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Rukmini Banerjee : बढ़ते बिहार की बेटी को मिला दुनिया का सर्वोच्च शिक्षा सम्मान

Rukmini-Banarjee
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बिहार में, एक समय ऐसा था जहाँ लड़कियों की पढाई एक समय के बाद रोक दी जाती थी। लेकिन सरकार की योजनाओं और लोगों की जागरूकता ने इस तस्वीर को बदला और बिहार की महिलायें देश विदेश में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में उभर कर सामने आ रही हैं। और देश के अन्य राज्यों के साथ साथ दुनियाभर में अपना और बिहार का नाम रौशन कर रहीं हैं।

पिछले साल कोरोना काल में बिहार की एक बेटी ने अपने पिता को साइकिल पर बैठा कर दिल्ली से दरभंगा तक का सफर तय कर दुनिया को अपने साहस और दृढनिश्चय का प्रमाण दिया। और अभी हाल ही में बिहार में देश की पहली महिला कमांडो की फौज तैयार की गयी है। जो मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात की जायेंगी। बिहार की इन्हीं महिलाओं में से एक है रुक्मणि बनर्जी। जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र के सबसे बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। तो आइये आपको बताते हैं रुक्मिणी बनर्जी (Rukmini Banerjee) के बारे में कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में किस बड़े सम्मान से सम्मानित किया गया है।

मूल रूप से बिहार की रहने वाली रुक्मिणी को शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि मिली है। रुक्मिणी बनर्जी को शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाली यिदान पुरस्कार दिया गया है। नई दिल्ली और पुणे में रही रुक्मणि ने अपनी शिक्षा दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया है, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री पूरी की। वे साल 1981-83 के बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में रोड्स स्कॉलर रही थीं।और फिर 1991 में शिकागो यूनिवर्सिटी से PhD की डिग्री प्राप्त करी। उन्होंने शुरू से ही बच्चों के सिखने की इक्षा को बढ़ाने के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

PhD पूरी करने के बाद 1996 में रुक्मिणी भारत लौट आईं और ‘प्रथम’ (Pratham) नाम के NGO में शामिल हो गईं। Pratham में शामिल होने के बाद उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ‘प्रथम’ के शिक्षा कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर काम किया है।

अपनी टीमों के साथ, उन्होंने बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार के लिए, भारत में राज्य सरकारों के साथ बड़े पैमाने पर साझेदारी को डिजाइन और समर्थन करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई । रुक्मिणी ने 2005 से 2014 तक वार्षिक शिक्षा रिपोर्ट (ASER/Annual Status of Education Report) अभ्यास सहित ‘प्रथम’ के अनुसंधान और मूल्यांकन प्रयासों का नेतृत्व किया।

इसके बाद साल 2015 से, रुक्मिणी ‘प्रथम’ की CEO बनी रही हैं। 2008 में, रुक्मिणी को बिहार सरकार द्वारा मौलाना अबुल कलाम शिक्षा पुरस्कार (Maulana Abul Kalam Shiksha Puraskar) प्रदान किया गया। इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली व्यक्ति थीं। और इस साल यानी 2021 में रुक्मिणी को शिक्षा विकास के लिए यिदान पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवार्ड की राशि करीब 28 करोड़ रुपये हैं, जिसमें से आधी राशि परियोजना कोष के रूप में होती है।

यिदान पुरस्कार ‘शिक्षा विकास’ और ‘शिक्षा पर अनुसंधान’ के दोनों क्षेत्रों में दिया जाता है। यह पुरस्कार 1916 में शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक कुल 9 लोगों को ही इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस पुरस्कार को पाने वाले प्रमुख लोगों में बर्क के संस्थापक फजले हसन एबेड (Fazle Hassan Abed), न्यूआ फाउंडेशन के विक्की कोलबर्ट (Vicky Colbert) और ईडीएक्स के सीईओ प्रोफेसर अग्रवाल शामिल हैं। इस साल 130 देशों के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। शिक्षा के क्षेत्र में रुक्मिणी बनर्जी के कार्यों को अनदेखा नहीं किया जा सकता और यिदान पुरस्कार से सम्मानित होना ये इसका सबुत है।