगर उत्सव में शामिल होते हैं और थीम-आधारित पंडालों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं.

बता दें, बंगाल सरकार ने यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत की सूची में शामिल करने का आवेदन किया था. अब यूनेस्को ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है. दुर्गा पूजा हिंदुस्तान में मनाया जाने वाला ये एक अहम त्यौहार है. इसे खासतौर पर बंगाल में मनाया जाता है वहीं पूरे देश में इसे नवरात्रों के रूप में मनाया जाता है.

कुम्भ मेला और योग पहले से हैं लिस्ट में शामिल

जानकारी के लिए बता दें, 2017 में कुंभ मेला और 2016 में योग को भी यूनेस्को के मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Heritage) की लिस्ट में जगह मिली थी. पंजाब के पारंपरिक पीतल और तांबे के शिल्प को 2014 में मान्यता मिली, जबकि मणिपुर के संकीर्तन अनुष्ठान गायन को 2013 में मान्यता मिली.

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