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शुरू हुआ बिहार का दूसरा रोप-वे, CM ने किया उद्घाटन

mandar ROPEWAY
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बिहार में कई ऐसे Tourist Place हैं जो दुनिया भर में अपने इतिहास के लिए जाने जाते हैं और जिससे बिहार के Tourism को काफी फायदा भी है। उसी में से एक है, बिहार के बांका जिले में स्थित ‘मंदार पर्वत’, जो दुनिया भर में अपने इतिहास और प्राकृतिक सौन्दर्यता के लिए मशहूर है। भागलपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर बसे बांका जिले में ‘मंदार पर्वत’ स्थित है। 700 फीट ऊंचे इस पर्वत के बारे में पुराणों और महाभारत में कई कहानियां प्रचलित हैं। इनमें से एक कहानी ऐसी है कि देवताओं ने अमृत प्राप्ति के लिए दैत्यों के साथ मिलकर मंदार पर्वत से ही समुद्र मंथन किया था, जिसमें विष के साथ 14 रत्न निकले थे। इसी के साथ ऐसी और भी कहानियां है जो इस पर्वत से जुडी हुई है। इसी इतिहास और प्राकृतिक सौन्दर्यको देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने मंदार पर्वत को एक बेहतर Tourist Place के रूप में विकसित करने का फैसला लिया था। जो अब लगभग बन कर तैयार हो चूका है।

बिहार में Tourism को बढ़ावा देने के लिए बिहार में दूसरा रोप-वे (Rope-way) बनने का काम अब पूरा हो चूका है। और यह रोप-वे मंदार पर्वत पर बनाया गया है। जिसका आज मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया।

मंदार पर रोप-वे का शिलान्यास 20 जनवरी 2014 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने किया था। लंबी अवधि के बाद नवंबर 2017 में इस रोप-वे का निर्माण कार्य आरंभ हुआ था। जिसका उद्घाटन आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) द्वारा किया गया। बिहार में पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए यह प्रयास सरकार के द्वारा किया जा रहा है। लोगों की धार्मिक आस्था इस मंदार पर्वत से जुड़ी हुई है। और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पहले रोप-वे नहीं होने के कारण टूरिस्टों और श्रद्धालुओं को पहाड़ चढ़ने और उतरने में घंटों लग जाते थे। लेकिन अब इस रोप-वे के बन जाने के बाद मिनटों में लोग पहाड़ के ऊपर पहुंच जाएंगे।

इस रोप-वे में कुल 8 केबिन दिए गए हैं, जिसमें प्रत्येक केबिन में 4 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इस रोप-वे की दूरी लगभग 400 मीटर है। बेस स्टेशन के बाद बीच में सीताकुंड में पहला पड़ाव है और सबसे ऊपर जैन के 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य का मंदिर है जिसमें उनका चरणपादुका रखा हुआ है जहां पूरे देश से जैन धर्म के लोग पहुंचते हैं।

इस रोप-वे को बनाने में लगभग 8 सालों का समय लगा है। बता दें कि मंदार पर्वत वन विभाग के अंतर्गत आता हैइसको बनाने के लिये राज्य सरकार की ओर से लगभग आठ करोड़ की राशि दी गई थी। राइट्स कंपनी द्वारा इस रोप-वे को बनाया गया है और आने वाले एक साल तक यहीं कंपनी इसको ऑपरेट करेगी।

मंदार पर्वत पर सनातन हिंदू, जैन संप्रदाय और सफा धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं का स्थल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी मंदार पर्वत से देवासुर संग्राम के वक्त समुंद्र का मंथन किया गया था। मंदार जैन संप्रदाय के लोगों का भी प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां भगवान वासुपूज्य का निर्वाण स्थल माना जाता है। यहां सैलानी पवित्र भगवान नरसिंह गुफा, सीता कुंड, शंख कुंड, काशी विश्वनाथ और पर्वत शिखर पर भगवान वासुपूज्य मंदिरों में दर्शन पूजन करते हैं।

बिहार के एक छोटे जिले के इस ऐतिहासिक मंदार क्षेत्र को देश दुनिया के पर्यटन स्थल में शुमार करने के लिये सरकार हर मुमकिन कोशिश में लगी हुई है। इस रोप-वे के बनने से मंदार पर अब टूरिज्म का जमावड़ा होगाऔर साथ ही इस क्षेत्र लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। और बिहार का यह स्थल टूरिस्ट प्लेसों की सूची में अपने इतिहास को लेकर अलग पहचान बनाएगा।