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Onam : इस मलयालम न्यू ईयर करें अपने जीवन को रंगीन

Onam
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मौसमी फसल का एक भव्य उत्सव Onam हर साल एक नयी खुशियों की सौगात के साथ आता है।


10 दिनों तक चलने वाले उत्सव Onam को इस साल 12 अगस्त से 23 अगस्त तक मनाया जायेगा।


कृषि पर्व के रूप में मनाए जाने वाले ओणम का केरल में खासा महत्व है। चूंकि ये मलयाली हिंदुओं के लिए विशेष दिन है इसलिए इसे मलयालम न्यू ईयर भी कहा जाता है।


यह पर्व मलयालम कैलेंडर के पहले महीने चिंगम में आता है। चिंगम को कोल्ला वर्षम भी कहा जाता है।


ओणम का उत्सव राजा महाबली के स्वागत में प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है। कहा जाता है कि केरल के असुर राजा महाबली अपनी प्रजा से ओणम के दिन मिलने आते हैं।


वे केरल के शक्तिशाली और न्यायप्रिय राजा माने जाते हैं। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया।


उसके बाद से ये मान्यता है कि राजा बलि धरती पर एक बार आते हैं। अपनी प्रजा का हाल जानते हैं। जो समय उनका धरती पर आने का माना जाता है वही समय ओणम के रूप में मनाया जाता है।


केरल में स्थित त्रिक्काकरा मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है जहां से इस पर्व को मनाने की शुरुआत होती है।


इस दिन फूलों से घर और दरवाजे सजाए जाते हैं और इस दिन खास वल्लम कली यानी स्नेक बोट रेस होती है। ओणम पर बनाई जाने वाली रंगोली उन सबमें सबसे अलग होती है, क्योंकि इसमें रंगों की जगह सिर्फ फूलों का इस्तेमाल होता है।


खास बात ये है कि पूकलम कहलाने वाली रंगोली में प्रतिदिन एक गोला बढ़ा दिया जाता है। इस तरह छोटी सी रंगोली ओणम खत्म होते होते बड़े पूकलम का रूप ले लेती है।


इसके अलावा इस त्योहार को मनाने का कारण फसलों की कटाई भी है।
ओणम पर्व का खेती और किसानों से गहरा संबंध है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं।


इस उत्सव के दौरान एक पारंपरिक दावत समारोह का आयोजन किया जाता है। ओणम के पकवान को देखकर एक शर्त ये भी होती है कि पकवानों की संख्या 20 से कम न हों।


ओणम के खास मौकों पर दोस्त और रिश्तेदार एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इस ओणम के रंग सभी के जीवन को रंगीन और जीवंत बना देते हैं।