साहित्य नई कलम

Aman Aakash : रेलवे स्टेशन की सुबह

सुबह के पांच बजने वाले हैं। पर्यावरण का ब्राइटनेस निम्नतम है। रात भर की हांफती-भागती ट्रेन गंतव्य के आउटर पर खड़ी सिग्नल के इंतज़ार में है। मानो कह रही...

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साहित्य नई कलम

Aman Aakash : रेलवे स्टेशन की सुबह

सुबह के पांच बजने वाले हैं। पर्यावरण का ब्राइटनेस निम्नतम है। रात भर की हांफती-भागती ट्रेन गंतव्य के आउटर पर खड़ी सिग्नल के इंतज़ार में है। मानो कह रही हो “मैं तो थक गयी भाई साब, आराम करने दो कुछ...

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