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Corona Test : अब नहीं कराना होगा Nasal Swab

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National Environmental Engineering Research Institute यानी NEERI ने कोरोनावायरस के टेस्टिंग का एक नया तरीका खोज निकाला है। कोरोना (Corona Test) की टेस्टिंग के लिए अब आपको मुंह और नाक में Swab डलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तकनीक के जरिए आप कंफर्टेबल होकर इस टेस्ट को करवा सकते हैं।

इस तकनीक को Sterile Saline Gargle कहते हैं जिसके चलते आप अब कोरोना का टेस्ट गरारे के द्वारा दे सकते हैं। और बाद में इसे RT-PCR तकनीक के द्वारा लैब में टेस्ट किया जाएगा।

जहां लगभग 1.5 साल से कोरोना की पहचान के लिए antigen और RT PCR किया जाता है। जिसमें RT-PCR टेस्ट स्कोर सबसे सटीक माना जा रहा है। इस स्टेट के लिए आपके नाक और गले से स्वयं लिए जाते हैं और इसे एक एक्सट्रैक्शन ट्यूब में डाल दिया जाता है फिर इसे लैब में ले जाकर RT-PCR तकनीक के द्वारा टेस्ट किया जाता है और पता किया जाता है कि आप कोरोना पॉजिटिव है या फिर नेगेटिव।

लेकिन अब national environmental engineering research institute (NEERI) ने Gagling यानी गरारे के द्वारा सैंपल लेने की तकनीक विकसित की है। इस टेस्ट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने मंजूरी दे दी है। जिसमें आपको टेस्ट के जरिए आपके गरारे का सैंपल लिया जाएगा और इसे लैब में ले जाकर RT PCR तकनीक के द्वारा वायरस का पता लगाया जाएगा।

NEERI ने एक ऐसी टेक्निक तैयार की है जिसमें संभावित रूप से संक्रमित व्यक्ति को एक कोनिकल ट्यूब दी जाएगी, जिसमें 5 मिलीलीटर सीरियल्स सलाइन होगा। व्यक्ति को इस लाइन से कुल्ला करना होगा और फिर उसी ट्यूब में डालकर बंद कर देना होगा। फिर इसे लैब में ले जाकर RT-PCR टेक्निक के द्वारा वायरस का पता किया जाएगा।

NEERI का कहना है कि रिजल्ट rt-pcr टेस्टिंग जितना विश्वसनीय ही होगा। इस टेस्ट को लैब तक ले जाने के लिए किसी निश्चित तापमान की जरूरत नहीं पड़ती। NEERI ने बताया है कि इस टेस्ट के लिए अब आर एन ए यानी ribo nuclient acid की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी तक जितने भी टेस्ट होते थे उनमें रहने की जरूरत पड़ती थी लेकिन इस गरारे वाले टेक्निक के बाद RNA की जरूरत नहीं पड़ेगी

NEERI का कहना है कि रिजल्ट rt-pcr टेस्टिंग जितना विश्वसनीय ही होगा। इस टेस्ट को लैब तक ले जाने के लिए किसी निश्चित तापमान की जरूरत नहीं पड़ती। NEERI ने बताया है कि इस टेस्ट के लिए अब आर एन ए यानी ribo nuclient acid की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी तक जितने भी टेस्ट होते थे उनमें रहने की जरूरत पड़ती थी लेकिन इस गरारे वाले टेक्निक के बाद RNA की जरूरत नहीं पड़ेगी.

RNA वाले तकनीक से कोरोना का टेस्ट काफी महंगा होता है लेकिन NEERI द्वारा विकसित इस तकनीक के बाद कोरोना का टेस्ट सस्ता हो जाएगा।
इस टेस्ट के लिए NEERI ने एक बफर मीडियम तैयार किया है जिसमें कलेक्ट किए गए सैंपल को मिक्स किया जाएगा और फिर 30 min के लिए रूम टेंपरेचर पर सैंपल को incubate किया जाएगा। इसके बाद 6 मिनट तक 98 डिग्री सेंटीग्रेड पर गर्म किया जाएगा। जिससे RT PCR टेस्ट के लिए आर एन ए टेंप्लेट मिल सकेगा।

देश में कोरोना के टेस्ट में देरी की वजह से कई लोग अपनी जान से हाथ धो रहे हैं उसमें यह टेक्निक काफी मददगार साबित हो सकती है। इस टेक्निक में रिजल्ट आने में ज्यादा देरी नहीं होगी और समय की भी बचत होती है।