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जानें कैसा होगा कोरोना के बाद का कुंभ मेला

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कोरोना संक्रमण के चलते उप्र सरकार हरिद्वार कुंभ में किसी भी सूरत में भीड़ नहीं होने देना चाहती है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर उनसे सहयोग मांगी है। पत्र में उन्होंने अनुरोध कटे हुए कहा है कि कुंभ मेले के दौरान हरिद्वार के लिए कोई नई स्पेशल रेलगाड़ी नहीं चलाई जाए। साथ ही हरिद्वार से रवाना होने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ा दिया जाये, जिससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु वापसी हो सके।

इस वर्ष कुंभ का मेला 11 मार्च से शुरु होने जा रहा है। यह महाशिवरात्रि का दिन है। कुंभ मेले के दौरान गंगा के किनारे स्नान करना बेहद ही शुभ माना जाता है। शाही स्नान के अलावा भी कई और खास तिथियां होती हैं जिनमें स्नान किया जाता है। इसे बेहद शुभ माना जाता है।

अब बताते हैं आपको कि हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान गंगा स्नान और पूजन के क्या महत्त्व है –

➽ हिंदू धर्म अनुसार नदियों में सभी तीर्थ बसे हुए हैं। गंगा की अगर बात करें तो ये हिंदू धर्म में गंगा को मां का दर्जा दिया गया हैं। ऐसे में गंगा स्नान का महत्व और भी ज्यादा हो जाता है।

➽ गंगा के बिना हिंदूत्व अधूरी मणि जाती हैं। जीवन और मृत्यु गंगा से जुड़ी हुई है। गंगाजल को अमृत के समान माना गया है। ऐसे में गंगा स्नान का महत्व अत्याधिक है।

➽ मकर संक्राति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, पूर्णिमा, अमावस्या, महाशिवरात्रि और गंगा दशहरा के समय गंगा स्नान बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है।

➽ गंगा स्नान और पूजन से व्यक्ति को रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है। वहीं, पाप भी नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

➽ अगर किसी को मांगलिक दोष है तो गंगा पूजन करने से उस जातक को विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

➽ गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के अशुभ ग्रहों का प्रभाव खत्म हो जाता है।

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