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आइसक्रीम के रथ पर सवार होंगे भगवान जगन्‍नाथ

jagannath
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“ऊँ नमः शिवाय”। कहते है, पृथ्वी की सम्पूर्ण शक्ति इसी मंत्र में समाहित है। त्रिदेवों में ब्रह्म देव सृष्टि के रचयिता है, तो श्री हरि पालनहार हैं, और शिव तो भोले हैं, जल्द ही प्रसन्न हो जाते है परन्तु सृष्टि को बुराई से बचाने के लिए वे संहारक भी बनते हैं। ओडिशा में भगवान जगन्‍नाथ के प्रति लोगों की आस्‍था देखते ही बनती है, ऐसा माना जाता है कि यहां के कण-कण में महाप्रभु का वास है। सभी भक्त, अपने अनुसार अपनी भक्ति दिखाते हैं। हर साल निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष महत्त्व होता है। इस बार रथ यात्रा निकलने से पहले, यहाँ के एक कलाकार बिस्वजीत नायक ने भगवान जगन्नाथ का रथ बनाया है। खास बात ये है की यह रथ 975 आइसक्रीम स्टिक की मदद से बनाई गयी है।


आने वाले 12 जुलाई को पुरी में महाप्रभु की पावन रथयात्रा निकाली जाएगी। रथ यात्रा से पहले, पुरी के एक कलाकार बिस्वजीत नायक ने 975 आइसक्रीम स्टिक के साथ भगवान जगन्नाथ का रथ बनाया है। उन्होंने नंदीघोष के रथ का एक छोटा सा मॉडल तैयार किया है। इस रथ में 16 पहिए और चार घोड़े हैं। इस सुन्दर रथ को पूरा करने में बिस्वजीत को पांच दिन का समय लगा। बिस्वजीत ने कहा की इसे बनाने में उन्होंने भगवान के रथ के अनुसार ही सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया है।

आपको बता दें कि पुरी के रहने वाले बिस्वजीत नायक की कलाकारी यहीं ख़त्म नहीं होती है। इससे पहले उन्होंने स्नान पूर्णिमा के मौके पर भगवान जगन्नाथ की गजानन वेश की एक छोटी मूर्ति तैयार की थी। इसे बनाने में उन्होंने 1475 आइसक्रीम स्टिक का इस्तेमाल किया था। यह मूर्ति 30 इंच लंबी और 26 इंच चौड़ी थी और नायक ने इसे पूरा करने में 15 दिन का समय लिया था। यह मूर्ति देखने में बेहद आकर्षक और प्यारी थी।


जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। पुरी नगर श्री कृष्ण यानी जगन्नाथपुरी की पावन नगरी कहलाती है। वैष्णव सम्प्रदाय का यह मंदिर हिंदुओं की चार धाम यात्रा में गिना जाता है। रथ यात्रा का महोत्सव 10 दिन का होता है। इस दौरान पुरी में लाखों की संख्या में लोग पहुँचते है, और इस महा आयोजन का हिस्सा बनते है। इस दिन भगवान कृष्ण, उसके भाई बलराम व बहन सुभद्रा को रथों में बैठाकर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। पौराणिक कथाओं के आधार पर कई लोगों का मानना है कि श्रीकृष्ण की बहन एक बार सुभद्रा अपने मायके लौटती हैं तो अपने भाइयों, कृष्ण और बलराम से नगर भ्रमण की इच्छा जताती हैं, तब कृष्ण, बलराम और सुभद्रा के साथ रथ से नगर घूमने जाते हैं, तभी से रथ यात्रा का प्रारंभ माना गया है।


जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए लोगों की भक्ति यहीं ख़त्म नहीं होती है। आपको बता दें की भुवनेश्वर के एक कलाकार ने 435 माचिस की तिल्लियों का उपयोग करके भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलराम के रथों के छोटा मॉडल तैयार किया। वहीं, देवताओं को बनाने के लिए नीम की लकड़ी का इस्तेमाल किया है। भगवान के लिए ऐसी भक्ति, हर किसी के रोम-रोम को पवित्र कर देती है।