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Eid-ul-Fitr 2021 : महामारी के काले साए में एक रोशनी मन के पवित्रता की, विश्वास और भाईचारे का त्योहार ईद

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पवित्रता का क्या आशय है, ये शायद आज तक कोई नहीं समझ सका। प्रत्येक धर्म-संस्कृति के इस विषय पर अपने विचार हैं। ज्ञानी पुरुष की पवित्रता उसका ज्ञान है और धार्मिक पुरुष का मूल्य उसके दृढ़ आचरण के कारण है। पवित्रता गुणों में है। यदि गुण हैं तो उनका ही मूल्य है। अगर आपका मन पवित्र हो और उसमें कोई भेद-भाव ना हो तो आपका दीदार सीधे खुदा से होगा। ऐसा ही एक पवित्र और हर्षोल्लास का त्योहार ‘ईद’ (Eid) आज पूरे विश्वभर में मनाया जा रहा है।

‘ईद’ शब्द प्रसन्नता का द्योतक है। यह प्रसन्नता, सुन्दरता तथा पारस्परिक मधुर-मिलन के भाव को प्रकट करने वाला त्योहार है। चाँद का दीदार करके मनाया जाने वाला यह त्योहार भाईचारे का भी प्रतिक है। ईद-उल-फितर रमजान के पवित्र महिने के बाद मनाया जाने वाला एक त्योहार है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-फितर का त्योहार शवाल अल मुकर्रम्म को मनाया जाता है, जोकि इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने का पहला दिन होता है।

‘ईद का चांद’ जैसे मुहावरे का सम्बन्ध ईद के त्योहार से ही है, क्योंकि ईद की गणना और आगमन चन्द्रमा के उदय होने पर ही निर्भर होता है। ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr 2021) का यह पर्व रमजान के 30 रोजों के बाद चांद देखकर मनाया जाता है। इस पर्व को मनाये जाने के लिए जो सबसे प्रचलित इस्लामिक मान्यता है उसके अनुसार इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद साहब ने बद्र के युद्ध में विजय प्राप्त की थी। पहली ईद उल-फ़ितर (Eid-ul-Fitr 2021) पैगम्बर मुहम्मद ने सन् 624 ईसवी में इस जंग के बाद मनायी थी। तभी से इस पर्व का आरंभ हुआ और दुनियाभर के मुसलमान इस दिन के जश्न को बड़ी ही धूम-धाम के साथ मनाने लगे।

ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr 2021) के अवसर पर पूरे महीने अल्लाह के मोमिन बंदे अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के महीने में धार्मिक प्रवृत्ति वाले मुसलमान लोग सूर्योदय से पूर्व कुछ खा-पीकर दिनभर रोजा (व्रत) रखा करते हैं। पूर्णतः पाक-साफ रह कर दिन में पांच बार नमाज अदा करते हैं तथा सायंकाल में सूर्यास्त के बाद दान-पुण्य करके तथा निर्धनों आदि को भोजन खिलाकर तथा बाद में स्वयं खाकर रोजे (व्रत) को समाप्त करते हैं। इसके साथ ही वे कुरान की तिलावत करके अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं।

रमाजान महीने के समाप्त होने के बाद मनाया जाने वाले इस पर्व पर महौल काफी खुशनुमा होता है। इस दिन लोग सुबह में स्नान करके नये कपड़े पहनते है और मस्जिदों में नमाज पढ़ने के लिए जाते है। इस दिन सफेद कपड़े पहनना और इत्र लगाना काफी शुभ माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सफेद रंग सादगी और पवित्रता की निशानी है। इसके साथ ही ईद के दिन नमाज पढ़ने से पहले खजूर खाने का भी एक विशेष रिवाज है। ऐसा माना जाता है नमाज पढ़ने से पहले खजूर खाने से मन शुद्ध हो जाता है। इस विशेष त्योहार पर ‘ईदी’ देने का भी एक रिवाज है और सेवई, इस त्योहार का सबसे मत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है जिसे सभी बड़े चाव से खाते हैं।

ईद में रमजान के महीने में लोगों द्वारा रखे हुए रोजे से उनके मन मे विश्वास उत्पन्न होता है कि रोज़े से उनकी आत्मा पवित्र होती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा दूसरे धर्म के लोगों को भी अपने घरों पर दावत के लिए आमंत्रित किया जाता है। ईद के पर्व का यही प्रेम व्यवहार इस पर्व की खासियत है, जोकि समाज में प्रेम तथा भाई-चारे को बढ़ाने का कार्य करता है। यह पर्व त्याग और अपने मजहब के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह बताता है कि एक इंसान को अपनी इंसानियत के लिए इच्छाओं का त्याग करना चाहिए, जिससे कि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके।

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