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बेरोजगार हल्ला बोल: देश ने देखा सबसे बड़ा डिजिटल आंदोलन, 5-6 मिलियन छात्र और शिक्षकों ने #JusticeForRailwayStudents के लिए उठाई आवाज

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PATNA : देश में तेजी से बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या अब जख्म से कैंसर का रूप लेती जा रही है. लेकिन भारत के युवा इसे बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. देश के युवाओं ने सोई हुई सरकार को नींद से जगाने की ठान ली है. बुधवार को देश भर के लगभग 5 मिलियन छात्र और शिक्षकों ने डिजिटल आंदोलन के माध्यम से सरकार को अपनी ताकत दिखा दी. ये आंदोलन बिलकुल वैसा ही रहा, जिसके बारे में लगभग एक हफ्ते से चर्चा की जा रही थी. बुधवार की सुबह से ही ट्विटर पर #JusticeForRailwayStudents ट्रेंड में रहा. इस हैशटैग के साथ लगभग 50-60 लाख रेलवे के छात्रों और टीचर ने ट्वीट किया और जल्द से जल्द रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा कराने की मांग की.

दरअसल कोचिंग एसोसिएशन ऑफ भारत की ओर से अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन का आह्वान किया गया था, जिसमें लाखों की संख्या में बेरोजगार युवक और शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद की. एक दिसंबर यानी कि आज सुबह 11 बजे से ही लाखों-करोड़ों की संख्या में बेरोजगार युवकों ने शिक्षकों के साथ मिलकर सरकार और रोजगार के प्रति सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया. #JusticeForRailwayStudents को एक साथ फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसे ट्रेंड कराया और सरकार को यह एहसास दिलाया कि अगर जल्द ही रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा नहीं ली गई तो वे सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे.

आपको बता दें कि भारतीय रेलवे में ग्रुप D के 1.03 लाख पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थी काफी समय से परीक्षा करवाने की मांग कर रहे हैं. इस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को आवेदन किये हुए ढाई साल से भी अधिक का वक्त बीत चुका है. रेलवे ने इस भर्ती के लिए मार्च 2019 में ही आवेदन मांगे थे, लेकिन अभी तक इस भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी है. यानि कि जिन बच्चों ने ग्रेजुएशन में रहते इस फॉर्म को भरा, उनका तो पोस्ट ग्रेजुएशन हो गया. बच्चे चार सेमेस्टर की परीक्षा देकर स्नाकोत्तर की डिग्री हासिल कर चुके लेकिन रेलवे का एक एग्जाम न हो सका. यही मुख्य वजह है कि बच्चे कॉपी कलम छोड़कर नौकरी और हक के लिए बड़े आंदोलन कर रहे हैं.

गौरतलब हो कि रेलवे ग्रुप डी भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई सूचना नहीं जारी हुई है. इसी तरह एनटीपीसी सीबीटी के पहले चरण के परिणाम और दूसरे चरण की परीक्षा के आयोजन के लिए भी बच्चे काफी परेशान हैं. ऐसे बच्चे जल्द से जल्द इस भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं और वे चाहते हैं कि सरकार इसपर अमल करे. क्योंकि ये उनके भविष्य का सवाल है.

ट्रेंडिंग बिहार आपको पहले दिन से बता रहा है कि कोचिंग एसोसिएशन ऑफ भारत ने मूलतः 6 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंका है. उनकी मांग है कि यूपीएससी, एसएससी, स्टेट सिविल सर्विस या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह रेलवे, एनटीपीसी आदि के लिए भी एग्जाम कैलेंडर बनाया जाये. उचित समय पर वैकेंसी निकालकर बहाली को प्रक्रिया को संपन्न किया जाये.

इस आंदोलन की दूसरी मांग है कि स्वच्छ और त्रुटिहीन परीक्षा हो. जिसमें कोई धांधली न हो. बच्चों की परीक्षाओं को रद्द न किया जाये. इसके लिए व्यवस्था को सुदृढ़ और सशक्त बनाया जाये. किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का समय पर रिजल्ट का प्रकाशन हो. एकसमान स्तर के पेपर की परीक्षाओं को कराया जाये. वेटिंग लिस्ट वालों की क्रमबद्ध घोषणा की जाये. ताकि प्रतीक्षा सूची में जिन उम्मीदवारों या अभ्यर्थियों का नाम हो, वो भी नौकरी या बहाली के लिए आश्वस्त रहें. कुल मिलकर सर्वसम्मति से उनकी एक ही राय है कि बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता हो. किसी प्रकार का कोई कन्फ्यूजन न हो.

इस अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन के लिए एक रणनीति तैयार की गई थी. लगभग हफ्ते दिन पहले ही कोचिंग एसोसिएशन ऑफ भारत के सदस्यों द्वारा बरोजगारी और इस अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन के लिए एक रणनीति तैयार की गई थी. कोचिंग एसोसिएशन ऑफ भारत के सदस्यों द्वारा बरोजगारी और समय पर परीक्षाओं का आयोजन नहीं होने को लेकर एक बैठक आहूत की गई. इसी बैठक में आपसी सहमति से विचार विमर्श कर एक खाका तैयार किया गया, जिसमें खान जीएस सेंटर के खान सर, प्लेटफॉर्म कोचिंग संस्थान के नवीन सर, करियर विल के राकेश यादव सर, मैथ मस्ती के विपिन यादव सर, एग्जामपुर के विवेक सर, कौटिल्य जीएस के प्रदीप सर, बीएससी अकादमी के सुधीर कुमार समेत देश भर के सैकड़ों कोचिंग संचालक शामिल थे.

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