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Bihar में 50% शिक्षक ही जायेंगे स्कूल, नीतीश सरकार का आदेश जारी

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PATNA : बिहार (Bihar) में कोरोना की रफ़्तार को देखते हुए नीतीश सरकार ने राज्य के शिक्षकों को एक बड़ी राहत दी है. सरकार ने यह फैसला किया है कि आधे शिक्षक ही स्कूल में जायेंगे. कोरोना संक्रमण को देखते हुए नीतीश सरकार ने यह फैसला किया है. शिक्षा विभाग के सचिव असंगबा चुबा आओ की ओर से यह आदेश सभी कुलपतियों और जिलाधिकारियों को जारी किया गया है. साथ ही शिक्षकों के लिए एक और राहत की बात ये है कि सरकार ने उनके वेतन भुगतान के लिए 586 करोड़ रुपये जारी किया है.

बिहार सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत 586 करोड़ 41 लाख 39 हजार रुपये की स्वीकृति देते हुए इसे जारी करने का आदेश दिया है. इस राशि से 3.52 लाख शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को 15 प्रतिशत बढ़ा वेतनमान के साथ भुगतान होगा. शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज के मुताबिक समग्र शिक्षा अभियान स्कीम के तहत केंद्रांश मद में प्राप्त पहली किस्त के विरुद्ध राज्यांश की राशि जारी किए जाने से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी.

इसके अलावा शिक्षकों को संक्रमण से बचाने के लिए स्‍कूलों और अन्‍य शैक्षणिक संस्‍थानों में शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर 50 फीसद क्षमता में ही बुलाने का निर्देश दिया है. आपको बता दें कि बिहार के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल 21 जनवरी तक बंद हैं. कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग को भी 21 जनवरी तक बंद रखा गया है. लेकिन उनके दफ्तरों में शिक्षकों और कर्मचारियों की 50 प्रतिशत उपस्थिति होगी. बाकी के 50 प्रतिशत शिक्षक और कर्मचारी अगले दिन आएंगे.

शिक्षा विभाग के सचिव असंगबा चुबा आओ की ओर से जारी आदेश के अनुसार शिक्षा सचिव ने आनलाइन माध्यम से शिक्षण की व्यवस्था को प्राथमिकता देने का आदेश दिया गया है. अफसरों को यह भी आदेश दिया गया है कि सभी जिलों में शैक्षणिक संस्थानों के 15 से 18 साल के छात्र-छात्राओं के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर टीकाकरण की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे. इसमें जिलाधिकारी द्वारा सिविल सर्जन के माध्यम से कार्यान्वयन में मदद लिया जाएगा.

उधर दूसरी ओर, बिहार पंचातय नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को डीपीओ स्थापना दुर्गा यादव को नियोजित शिक्षकों के वेतन विसंगति दूर करने को सौंपा. उन्हें बताया गया कि टीईटी से नियुक्त शिक्षक का वेतन निर्धारण इंडेक्स 03 पर किया जा रहा है. जबकि उच्च न्यायालय पटना द्वारा निर्गत आदेश में इंडेक्श चार की बात को समाहित किया गया है. इसलिए इस आदेश में सुधार की आवश्यकता है.

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