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अब लखनऊ में बनेगी BrahMos मिसाइल, जानिए क्या है इसकी खासियत

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DESK : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल इकाई और डीआरडीओ लैब का शिलान्यास किया. इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब हथियारों का आयातक नहीं, निर्यातक देश बनेगा.

यह मिसाइल रूस और भारत के रक्षा संस्‍थानों के साथ आने से बनी है. BrahMos में से Brah का मतलब ‘ब्रह्मपुत्र’ और Mos का मतलब ‘मोस्‍कवा’. दोनों देशों की एक-एक नदी के नाम से मिलाकर इस मिसाइल को नाम दिया गया है. रूस के सहयोग से बनने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भटगांव यूनिट में होगा, जबकि एयरपोर्ट के पास 22 एकड़ में डीआरडीओ लैब और ब्रह्मोस मिसाइल टेस्टिंग सेंटर बनेगा.

रक्षामंत्री ने कहा कि हम ब्रह्मोस किसी देश पर आक्रमण के लिए नहीं बना रहे, बल्कि हम चाहते हैं कि देश के पास ऐसी ताकत हो कि कोई मुल्क आंख उठाकर न देख सके. रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, हमने दो बार स्ट्राइक कर संदेश दे दिया है. जरूरत पड़ी तो फिर उस पार मारकर आ सकते हैं.

दुनिया की सबसे बड़ी थल सेना का दम भरने वाले भारत के पास एक से एक घातक हथियार हैं. हमारी तीनों सेनाओं के बेड़े में ऐसी-ऐसी मिसाइलें हैं, दुश्‍मन को संभलने का मौका तक नहीं देती. जितने वक्‍त में उनका डिफेंस सिस्‍टम तैयार हो पाता है, ये मिसाइलें अपना काम निपटा चुकी होती हैं.

ब्रह्मोस ऐसी ही एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. 21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक, ब्रह्मोस मैच 3.5 यानी 4,300 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार से उड़ सकती है.

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत ये है कि इसे कहीं से भी लॉन्‍च किया जा सकता है. जमीन से हवा में मार करनी वाले सुपरसोनिक मिसाइल 400 किलोमीटर दूर तक टारगेट हिट कर सकती है. पनडुब्‍बी वाली ब्रह्मोस मिसाइल का पहला टेस्‍ट 2013 में हुआ था. यह मिसाइल पानी में 40 से 50 मीटर की गहराई से छोड़ी जा सकती है. ऐसी पनडुब्ब्यिां भी बनाई जा रही हैं जिनमें इस मिसाइल का छोटा रूप एक टारपीडो ट्यूब में फिट किया जाएगा.

हवा में मिसाइल छोड़ने के लिए SU-30MKI का खूब इस्‍तेमाल होता आया है. यह मिसाइल 5 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ सकती है. अधिकतम 14,00 फीट की ऊंचाई तक यह मिसाइल उड़ती है. वैरियंट्स के हिसाब से वारहेड का वजन बदल जाता है. इसमें टू-स्‍टेज प्रपल्‍शन सिस्‍टम है और सुपरसोनिक क्रूज के लिए लिक्विड फ्यूल्‍ड रैमजेट लगा है.

ब्रह्मोस मिसाइल के कई वैरियंट्स हैं. ताजा टेस्‍ट 290 किलोमीटर रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल के होने हैं जो कि एक नॉन-न्‍यूक्लियर मिसाइल है. यह मैच 2.8 की रफ्तार से उड़ती है यानी आवाज की रफ्तार का लगभग तीन गुना. इसे सुखोई लड़ाकू विमान से लॉन्‍च किया जाएगा. दोनों साथ मिलकर एक घातक कॉम्‍बो बनाते हैं जिससे दुश्‍मन कांपते हैं. इस मिसाइल का एक वर्जन 450 किलोमीटर दूर तक वार कर सकता है. इसके अलावा एक और वर्जन टेस्‍ट हो रहा है जो 800 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को हिट कर सकता है.

सेना के एक वरिष्‍ठ अधिकारी के मुताबिक, ब्रह्मोस मिसाइल को प्रिसिजन टारगेटिंग के लिए यूज किया जा सकता है. पिछले कुछ सालों में यह सेना के सबसे पसंदीदा हथियार के रूप में उभरी है. सुखोई और ब्रह्मोस का कॉम्‍बो अंडरग्राउंड बंकर्स, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स के अलावा कई मिलिट्री टारगेट्स पर सर्जिकल स्‍ट्राइक करने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है.

रक्षामंत्री ने कहा कि भारत को हथियारों का निर्यातक देश बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है. कुछ दिन पहले रूस, फ्रांस के रक्षामंत्री भारत आए थे. हमने दुनिया को संदेश दे दिया कि भारत आएं और ‘मेक फॉर इंडिया’ बनाए. रक्षा मंत्री ने परियोजना के लिए 200 एकड़ जमीन मुहैया कराने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी नया भारत बना रहे हैं. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत मैत्री और करुणा का संदेश देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम देश की सुरक्षा पर आंच आने देने की छूट देंगे. उन्होने कहा, नए भारत की नींव श्रद्धेय अटल जी ने रखी थी और उसका निर्माण प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं.

कई नए रूपों में आएगी ब्रह्मोस

ज्‍यादा रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल पर रूस और भारत काम कर रहे हैं. इस अपग्रेड को पहले से बनी मिसाइलों में भी लागू किया जाएगा. ब्रह्मोस-II के नाम से एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल भी बनाई जा रही है जिसकी रेंज करीब 290 किलोमीटर होगी. यह मिसाइल मैच 8 की रफ्तार से उड़ेगी यानी अभी के लगभग दोगुना. यानी यह दुनिया की सबसे तेज हाइपरसोनिक मिसाइल होगी.

इसके अलावा ब्रह्मोस-एनजी (नेक्‍स्‍ट जेनरेशन) जो कि वर्तमान मिसाइल का एक मिनी वर्जन है, डिवेलप की जा रही है. यह मिसाइल अभी की मिसाइल के मुकाबले आधी वनी होगी. इसमें रडार क्रॉस सेक्‍शन भी कम होंगे जिससे दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसका पता लगा पाना और मुश्किल हो जाएगा. इस मिसाइल को सुखोई, मिग, तेजस के अलावा राफेल व अन्‍य लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ा जाएगा.

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