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क्यों Coca Cola का Formula बंद हैं एक Locker में ?, रिकॉर्ड तोड़ विवादों में रहा है ये

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कोका कोला (Coca Cola) आज कल चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह तो आप सब जानते ही हैं फिर भी शार्ट में बता देते हैं। फुटबॉल की सबसे बड़ी चैम्पियनशिप में से एक यूरो कप की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। पुर्तगाल टीम के कप्तान और मशहूर फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने टेबल पर रखी कोका-कोला की बोतल को उठाकर दूर रख दिया। उन्होंने पानी की बोतल उठा कर कहा एक्वा यानी कि स्पैनिश भाषा में पानी और ऐसा इशारा किया कि कोका-कोला से अच्छा तो पानी है।

रोनाल्डो का इतना भर करना था कि कोका कोला का मार्केट ऊपर नीचे हो गया। रोनाल्डो ने कॉन्फ्रेंस टेबल से कोक की बोतल क्या हटाई कोका कोला के शेयर की प्राइस ही डोल गयी। इसके बाद लगातार कोका-कोला के शेयरों की कीमत गिरती जा रही है। 14 जून को जिन शेयरों की कीमत 55.26 डॉलर थी वो 21 जून को घटकर 53.77 डॉलर पर आ गयी थी।

शेयर में 3.5% गिरावट के साथ कंपनी की वैल्यूएशन करीब 83 हजार करोड़ रुपए कम हो गई। इस घटना के बाद कोका-कोला को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है।

आइए जानते हैं कोका कोला के origin, फॉर्मूला और साथ ही उस से जुड़े विवादों के बारे में विस्तार से

सबसे पहले जानते हैं कोका कोला कैसे बना और इसे अपना नाम कैसे मिला

साल 1886 में न्यूयॉर्क हॉर्बर में वर्कर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी बना रहे थे। वहां से करीब 1200 किलोमीटर दूर अटलांटा के एक घर के बेसमेंट में जॉन पेंबरटन नाम के फार्मासिस्ट एक नई ड्रिंक का फ्लेवर बनाने में लगे थे। 8 मई 1886 की एक दोपहर पेंबरटन को एहसास हुआ कि उन्होंने मनमाफिक फ्लेवर बना लिया है। वो अपना मिक्सचर लेकर पास की जैकब फार्मेसी पहुंचे। वहां उन्होंने उस मिक्सचर को सोडा के साथ मिलाकर कुछ ग्राहकों को पिलाया। ग्राहकों को वह ड्रिंक कुछ अलग है लगा। सबने कहा कि यह ड्रिंक आम ड्रिंक्स से अलग है।

पेंबरटन के बहीखाते की देखभाल करने वाले फ्रैंक मेसन रॉबिनसन ने इस ड्रिंक का नाम रखा कोका-कोला.. वो इसलिए क्योंकि इसे बनाने में कोका के पत्ते और कोला के बीज का इस्तेमाल होता था। जैकब फार्मेसी ने इस ड्रिंक को 5 सेंट प्रति गिलास बेचना शुरू कर दिया । 29 मई 1886 को अटलांटा न्स्टीट्यूशन अखबार में कोका-कोला का पहला विज्ञापन प्रकाशित हुआ। धीरे-धीरे अपने अलग टेस्ट की वजह से ये अटलांटा के लोगों में पॉपुलर होने लगा।

पहले साल कोका-कोला के रोजाना सिर्फ 9 गिलास ही बिक पाते थे, जिससे करीब 26 डॉलर का घाटा हुआ। 1887 में बिक्री बढ़ने से मुनाफे में आती उससे पहले ही पेंबरटन बीमार हो गए। कोका-कोला के ज्यादातर शेयर फार्मासिस्ट आसा ग्रिग्स कैंडलर ने खरीद लिए। 16 अगस्त 1888 को पेंबरटन का निधन हो गया। 29 जनवरी 1892 को कोका-कोला एक प्रोडक्ट से कंपनी बन गई, जिसका नाम था- द कोका कोला कंपनी |

5 सितंबर 1919 को आर्मेस्ट बुडरफ और कुछ निवेशकों ने मिलकर कोका-कोला कंपनी को 2.5 करोड़ डॉलर में खरीद लिया। इसके बाद इसे न्यूयॉर्क के स्टॉक मार्केट में लिस्ट कर दिया गया। कोका-कोला की बिक्री बढ़ी तो मिसिसिपी के थोक व्यापारी जोसेफ बाइडेनहार्न से इसे बोतलों में भरकर बेचना शुरू किया। 1915 तक सैकड़ों जगह बोतलबंद कोका कोला मिलने लगा। कई कंपनियों ने कोका कोला की नकल करने की भी कोशिश की ।

नकलचियों से बचने के लिए कंपनी ने कोका-कोला की बोतल का ऐसा डिजाइन तैयार करने का फैसला किया, जो सबसे अलग हो और अंधेरे में भी पहचानी जा सके। आखिरकार उस वक्त जो बोतल की डिजाइन तय की गई थी वही आज तक जारी है। 12 अप्रैल 1961 को कोका-कोला की बोतल को ट्रेडमार्क के रूप में मान्यता मिली।

क्या आप जानते हैं कोका कोला का फॉर्मूला एक लॉकर में बंद है और हर साल हजारों की संख्या में लोग इसे देखने पहुँचते हैं!

जी हां कोका कोला का सीक्रेट फॉर्मूला अटलांटा में एक तिज़ोरी में बंद है। हर साल हजारों लोग इस सीक्रेट फॉर्मूले की तिजोरी देखने अटलांटा जाते हैं। 1886 में अटलांटा में जॉन पेंबरटन ने कोका कोला के फॉर्मूले की खोज की उस के बाद 1892 ग्रिग्स कैंडलर ने कोका-काला का बिजनेस और फॉर्मूला खरीद लिया।
उसी साल वुडरफ और कुछ निवेशकों ने कैंडलर से कोका कोला की कंपनी और सीक्रेट फॉर्मूला खरीदा लिया। साल 1919 में फॉर्मूले को एक पेपर पर लिखकर बतौर लोन गारंटी बैंक की तिजोरी में रखा गया। साल 1925 में वुडरफ ने लोन चुकाया और फॉर्मूले को ट्रस्ट कंपनी बैंक में रख दिया। साल 2011 में सीक्रेट फॉर्मूला एटलांटा के वर्ल्ड ऑफ कोका कोला की तिजोरी में रखा गया। हर साल हज़ारों लोग इस सीक्रेट फॉर्मूले की तिजोरी को देखने जाते हैं।

कंपनी को काफी बार विरोध का भी सामना करना पड़ा है। एक वक्त ऐसा भी आया था जब कोला कोला को भारत का बाजार छोड़ना पड़ा था।

कोका-कोला कंपनी को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान काफी फायदा मिला, जब विदेश में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को कोका-कोला मुहैया कराई गई। इससे इसे दुनिया भर में फैलने में मदद मिली। भारत में कोका-कोला ने 1950 में एंट्री मारी। उन्होंने नई दिल्ली में पहला बॉटलिंग प्लांट लगाया। 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में उद्योग मंत्री बने जॉर्ज फर्नांडिस। उन्होंने कोका-कोला के सामने शर्त रखी कि अगर यहां बिजनेस करना है तो 60% हिस्सेदारी किसी भारतीय कंपनी को देनी पड़ेगी। कोका-कोला ने इससे इनकार कर दिया और भारत से जाने का फैसला किया।

15 साल के निर्वासन के बाद जैसे ही भारत में विदेशी कंपनियों के लिए अर्थव्यवस्था के दरवाजे खुले, कोका-कोला ने 1993 में दोबारा एंट्री मारी। इसके बाद कोका-कोला ने थम्स अप, लिम्का, गोल्ड स्पॉट और माजा जैसे ब्रांड्स का अधिग्रहण कर लिया। 1977 में भारत सरकार ने नियम ना मानने के आरोप में कोका कोला को देश से बाहर का रास्ता दिखाया था वहीं 1993 में कोका कोला ने उदारीकरण। के बाद भारतीय बाजार में वापसी की और अपने कई कंपटीटर्स का अधिग्रहण कर लिया।

  • 2004 में केरल के प्लाचीमाडा में कोका कोला को अपना प्लांट बंद करना पड़ा। कंपनी पर पानी की बर्बादी का आरोप लगा था।
  • 2013 में उत्तराखंड के चर्बा में कोका-कोला की नई फैक्ट्री नहीं खुल सकी। क्षेत्रीय लोगों ने फैक्ट्री खुलने का विरोध किया था।
  • 2014 में कंपनी को वाराणसी में बॉटलिंग प्लांट बंद करना पड़ा। क्षेत्रीय लोगों ने पानी की बर्बादी का आरोप लगाया था।

इसके अलावा पूरे विश्व में भी कई बार कोका कोला को विरोध का सामना करना पड़ा है

  • सबसे पहले फ्रांस ने 1950 के दशक में इसे ‘कोका कोलोनाइजेशन’ का नाम दिया। वहां कोका-कोला के ट्रक पलट दिए गए और बोतलें तोड़ दी गईं।
  • सोवियत संघ भी कोका-कोला को लेकर आशंकित था इसलिए यहां इसकी मार्केटिंग नहीं हो सकी। इसका फायदा पेप्सी ने उठाया।
  • मिडिल ईस्ट में भी कोका-कोला का बहिष्कार किया गया, क्योंकि इसकी बिक्री इजराइल में होती थी।
  • 2003 में इराक पर अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में थाईलैंड में लोगों ने सड़कों पर कोका-कोला बहाया और वहां कुछ वक्त के लिए उसकी बिक्री भी रोक दी गई।
  • ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने भी कोका-कोला पर पाबंदी लगाने की धमकी दी थी ।
  • वेनेज़ुएला के ह्यूगो चावेज ने लोगों से अपील की थी कि वे कोका-कोला और पेप्सी की बजाय स्थानीय तौर पर बने फलों का रस पिएं।

समय-समय पर विरोध और प्रतिबंधों के बावजूद आज 200 से ज्यादा देशों में कोका-कोला बेची जाती है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे बाजारों में कंपनी का दबदबा बढ़ता जा रहा है। दुनिया में सिर्फ दो देशों में कोका-कोला नहीं खरीदी जा सकती। ये दो देश हैं- क्यूबा और उत्तर कोरिया। ऐसा अमेरिकी बैन की वजह से हुआ है।

रोनाल्डो के कोक की बोटल हटाने के बाद कई कंपनियों ने विज्ञापन बना कर कोक के मजे लिए। जिनमें fevicole, हाजमोला, गुलाबरी गुलाबजल जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं। जिसमें से गुलाबरी गुलाबजल और हाजमोला का उत्पादन डाबर के द्वारा किया जाता है।