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Bihar Diwas Special : इन बिहारियों ने लहराया देश-दुनिया में परचम, जानिए क्या है इनकी खासियत

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PATNA : बिहार (Bihar Diwas) के लिए आज का दिन बेहद ही खास है. जानकारी हो कि 22 मार्च 1912 को संयुक्त प्रांत से अलग होकर बिहार को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिला था. यानी आज बिहार का 110वां स्थापना दिवस है. जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता का बागडोर संभाली तो उन्होंने 22 मार्च को बिहार दिवस (Bihar Diwas) मनाने का फैसला किया. जिसके बाद से प्रदेश वासी राज्य के अंदर और बाहर बिहारी होने पर गर्व महसूस करने लगे. बिहार के प्रतिभा को परखने के लिए विभिन्न प्रकार के मौके मिलने लगे. तो आइए बिहार दिवस के मौके पर ऐसे बिहारियों के बारे में जानते हैं जिन्होंने देश और विदेश में अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया है.

अनिल अग्रवाल : आपको यह बात जानकर हैरानी हो जाएगी कि देश से लेकर विदेशों में व्यापार करने वाली कंपनी वेदांता ग्रुप के मालिक एक बिहारी हैं. जिनका नाम अनिल अग्रवाल है. वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी के संस्थापक अनिल किसी समय स्क्रैप डीलर हुआ करते थे. बता दें कि अनिल पटना के मिलर हाई स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता के बिजनेस को प्राथमिकता दी और एल्यूमीनियम कंडक्टर बनाने में जुट गये. 1970 में उन्होंने कबाड़ की धातुओं की ट्रेडिंग शुरू की. 1980 के दशक में उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना कर डाली. स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 1990 के दशक में कॉपर को रिफाइन करने वाली देश की पहली प्राइवेट कंपनी बनी. यही कंपनी आगे चलकर वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड व अब वेदांता ग्रुप बन गयी.

आशीष झा : इस सूची में दूसरे बड़े नाम की अगर चर्चा की जाए तो वह आशीष झा का, आशीष पेशे से डॉक्टर है और बिहार के मधुबनी से आते हैं. इन्होंने अपने प्रतिभा का परचम अमेरिका में लहराया है. जानकारी हो कि मधुबनी के पुरसौलिया गांव के रहने वाले डॉ आशीष झा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के कोविड कोर्डिनेटर हैं. वे पांच अप्रैल को अपनी जिममेदारी को संभालेंगे.बिहार के बेटे को अमेरिका में यह सम्मान मिलना निश्चित रुप से बिहार और बिहारियों के गर्व की बात है. उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से आंतरिक चिकित्सा में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एमडी की उपाधि हासिल की. वे फिलहाल ब्राउन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन हैं. कोरोना काल के दौरान उनका नाम चर्चा में था.

डॉ कृष्ण पाल सिंह : इस सूची में अगला नाम बिहार के लखीसराय के रहने वाले नासा वैज्ञानिक डॉ कृष्ण पाल सिंह का आता है. जानकारी हो कि हॉलटेक इंटरनेशनल (न्यूक्लियर पावर प्लांट)के प्रेसिडेंट और सीइओ केपी सिंह बीआइटी सिंदरी के पूर्ववर्ती छात्र हैं. सिंह ने भारतीय होने के नाते कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड में 7 करोड़ 50 लाख रुपये का सहयोग भी दिया था. पीएम केयर्स फंड में दान करने के साथ ही अपने पैतृक गांव बड़हिया में 225 करोड़ की लागत से आधुनिक अस्पताल खोलने का भी प्रस्ताव उन्होंने सरकार को दिया है. डॉ पाल बड़हिया में 100 बेडों का आधुनिक अस्पताल खोलना चाहते हैं. इसके निर्माण पर वे लगभग 225 करोड़ रुपये खर्च करेंगे.

अभय सिंह :बिहार के पटना के रहने वाले अभय सिंह रुस के कुसर्क क्षेत्र से विधायक है. बता दें कि अभय रुस के राष्ट्रपति ब्लामीदिर पुतिन की पार्टी के एमएलए हैं. इनकी शिक्षा-दीक्षा पटना के लोयला हाई स्कूल से हुई. इसके बाद वे मेडिकल की पढ़ाई के लिए रूस चले गये और यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. बाद में वे ब्लामिदीर पुतिन के संपर्क में आये और राजनीति में आ गये. जिसके बाद वे कुर्सक क्षेत्र से ही डेप्यूतात चयनित हुए. अभय सिंह रूस में करीब 30 साल से समय से रह रहे हैं, लेकिन दिल से बिहारी हैं.

संजय प्रधान :इस सूची में अगला नाम बिहार के रहने वाले संजय प्रधान का है दरअसल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ओर से जनवरी में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘दावोस एजेंडा 2022’ में दुनिया भर के जिन 15 लोगों को फोरम की ओर से दिये जाने वाले वार्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, उनमें पटना के संजय प्रधान भी शामिल थे. उन्हें यह पुरस्कार दुनिया के 78 देशों में गुड गर्वनेंस और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके किये गये बेहतरीन कार्यों के लिए दिया गया था. वे अभी अंतरराष्ट्रीय संगठन ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप के सीइओ हैं. इस संगठन के संस्थापकों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी थे.

इनके अलावा सैकड़ों बिहारियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा देश और दुनिया में मनवाया है. इसकी फेहरिस्त बहुत ही लंबी है, लेकिन निश्चित तौर पर इन बिहारियों के कारण आज बिहार काफी गौरव महसूस कर रहा है.

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