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अब होगी धोखेबाजों की पहचान, जानिए किसके द्वारा विकसित किया गया अनोखा डिटेक्टर ‘FakeBuster’

fakebuster
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आये दिन हम देखते है की फेस बदलने के एक से एक app आ गए हैं। आप अपने चेहरे को किसी भी चेहरे से बड़ी आसानी से बदल सकते हैं और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा। लेकिन इस तरह के facial expressions के transfer का उपयोग, सोशल मीडिया पर किसी को बदनाम करने या मजाक बनाने के लिए भी किया जाता है। वर्तमान महामारी की स्थिति में जब अधिकांश ऑफिसियल मीटिंग्स और काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं, तो ऐसे में इस तरह के धोखेबाजी को रोकना एक ज़रूरत सी बन गयी है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए iit रोपड़ ने ‘FakeBuster’ नामक एक अनूठा डिटेक्टर डेवेलप किया है। आइये चलते हैं और जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

रोपड़ के Indian Institute of Technology और ऑस्ट्रेलिया के Monash University, के researchers ने ‘FakeBuster’ नामक एक अनूठा डिटेक्टर डेवेलप किया है। यह डिटेक्टर किसी की जानकारी के बिना virtual conference में भाग लेने वाले imposters यानी की धोखेबाजों की पहचान करेगा। साथ हीं यह किसी को बदनाम करने या मजाक बनाने के लिए सोशल मीडिया पर हेरफेर किए गए चेहरों का भी पता लगाएगा। यह सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म ‘FakeBuster’, DeepFake डिटेक्शन तकनीक का उपयोग करके लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान धोखेबाजों का पता लगाने वाले पहले टूल में से एक है।

आपको बता दे की यह डिटेक्टर Dr. Abhinav Dhall, Associate Prof. Ramanathan Subramanian और दो स्टूडेंट्स Vineet Mehta और Parul Gupta द्वारा डेवेलप किया गया है। और अच्छी बात यह है की इस डिटेक्टर को संयुक्त राज्य अमेरिका में Intelligent User Interface पर 26th International Conference में भी प्रस्तुत किया गया है।

फेक न्यूज़, पोर्नोग्राफ़ी और ऐसी अन्य ऑनलाइन कंटेंट फैलाने में सोशल मीडिया के उपयोग को व्यापक रूप से प्रमुख नतीजों के साथ देखा गया है। इस तरह के manipulations ने हाल ही में facial expressions के transfer के आधार पर वीडियो-कॉलिंग प्लेटफॉर्म में भी अपना रास्ता खोज लिया है। आइये चलते है और देखते हैं की इस FakeBuster टूल के बारे में इसके डेवलपर Dr. Abhinav Dhall ने क्या कहा

आपको बता दे की यह FakeBuster सलूशन, ज़ूम कॉल या अन्य वीडियो प्लेटफार्म पर एक organizer को यह पता लगाने में सक्षम बनाता है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान किसी अन्य व्यक्ति के वीडियो में हेराफेरी की गई है या नहीं। इसका मतलब यह है कि यह तकनीक यह पता लगाएगी कि क्या कोई धोखेबाज अपने सहयोगी की छवि को अपने साथ जोड़कर किसी colleague की ओर से वर्चुअल मीटिंग में भाग ले रहा है?

इस software platform का परिक्षण ज़ूम और स्काइप एप्लिकेशन के साथ किया गया है और यह पाया गया है की यह टूल 90 प्रतिशत से अधिक एक्यूरेट है। ‘फेकबस्टर’ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में काम करता है। इस डिवाइस को वर्तमान में केवल लैपटॉप और डेस्कटॉप के साथ जोड़ा जा सकता है। हालाँकि इसे अभी मोबाइल फ़ोन पर चलाने के लिए काम किया जा रहा है।

इस डिटेक्टर के अलावा iit रोपड़ ने एक और उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, IIT रोपड़ ने एक पोर्टेबल इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक श्मशान प्रणाली यानी की electric cremation system विकसित किया है।

यह system अपनी तरह की एक तकनीक है, जो दाह संस्कार के लिए लकड़ी का उपयोग करने के बावजूद धुआं उत्पन्न नहीं करती है। यह शवदाह के लिए जरूरी लकड़ी की आधी मात्रा का ही इस्तेमाल करता है और दहन वायु प्रणाली का उपयोग करने के चलते यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। यह प्रणाली, उन लोगों के करीबी एवं प्रियजनों को सम्मानजनक शवदाह प्रदान कर सकती है, जिन्हें पैसों की दिक्कत है और जो लकड़ी की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं। यह प्रणाली विक-स्टोव तकनीक पर आधारित है, जिसमें जब बत्ती जलती है तो पीली चमकती है और इसे धुआंरहित नीली लौ में परिवर्तित किया जाता है। इससे pollution के chances कम होते हैं।

आपको याद है, हाल ही में ज़ूम कॉल पर श्वेता नाम की लड़की की आवाज़ का एक ऑडियो वायरल हुआ था। यह ऑडियो लोगों के लिए मज़ाक का एक विषय बन गया था और इसपे कई meme भी बने थे। इस ऑडियो के चलते सारे श्वेता नाम की लड़की एक तरह से बदनाम सी हो गयी थी और लोग यहाँ तक बोलने लगे थे की कोई भी श्वेता नाम की लड़की ट्रस्ट करने के लायक नहीं है। अब वो ऑडियो रियल था या फिर मज़े के लिए उसे बनाया गया था, ये तो हमे पता नहीं पर आपको बता दे की iit की यह टीम, फेक ऑडियो का भी पता लगाने के लिए इस डिवाइस पर काम कर रही है। जल्द ही अब हमें फेक वीडियो के साथ फेक ऑडियो का भी पता चल सकेगा।

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