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पटना के Pintu Prasad, जिन्हे गणपति बप्पा ने दिलाई पहचान

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हमारा देश विविधताओं का देश है। यहाँ हर क्षेत्र में अलग अलग प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं। साथ हीं भारत में क्रिकेट किसी त्योहार से कम नहीं है। क्रिकेट और त्योहार दोनों को ही हमारे देश में बहुत महत्व दिया जाता है। इस साल पटना में त्योहार और क्रिकेट का अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। यहाँ के गणेश उत्सव में क्रिकेट की झलक दिख रही है।

10 दिनों के लिए बप्पा का आगमन हो चुका है, गणेश उत्सव बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है। अगले दस दिनों तक माहौल बप्पामय रहने वाला है। पटना में भी गणपति पूजा हर्षो उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अलग-अलग पंडालों में बप्पा अलग-अलग रूप में विराजमान हो रहे हैं। लेकिन पटना के गणेश उत्सव में इस बार खास आकर्षण का केंद्र है, गणपति का क्रिकेटर अवतार। बप्पा के इस क्रिकेटर रूप की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। पटना में गणपति बप्पा क्रिकेट खेलते दिख रहे हैं। गणपति को यह रूप देने वाले मूर्तिकर की खूब तारीफ़ हो रही है। गणपति की यह खूबसूरत मूर्ति बनाई है पिंटू प्रसाद (Pintu Prasad) ने।

पिंटू, उपेन्द्र महारथी शिल्प संस्थान में सिरेमिक आर्ट सिखाते हैं। उन्होंने पहले भी गणपति की अलग-अलग प्रकार की मॉडर्न टच वाली मूर्तियाँ बनायी हैं। पिंटू ने गणेश की मोबाइल से सेल्फी लेते हुई भी मूर्ति बनाई थी। इस बार उन्होंने अपनी कला कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गणपति को क्रिकेटर का अवतार दिया है। यह बताने की जरुरत नहीं है की हमारे देश में क्रिकेट का कितना क्रेज़ है। इस बार पिंटू की बनायी मूर्ति में गणपति, पैरों में पैड पहनकर, टीशर्ट में दिख रहे हैं और बल्ले से शॉट लगाने की स्टाइल में हैं, सामने से उनकी सवारी चूहा बॉलिंग कर रहा है।

इस मूर्ति में पिंटू प्रसाद ने रंगों का भी बेहद खूबसूरत चयन किया है। हाल ही में पिंटू को 14 अगस्त को वस्त्र मंत्रालय की ओर से हस्तशिल्प कलाओं के लिए वर्ष 2018 का नेशनल मेरिट अवार्ड देने की घोषणा की गयी है। अवार्ड के साथ उन्हें 75 हजार रुपए भी दिए जाएंगे। पिंटू प्रसाद को यह पुरस्कार देने की घोषणा उनकी नृत्य करते बाल गणेश की कृति के लिए की गई है।

पिंटू को गणेश जी की प्रतिमा बनाने के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं। जब उनसे पूछा गया कि गणेश की मूर्तियां बनाने का मन कैसे बना तब इस सवाल पर वे कहते हैं की 2014 में उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान (Upendra Maharathi Shilp Anusandhan Sansthan) में कॉम्पीटिशन का आयोजन था। उसमें उन्होंने भगवान बुद्ध का स्कल्पचर बनाया। हालांकि, उनका चयन स्टेट अवार्ड के लिए नहीं हो पाया। अगले साल 2015 में खटिया पर आराम फरमाते हुए गणेश की मूर्ति बनायी और इस मूर्ति से उनका चयन स्टेट अवार्ड के लिए हो गया। उसके बाद लोग उनसे गणेश की मूर्ति बनाने की मांग करने लगे। पिंटू बताते हैं कि वो अब तक गणेश जी की सौ से ज्यादा मूर्ति बना चुके हैं। पिंटू प्रसाद ने गणपति की मूर्तियों को अलग पहचान दी है।

पिंटू प्रसाद का कहना हैं कि मूर्तिकला के लिए उन्हें जितने अवार्ड मिले हैं उनमें आधे गणेश की मूर्ति बनाने के लिए ही मिले हैं। खटिया पर आराम फरमाते गणेश की मूर्तियां इन्होंने सीरीज में बनाई थी जिसे काफी सराहना मिली थी। गणपति को नया रूप देने वाले पिंटू वाक़ई तारीफ़ के हक़दार हैं।