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1 जनवरी से होंगे ये बदलाव, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

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DESK: 1 जनवरी 2022 से कुछ नए नियम लागू होने वाले हैं. देश में हर महीने की पहली तारीख को कुछ बदलाव होते हैं. 2022 के जनवरी महीने की पहली तारीख भी कुछ नए नियमों या बदलावों की गवाह बनेगी. ये बदलाव रुपये पैसों से जुड़े हैं और आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक को प्रभावित करेंगे. आइए जानते हैं कि 1 जनवरी 2022 से क्या नया होने वाला है.

  1. IPPB (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) के ग्राहकों को एक लिमिट से अधिक कैश निकालने और डिपॉजिट करने पर अब चार्ज देना होगा. IPPB में यह नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होने जा रहा है. सेविंग्स और करंट अकाउंट में बिना चार्ज के महीने में आप केवल 10,000 रुपये ही जमा कर पाएंगे. इस लिमिट से ज्यादा रकम डिपॉजिट करने पर ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ेगा. इसी तरह सेविंग्स और करंट अकाउंट से हर महीने 25 हजार रुपये तक का कैश विदड्रॉल मुफ्त में होगा और उसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर 0.50 फीसदी चार्ज देना होगा.

2. 1 जनवरी 2022 से एटीएम से कैश निकालना महंगा हो जाएगा. एक जनवरी से, ग्राहकों को फ्री एटीएम ट्रांजेक्शन की सीमा खत्म होने के बाद किए जाने वाले ट्रांजेक्शन पर अभी की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा. जून के महीने में ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसे लेकर शुल्क बढ़ाने की इजाजत दे दी थी और नए साल पर इसे लागू किया जाएगा.

3. 1 जनवरी से कपड़े और जूते महंगे होने वाले हैं. इसकी वजह है कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने विभिन्न प्रकार के वस्त्र, परिधान और जूतों के लिए वस्तु एवं सेवा कर की दर को 12% कर दिया है. पहले यह दर 5 फीसदी थी. नई जीएसटी दर 1 जनवरी 2022 से प्रभावी होगी. हालांकि, कुछ सिंथेटिक फाइबर और यार्न के लिए जीएसटी दरों को 18% से घटाकर 12% कर दिया गया है.

4. जीएसटी (Goods & Service Tax) के गलत रिटर्न (GST Return) भरना नए साल में महंगा पड़ने वाला है. एक जनवरी से वस्तु एवं सेवा कर (GST) अधिकारी गलत जीएसटी रिटर्न भरने वाले व्यापारियों के खिलाफ वसूली के लिए सीधे कदम उठा सकेंगे. अक्सर यह शिकायत मिलती है कि अपने मासिक जीएसटीआर-1 फॉर्म में ज्यादा बिक्री दिखाने वाले कारोबारी कर देनदारी को कम करने के लिए भुगतान से संबंधित जीएसटीआर-3बी फॉर्म में इसे कम करके दिखाते हैं.

5. सबसे बड़ा बदलाव कर्मचारियों के जीवन में आ सकता है. कर्मचारियों की सैलरी से लेकर पीएफ और काम के घंटों से लेकर वीकली ऑफ तक में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है.

दरअसल, देश में नया श्रम कानून अप्रैल 2022 यानी नए वित्त वर्ष से लागू हो सकता है. एक समाचार एजेंसी ने वित्त मंत्रालय से जुड़े सीनियर अधिकारी के हवाले से इसकी पुष्टि की है. इससे कर्मचारियों की सैलरी से लेकर उनकी छुट्टियां और काम के घंटे भी बदल जाएंगे. इसके मुताबिक हफ्ते में चार दिन काम और तीन दिन छुट्टी होगी. इसमें काम के घंटे आठ की बजाय 12 हो जाएंगे. हालांकि, श्रम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हफ्ते में 48 घंटे कामकाज का नियम ही लागू रहेगा.

पहले ये श्रम कानून 2021 में लागू होने थे. क्योंकि यह विषय केन्द्र और राज्य दोनों के दायरे में है. ऐसे में इसे जमीन पर उतारने के लिए राज्य और केन्द्र दोनों को लागू करना होगा. अभी कई ऐसे राज्य हैं जो इसपर ड्राॅफ्ट अभी तैयार कर रहे हैं.

क्या है कानून में

इसमें यह सुविधा भी होगी कि जहां आठ घंटे काम कराया जाएगा वहां एक दिन छुट्टी होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि कम से कम 13 राज्यों ने इन कानूनों के कॉन्ट्रैक्ट नियमों को तैयार कर लिया है. बता दें नई श्रम सहिता में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिससे ऑफिस में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों से लेकर मिलों और फैक्ट्रियों में काम कर वाले मजदूरों तक पर असर पड़ेगा.

मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यवसाय सुरक्षा तथा स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर चार श्रम संहिताओं को अगले वित्त वर्ष तक लागू किए जाने की संभावना है. केंद्र ने इन संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है और अब राज्यों को अपनी ओर से नियम बनाने हैं, क्योंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है. अधिकारी ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के अगले वित्त वर्ष तक लागू होने की संभावना है.

उन्होंने कहा, बड़ी संख्या में राज्यों ने इनके कॉन्ट्रैक्ट नियमों को अंतिम रूप दे दिया है. केंद्र ने फरवरी 2021 में इन संहिताओं के कॉन्ट्रैक्ट नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र चाहता है कि राज्य भी इसे एक साथ लागू करें.

केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर श्रम संहिता के मसौदा नियमों को कम से कम 13 राज्य तैयार कर चुके हैं. इसके अलावा 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मजदूरी पर श्रम संहिता के मसौदा नियमों को तैयार किया है। औद्योगिक संबंध संहिता के कॉन्ट्रैक्ट को 20 राज्यों ने और सामाजिक सुरक्षा संहिता के मसौदा नियमों को 18 राज्यों ने तैयार कर लिया है.

हाथ में वेतन कम पीएफ ज्यादा मिलेगा

विशेषज्ञों का कहना है कि नए कानून से कर्मचारियों के मूल वेतन और भविष्य निधि की गणना के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा. इससे एक तरफ कर्मचारियों के पीएफ खाते में हर महीने का योगदान बढ़ जाएगा लेकिन हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा. नई श्रम संहिता में भत्तों को 50 फीसदी पर सीमित रखा गया है. इससे कर्मचारियों के कुल वेतन का 50 फीसदी मूल वेतन हो जाएगा.

पीएफ की गणना मूल वेतन के फीसदी के आधार पर की जाती है जिसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल रहता है. ऐसे में अगर किसी कर्मचारी वेतन 50 हजार रुपये प्रति माह है तो उसका मूल वेतन 25 हजार रुपये हो जाएगा और बाकी के 25 हजार रुपये में भत्ते शामिल होंगे. मूल वेतन बढ़ने से कर्मचारी की ओर से पीएफ ज्यादा कटेगा और कंपनी का अंशदान भी बढ़ेगा.

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