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ये बिहार है, यहां ये जुगाड़ सब्जियों को 7 दिनों तक रखता है ताजा

vegetable cooling machine
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भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की ज़्यादातर जनसंख्या किसानी के कार्यों पर निर्भर है। किसान का जीवन आसान नहीं होता, उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रोडक्ट को सुरक्षित रखना होता है। खासकर के हरी सब्जियां और फल। ये बहुत जल्द खराब हो जाते हैं। ज्यादातर किसानों के पास अपने प्रोडक्ट को सुरक्षित स्टोर करने की जगह नहीं होती है। इस वजह से उन्हें अपने प्रोडक्ट औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। आज हम आप तक लेकर आए हैं एक ऐसे शक्स की कहानी जिसने किसानों के स्टोरेज की इस परेशानी को दूर करने के लिए एक नयी पहल की है।

बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले विकास झा (Vikash Jha) ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसा सब्जी कूलर को तैयार किया है, जो बिना इलेक्ट्रिक और फ्यूल के हफ्ते के सातों दिन हरी सब्जियों और फलों को सुरक्षित रख सकता है। इससे किसानों को अच्छा-खासा फायदा हो रहा है। पिछले दो सालों से विकास देशभर में इसकी मार्केटिंग कर रहे हैं। फिलहाल उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए है।

आपको बता दें एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले विकास झा की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। इसके बाद उन्होंने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग (Agriculture Engineering) की पढ़ाई की और फिर 2016 में IIT मुंबई से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। विकास बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। थोड़ी-बहुत जमीन थी, जिसपर उनके पिता जी खेती करते थे, लेकिन इससे परिवार का खर्च नहीं चलता था। विकास की पढ़ाई के लिए, विकास के बड़े भई को 12वीं के बाद ही नौकरी के लिए बाहर जाना पड़ा। तभी से विकास ने तय कर लिया था कि आगे चलकर वो किसानों के लिए कुछ करेंगे जिससे किसानों की लाइफ बेहतर हो सके, इसीलिए इंजीनियरिंग के लिए उन्होंने एग्रीकल्चर सब्जेक्ट को चुना।

विकास कहते हैं कि IIT में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने खेती से जुड़े इनोवेटिव प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया था। विकास के प्रोफ़ेसर उन्हें हमेशा गाइड करते थे और वो अलग-अलग राज्यों में जाकर किसानों से मिलते थे, उनकी दिक्कतों को समझते थे। इस दौरान उन्हें एक चीज समझ में आई, कि किसानों को खेती के लिए लागत ज्यादा लग रही है जबकि मुनाफा कम हो रहा है। उनके ज्यादातर पैसे सिंचाई और खाद में खर्च हो जा रहे हैं। इस परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने 2016 में एक ट्रेडल पंप (Treadle Pump) तैयार किया। यह पंप बिना इलेक्ट्रिक और फ्यूल के चलता है। इसे पैरों की मदद से चलाकर किसान तालाब या कुएं से अपनी फसल की सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कर सकते है। इस आईडिया के लिए उन्हें, IIT की तरफ से भी फंड मिला था।

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विकास बताते हैं की इस मशीन को तैयार करने और किसानों के बीच बांटने के बाद उनके सामने एक नई मुसीबत आ गई। जब उन्होंने गांवों का दौरा किया तो पता चला कि किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था तो हो गई, लेकिन उनके उत्पाद, जंगली जानवर नष्ट कर दे रहे हैं। इससे उन्हें काफी ज्यादा नुकसान हो रहा है। इस परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने प्लान करना शुरू किया और जल्द ही एक पीक रक्षक मशीन तैयार की जो की सोलर की मदद से चलता है और अलग-अलग तरह की आवाज निकालता है, जिसकी वजह से जानवर खेत में नहीं आते हैं। इस मशीन के लिए भी उन्हें किसानों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। कई राज्यों में भी उनके प्रोडक्ट बिके।

विकास बताते हैं कि किसानों के लिए उन्होंने ट्रेडल पंप और पीक रक्षक की व्यवस्था तो कर दी, उनका प्रोडक्शन भी बढ़ गया, लेकिन उनकी आमदनी उतनी नहीं बढ़ी, जितना वो सोच रहे थे। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें मार्केट में सही रेट नहीं मिलने के अभाव में अपने प्रोडक्ट को कम कीमत पर बेचना पड़ता था। किसानों के लिए यह बड़ी समस्या थी। खासकर के उन किसानों के लिए जो फल और सब्जियों की खेती करते थे। स्टोरेज की सुविधा नहीं होने की वजह से उनके प्रोडक्ट जल्द ही खराब हो जा रहे थे। इसलिए किसान अपने प्रोडक्ट को मार्केट से वापस घर लाने की बजाय, कम कीमत पर ही बेच देते थे।

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इस परेशानी को दूर करने के लिए विकास और उनके साथियों ने काफी रिसर्च और स्टडी की। तब उनके पास ठीक-ठाक बजट हो गया था। IIT मुंबई की तरफ से भी उन्हें 7 लाख रुपए का फंड मिला था। इसके बाद उन्होंने साल 2019 में एक सब्जी कूलर मशीन (Vegetable Cooler Machine) तैयार की। यह मशीन बिना इलेक्ट्रिक और फ्यूल के काम करती है और 6 से 7 दिनों तक सब्जियों को और करीब 10 दिनों तक, फलों को सुरक्षित रखती है। इसे चलाने के लिए 24 घंटे में सिर्फ 20 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें एक बार में 100 किलो प्रोडक्ट रखा जा सकता है। इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपए तक है ।

विकास बताते हैं कि इस प्रोडक्ट को तैयार करने के बाद किसान काफी खुश हुए। विकास के इस मशीन की हर जगह काफ़ी डिमांड थी। इसके बाद उन्होंने 2019 में Rukart नाम से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने, इसकी मार्केटिंग पर फोकस किया। उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर किसानों को अपने प्रोडक्ट के बारे में जानकारी दी और उन्हें इसकी अहमियत बताई। धीरे-धीरे किसानों के बीच उनका प्रोडक्ट पॉपुलर हो गया और इसकी डिमांड बढ़ गई। फिर उन्होंने अलग-अलग राज्यों में अपने डीलर्स रखने शुरू किए जो उनके प्रोडक्ट को किसानों तक पहुंचाते हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन लेवल पर विकास और उनकी टीम अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से मार्केटिंग करते हैं। इसके लिए उन्होंने कई कूरियर कंपनियों से टाइ-अप किया हुआ है, जो देश में कहीं भी किसानों के पास 10-15 दिन के भीतर मशीन पहुंचा देते हैं।

किसान, दिन रात मेहनत करते हैं, ताकि हमलोग भूखे न रहे, फिर भी वे सही से अपना गुज़ारा नहीं कर पाते है। उन्हें अपनी मेहनत का सही मुनाफा नहीं मिल पाता है। इस सब्जी कूलर मशीन के बनने से, किसानों को सब्जियों और फलों को सुरक्षित रखने में होने वाली परेशानी से निजात मिलेगा।

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