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बिहारवासियों को सेब के लिए नहीं करना होगा इंतजार, अब यहीं होगी Apple की खेती

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VAISHALI : अब बिहार के लोगों को सेब (Apple) के लिए कश्मीर और हिमाचल प्रदेश का नहीं करना पड़ेगा इंतजार. वैशाली के खेसराही गांव के किसान संजय सिंह ने 2014 में ग्राफ्ट वाले 800 सेब के पौधे लगाए थे. लेकिन 15 पौधे छोड़ सभी मर गए थे. तब संजय की उम्र 36 साल थी.

उन्होंने हार नहीं मानी और 2016 में 5 अलग-अलग वेराइटी के रूट स्टॉक वाले पौधे लगाए. समय पर देखभाल और कटिंग व प्रोनिंग करते रहे. अब एक-एक पौधे में 20 से 40 किलो तक फल आने लगे हैं. दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई या जून में फल तैयार होते हैं. संजय बताते हैं कि भागलपुर के नौगछिया के किसान गोपाल प्रसाद सिंह ने भी 5 एकड़ में सेब के पौधे लगाए थे. पिछले साल से फल भी आने लगे हैं.

अब बिहार में सेब की खेती होगी. सेब किसानों की आय को भी बढ़ाएगा. राज्य में सेब की खेती की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना शुरू की है. विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत 10 हेक्टेयर में सेब की खेती कराने का लक्ष्य रखा है.

वैशाली, बेगूसराय और भागलपुर में 2-2 हेक्टेयर जबकि मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, वैशाली, कटिहार और समस्तीपुर में एक-एक हेक्टेयर में खेती के लिए किसानों से 15 जनवरी तक आवेदन मांगा गया है. सेब की खेती की लागत इकाई प्रति हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार 250 रुपए हैं.

यहां के मौसम के अनुसार इन वेराइटी में बेहतर फल के लिए 8 घंटे धूप जरूरी हैं. इससे फल का रंग भी बेहतर होता है और बीमारी से भी बचाव करेगा. विशेषज्ञ बताते हैं कि सेब के पौधे को फंगस से बचाना जरुरी है. स्वाद के मामले में हरा पीला कलर वाले हरिमन 99 खट्टा मीठा स्वादिष्ट होता है.

सेब की खेती जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी व ठंडे प्रदेशों में अधिक होती है. लेकिन हरिमन 99, एना, डोरसेट गोल्डन, माइकल और ट्रिपिकल स्वीट्स जैसी वेराइटी 40 से 50 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान सह कर फल देता है. 15 नवंबर से 15 फरवरी पौधे लगाने का उपयुक्त समय है. बता दें, पौधे लगाने के दो वर्ष बाद इसमें फूल आते हैं. दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई व जून में फल तैयार हो जाते हैं. 5 साल बाद सेब के पेड़ में अधिक फल आने लगते हैं. मई और जून में फल बाजार में इसकी कीमत 200 रुपए प्रति किलो तक मिलेगी.

सेब की खेती के लिए चयनित किसानों को वैशाली के देसरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा. किसानों को हिमाचलप्रदेश से हरिमन 99 वेराइटी का पौधा दिलाया जाएगा. प्रशिक्षण सहित एक पौधे की लागत लगभग 200 रुपए होंगे. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहायक निदेशक उद्यान प्रशांत झा ने बताया कि हिमाचल से पौधे मंगाए गए हैं. हिमाचल प्रदेश से ही किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेषज्ञ भी आएंगे.

किसान 15 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन horticulture.bihar.gov.in पर कर सकते हैं. इससे संबंधित विशेष जानकारी जिला के सहायक निदेशक उद्यान से ली जा सकती है.

नंदकिशोर, उद्यान निदेशक का कहना है कि, कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेब की खेती की योजना शुरू की जा रही है. हिमाचलप्रदेश से पौधे आ गए हैं. कुछ किसानों की सेब की खेती की सफलता के बाद यहां इसकी खेती कराने का निर्णय लिया गया. किसानों को प्रशिक्षण और अनुदान दिया जाएगा. किसानों की आय बढ़ाने में सेब की खेती सहायक साबित होगी.

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