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अब पानी में बजेगा रेडियो

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तामिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के पंबन शहर के एक मछुआरे ने ‘कदल ओसई एफएम 90.4’ शुरू किया है, जो की मछुआरों के लिए भारत का पहला और एकमात्र रेडियो चैनल है। यह रेडियो चैनल ‘आर्मस्ट्रांग फर्नांडो’ नाम के मछुआरे द्वारा लांच किया गया है। यह श्रोताओं को समुद्र संबंधी और कोविड 19 से लेकर मछुआरों और महिलाओं से सम्बंधित मुद्दे की भी जानकारी देता है। यह रेडियो चैनल समुदाय के मछुआरों द्वारा और महिलाओं द्वार रेडियो पर प्रस्तुत किये जाने वाले लोक गीतों को प्रसारित करता है।

पंबन के आर्मस्ट्रांग फर्नांडो बचपन से हीं रेडियो सुनने के शौक़ीन थे। फर्नांडो ने 8 वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनका मछली का कारोबार है। उन्होंने किसानों के लिए सामुदायिक रेडियो सुनने के लिए विभिन्न स्थानों की यात्रा की। बाद में उन्होंने अपने मछली पकड़ने के समुदाय के लिए एक रेडियो शुरू करने की योजना बनाई।

आर्मस्ट्रांग के अनुसार पंबन की लगभग 80 प्रतिशत आबादी मछली पकड़ने में लगी हुई है। यह रेडियो उनकी मदद के लिए शुरू किया गया है। इस रेडियो की ट्रांसमिशन रेंज अब 5-10 किलोमीटर है। उनका कहना है की सरकार को पंबन द्वीप में रेडियो को प्रसारित करने के लिए प्रशस्त रास्ता बनाना चाहिए। भारतीय और श्रीलंकाई द्वीपों की अंतराष्ट्रीय सीमा से निकटता के संबंध में सरकारी नियमों के कारण, द्वीप मछुआरों को केवल 24 घंटे समुद्र में रहने की अनुमति है। उस अवधि के दौरान वे जिस मछली को पकड़ सकते, उसे किसी भी कीमत पर बेचना पड़ता था। कभी- कभी यह भी जानकारी ईकट्ठा और संचारित की जाती है की अधिक मछलियां कहाँ हैं और वे उच्च गति तरंगों या तूफानों के दौरान कैसे विचरण करती हैं।

यह रेडियो रोजमर्रा के मछली पकड़ने के जीवन का एक अभिन्न अंग बन रहा है। यह एफएम पंबन द्वीप पर एक मत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहा है क्यूँकि ये अधिक अल्टरनेटिव आजीविका बनाने से लेकर सामाजिक दूरी पर लेटेस्ट जानकारी तक समुद्री सुरक्षा जागरूकता पहुंचाता है। रेडियो स्टेशन प्रबंधक गायत्री के अलावा अन्य 12 कर्मचारी परिवार के सदस्य पार्ट टाइम मछुआरे हैं। छात्रें, गृहिणियाँ, मछुआरों को शहर में होने वाले दैनिक घटनाओं के बारे में पता चलता है क्यूँकि यह चैनल स्थानीय समुदाय को लाभान्वित करता है।

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