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Black Fungus : कोरोना से भी बेरहम है ब्लैक फंगस, मिनटों में चली जाती है जान, ऐसे करें पहचान और बचाव

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पूरी दुनिया तकरीबन डेढ़ साल से कोरोना महामारी से लड़ रही है। कई जगह हालात अब काफी हद तक काबू में हैं पर हमारे देश के हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। जहाँ कोरोना से लाखों लोग अपनी जान गवां चुके हैं वही अब एक नई बीमारी ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है।

हम बात कर रहे हैं “म्यूकर मायकोसिस” यानी कि ब्लैक फंगस की। पिछले कुछ दिनों में कोरोना से लड़ रहे या उबर चुके मरीज़ों में ये बीमारी देखी गयी है। इस इंफेक्शन से सबसे बड़ा डर ये है कि ये तेजी फैलता है और लोगों के आंखों की रोशनी चली जाती है या कुछ अंग काम करना बंद कर देते हैं। इस बीमारी की वजह से कई लोगों को अपने शरीर के अंग गवाने पड़े तो वही कई यों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा ।

इस बीमारी की गंभीरता का अंदाज आप इस चीज़ से लगा सकते है कि कैंसर को भी जानलेवा प्रभाव पैदा करने में महीनों लगते हैं वहीं ब्लैक फंगस से जान कुछ दिनों या कुछ घंटों में जा सकती है। यह ‘ब्लैक फंगल इनफेक्शन’ या Mucormycosis रहस्यमई नहीं है। पर यह इंफेक्शन बहुत ही दुर्लभ था।

कैंसर से भी खतरनाक यह म्यूकर मायकोसिस या ब्लैक फंगस है क्या ?

रिसर्च के अनुसार Mucormycosis एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है जो के Moulds के एक ग्रुप, जिसे micromycetes कहते हैं, के कारण होता है। यह फंगस हमारे चारों ओर मुक्त रूप में मौजूद होता है लेकिन किसी के शरीर के अंदर इन्फेक्शन को संभव बनाने के लिए इसे एक विशेष इन्वायरमेंट की जरूरत होती है। यह समान्यतः नाक ,साइनस ,आंखों में या दिमाग में पाया जाने वाला इंफेक्शन है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह इंफेक्शन दिमाग में फैल जाए तो इसका इलाज काफी मुश्किल है।

यह इंफेक्शन इतना खतरनाक क्यों है ?

ब्लैक फंगस के खतरनाक होने की वजह एक तो यह काफी तेज़ी से फैलता है और दूसरा यह जानलेवा इंफेक्शन है, जिसमें मृत्यु दर काफी ऊंची है। विशेषज्ञों ने बताया है कि Mucor से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर लगभग 50 से 70% तक होती है। अगर एक हद से ज्यादा संक्रमण फैल गया तो मरीज को बचा पाना असंभव होता है। इसे और खतरनाक बनाती है इसके फैलने की तीव्र गति। यह कैंसर की तरह व्यवहार करता है, लेकिन कैंसर को जानलेवा प्रभाव पैदा करने में कम से कम कुछ महीने तो लगते हैं जबकि इससे जान कुछ दिनों या कुछ घंटों तक में जा सकती है। इतना खतरनाक होने के बावजूद अभी हाल तक इसे इतना भयानक नहीं माना जाता था। यह एक दुर्लभ था रोग था।डॉक्टर्स का कहना है कि किसी व्यस्त सेंटर पर भी तीन-चार साल में कभी एक मामले ही आते थे। पहले अत्यधिक कम इम्यून वाले मरीजों, जैसे कैंसर पीड़ित ,जिनको अनियंत्रित डायबिटीज है या जिनको नया अंग लगा हो और वह immunosuppressant (इम्युनो सप्रेसेंट) थेरेपी पर हो,वह इसको लेकर संवेदनशील थे। लेकिन अब कोविड के कारण इसके मामले बहुत बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कोविड और ब्लैक फंगस में यह संबंध इसलिए स्थापित हो पा रहा है क्योंकि कोविड वायरस इस फंगस को आसानी से फैलने के लिए अनुकूल इन्वायरमेंट प्रदान करता है और साथ ही इसका एक कारण कोविड मरीजों के इम्यून रिस्पांस में कमी हो जाना भी है। लेकिन इसके बावजूद यह संक्रमण उन कोविड मरीजों तक सीमित था जो गंभीर डायबिटीज, कैंसर के मरीज थे या जो किसी दूसरी बीमारी के लिए immunosuppressant (इम्युनो सप्रेसेंट) पर थें। doctors का कहना है कि mucormycosis का अब सामान्य मरीजों में तीव्र प्रसार का कारण है स्टेरॉयड का विवेकहीन प्रयोग होना।

कोविड का अभी तक कोई भी इलाज नहीं है। ऐसे में ट्रीटमेंट के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जा रहा है।

डॉक्टर्स का कहना है कि अगर मरीज का ऑक्सीजन लेवल 90 के करीब है और आप उसे काफी स्टेरॉयड दे रहे हैं, तो इसका एक साइड इफेक्ट ब्लैक फंगस भी हो सकता है। इस बीमारी का जल्दी पकड़ में आना बहुत जरूरी है। सीटी स्कैन के जरिए इस इन्फेक्शन का पता लगाया जा सकता है। स्टेरॉयड, विशेषकर जब इसका हाई डोज लिया जाए या लंबे समय तक प्रयोग किया जाए, तो mucormycosis यानी कि ब्लैक फंगस का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि स्टेरॉयड भी हमारे इम्यूनिटी को कम कर सकता है और इसमें ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है, जिनको डायबिटीज नहीं है उनमें भी। स्टेरॉयड इंफेक्शन को फैलने के लिए अनुकूल इन्वायरमेंट भी बना सकता है।

AIIMS के डॉक्टर , डॉ रणदीप गुलेरिया ने हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कई लोग शुरुआती चरणों में ही स्टेरॉयड के हाई डोज लेने लगते हैं। इसकी वजह से वायरस तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सकता है। जिन लोगों में कोरोनावायरस क्षण कम है उनमें भी वायरस का फेफड़ों तक फैलने के कारण वायरल निमोनिया के गंभीर मामले आ सकते हैं। हर एक स्टेरॉयड बेस्ड ड्रग जरूरी नहीं है की ब्लैक फंगस का खतरा पैदा करे। मुख्यतः सिस्टमिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल के कारण ही mucormycosis होने का खतरा होता है।

क्या कोविड के इलाज के लिए स्टेरॉयड बेस्ड ड्रग नहीं लेने चाहिए?

अभी तक कोविड का कोई भी इलाज नहीं है। और ऐसा कोई ड्रग नहीं है जो कोविड वायरस को मार सके.इस बीच कई स्टेरॉयड ‘सेवियर ड्रग’ के रूप में सामने आए हैं जिनमें गंभीर मामलों में बीमारी को नियंत्रित करने की क्षमता है और इसका बड़े स्तर पर प्रयोग हो रहा है। पर यह दवाइयां डॉक्टर्स के देख रेख में ही लेनी चाहिए। इस वक़्त में गूगल कर के डॉक्टर बन ने से बचें। कोई भी दवाई लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

स्टेरॉयड की टाइमिंग और ड्यूरेशन बहुत महत्वपूर्ण है, विशेषकर कोविड के मामलों में। एक्सपर्ट्स के अनुसार शुरुआती 5-7 दिनों में स्टेरॉयड नहीं लेना चाहिए। उसके बाद भी मरीज की हालत देखकर यह निर्णय डॉक्टर को लेना चाहिए। उपचार में स्टेरॉयड का इस्तेमाल बहुत सोच समझ कर किया जाना चाहिए।

क्या है ब्लैक फंगस या म्यूकर मायकोसिस के लक्षण

डॉक्टर्स के अनुसार Mucormycosis के लक्षण और वार्निंग साइन

  • किसी भी तरह का चेहरे पर स्वेलिंग होना ,खासकर आंखों और गालों के आसपास
  • नाक बहना
  • नाक बंद रहना
  • सर दर्द (अन्य लक्षणों के साथ )

अगर आपको यह शुरुआती लक्षण नजर आ रहे हैं तो आपको तुरंत OPD में बायोप्सी कराना चाहिए तथा जितनी जल्दी हो सके एंटीफंगल थेरेपी शुरू करना चाहिए। डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर कोई मरीज़ बिना डॉक्टर की जानकारी के स्टेरॉयड बेस्ड ड्रग ले रहा है तो ब्लैक फंगस के लक्षणों को पहचानने में चूक हो सकती है।

हम एक बार फिर कहेंगे, अपनी मर्ज़ी से या सगे संबंधियों के कहने से , व्हाट्सएप फॉरवर्ड पड़ के या गूगल कर के कोई भी दवाई ना लें, कोई भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

अब बात आती है कि क्या ब्लैक फंगस का इलाज संभव है?
जी हां, इसका इलाज संभव है पर लेकिन सफलता दर और उपचार का प्रकार कुछ बातों पर निर्भर करता है। जैसे कि इन्फेक्शन किस स्टेज पर है। वह तय करेगा कि मरीज को बचाया जा सकता है या नहीं।

डॉक्टर के अनुसार, उपचार कैसे होगा वह इस बात पर भी निर्भर करता है कि किस अंग में इंफेक्शन है। घाव को ठीक करने के लिए बड़ी सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।

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