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World Food Day, अहमियत खाने की।

world food day
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धरती पर बसे हर प्राणी की कई प्रमुख आवश्यकताएँ हैं और उसमे से एक है ‘भोजन।’ भोजन हर मनुष्य का मौलिक अधिकार है। पुरे विश्व में कई प्रकार के भोजन मिलते हैं और सबकी अपनी- अपनी बनावट और स्वाद है। शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास के लिए भी भोजन बहुत ज़रूरी है। हर साल 16 अक्टूबर को ‘वर्ल्ड फ़ूड डे’ के रूप में मानाया जाता है। आज हीं के दिन 1945 में ‘फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन’ (संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन) की स्थापना हुई, तभी से हर साल इसी दिन ‘वर्ल्ड फ़ूड डे’ का आयोजन किया जाता है।

फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन, संयुक्त राष्ट्रीय की एक विशेष एजेंसी है, जिसका उद्देश्य दुनिया में फ़ैल रहे भुखमरी को हमेशा के लिए ख़त्म करना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूख से लड़ रहे लोगों की मदद करना है। इसके 194 सदस्य राज्य है और 130 से अधिक देशों में यह काम करते है। यह आर्गेनाईजेशन यह सुनिश्चित करता है प्रत्येक व्यक्ति को खाद्य सुरक्षा प्राप्त हो और स्वस्थ रहने के पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल सके क्योंकि एक स्वस्थ आहार एक अच्छा जीवन जीने के लिए बहुत जरूरी है।

इस साल वर्ल्ड फ़ूड डे का थीम है ‘ग्रो, नरिश, सस्टेन, टुगेदर। our action is our future।’ देशभर में फैले वैश्विक महामारी ने लोगों के स्वास्थ को काफी प्रभावित किया है। विशेषज्ञों कहना है की इस कोरोना काल में ऐसे आहार ग्रहण करे जो विटामिन सी से भरपूर हों और जो इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हों। शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़ाना, सर्वोत्तम स्वास्थ्य को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा देखा गया है की पौष्टिक आहार पुरानी बीमारी के साथ-साथ निराशा और चिंता को भी काम करता है।

इस दिन नवीन बीज, यन्त्र, खाद्य की प्रदर्शनी की जाती है, आधुनिक तरीके बातए जाते हैं ताकि किसानों को खेती करने में ज़्यादा परेशानी न आये और कम समय में अच्छी फसल उगाई जा सके। भोजन हर प्राणी का अधिकार है। भोजन को हमारे घर तक पहुंचाने में किसानों का सबसे बड़ा योगदान है। वे दिन- रात कड़ी मेहनत करते है ताकि हमें भूखा न सोना पड़े, इसलिए हमें शपथ लेना चाहिए की हम खाना न बर्बाद करके किसी भूखे को भोजन करा दे ।

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