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पानी की शुद्धता बताएगा ये मॉडल, आर्सेनिक वाले पानी के सेवन से होते हैं ये रोग

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बिना पानी के हम नहीं, पानी हमारी जिंदगी है। लेकिन पानी का शुद्ध होना भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं। पूर्वी भारत की कई जगहों पर पानी में आर्सेनिक की समस्या बीते दो दशकों से है। इसकी वजह से इन क्षेत्रों में करोड़ों लोगों को सेहत से जुड़ी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने आर्सेनिक के प्रदूषण का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है।

IIT Kharagpur के आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस मॉडल की सहायता से शोधकर्ताओं को गंगा-डेल्टा क्षेत्र के भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी और मानव स्वास्थ्य पर उसके कुप्रभावों की भविष्यवाणी करने में कामयाबी हासिल हुई है। इससे आने वाले समय में देश के आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए योजना बनाने में आसानी होगी। यह मॉडल पेयजल में आर्सेनिक की मौजूदगी का पता लगाने में मददगार साबित हो सकता है। पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक एवं मानवीय गतिविधियों से संबंधित मापदंडों के आधार पर विकसित यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम पर आधारित मॉडल है।

आर्सेनिक वाले पानी के सेवन से त्वचा में कई तरह की समस्याएं होती हैं। इनमें प्रमुख हैं- त्वचा से जुड़ी समस्याएं, त्वचा कैंसर, ब्लैडर, किडनी व फेफड़ों का कैंसर, पैरों की रक्त वाहनियों से जुड़ी बीमारियों के अलावा डायबिटीज, उच्च रक्त चाप और जनन तंत्र में गड़बड़ियां। आर्सेनिकोसिस नामक बीमारी आर्सेनिक प्रदूषण की वजह से ही होती है।

विस्तृत जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें

https://kgpchronicle.iitkgp.ac.in/ai-to-detect-how-safe-is-your-drinking-water/

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