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रोमांस किंग देव साहब का काला कोट उनके लिए ही बना परेशानी,एक झलक को पागल थी लड़कियां

devanand
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रोमांस किंग के नाम से लोकप्रिय, अपनी डायलॉग डिलीवरी, अदाकारी, लुक्स की वजह से लोगों के बीच बहुत पॉपुलर बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देवानंद (Dev Anand) का आज 97वां जन्मदिन है। देव आनंद एक अभिनेता थे, निर्देशक थे, निर्माता थे। बतौर हीरो देव आनंद की पहली फिल्म 1946 में आई ‘हम एक हैं’ थी। देव साहब के गर्दन झुकाने का वो गजब अंदाज, काली पैंट शर्ट का उनका लिबास लड़कियों को बेहोश करता था। कहा जाता है उन्हें देखकर उन दिनों सफेद शर्ट पर काला कोट पहनने का स्टाइल बहुत ट्रेंड हुआ था, लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि सार्वजनिक जगहों पर काला कोट पहनने पर ही बैन लगा दिया गया था। 

क्या है कहानी?

देव आनंद की साल 1958 में आई फिल्म ‘काला पानी’ का सफेद शर्ट और काला कोट वाले लुक पर लड़कियों के साथ- साथ लड़के भी फिदा हो गए थे। देव आनंद जब भी सफेद शर्ट के ऊपर काले रंग का कोट डालकर बाहर निकलते थे, तो लड़कियां उन्हें देखने के लिए जमा हो जाती थी। धीरे-धीरे काला कोट देव आनंद के लिए परेशानी बनता जा रहा था, क्योंकि उन्हें उस कोट में देख कर लड़कियां छत से छलांग लगाने तक को तैयार थीं। जिसके बाद इस समस्या का समाधान करने के लिए कोर्ट को बीच में दखल देना पड़ा। कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए देव आनंद के काले कोट पहनने पर बैन लगा दिया था। हालांकि इस वाकये की सच्चाई क्या है यह खुद देवानंद ने अपनी किताब ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में बताई है। देवानंद ने अपनी किताब में इसे गलत बताया है। हालांकि, इतना जरूर था कि देवानंद सफेद शर्ट और काले कोर्ट में गज़ब के हैंडसम लगते थे।

देव आनंद का असली नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था। देव आनंद ने अपने पूरे फिल्मी करियर में लगभग 112 फिल्में की हैं। देव आनंद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म ‘हम एक हैं’ से की थी, ‘आगे बढो’, ‘मोहन’, ‘हम भी इंसान हैं’ जैसी कुछ फिल्मों के बाद, उनके सफर का पहला मुख्य मील का पत्थर साबित हुई फिल्मिस्तान की ‘जिद्दी’। उन्हें सिनेमा में सहयोग के लिए सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के से भी सम्मानित किया गया। 

उनकी दिवानगी का आलम इतना था कि उनकी फिल्म ‘हरे राम हरे कृष्ण’ में उनकी बहन का रोल करने के लिए कोई स्थापित अभिनेत्री तैयार नहीं थीं। कई नई लड़कियों के स्क्रीन टेस्ट के बाद भी उन्हें मन मुताबिक चेहरा नहीं मिल रहा था। उस वक्त देव आनंद जीनत अमान से मिले और देव साहब उनसे बातचीत कर रहे थे कि जीनत ने उन्हें हैंडबैग से सिगरेट निकालकर दी। उनकी यही अदा देव साहब को भा गई और उन्होंने जीनत को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया।

देव आनंद चाहते थे कि उन्हें कभी मरा हुआ नहीं दिखाया जाए और वो देश से बाहर मरना चाहते थे। हुआ भी कुछ ऐसा ही दे आनंद का लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ था।

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