फुल वॉल्यूम कॉर्नर संडे वाइब्स

10 World Record बनाने वाला 19 साल का शूटर जिस पर PM को है गर्व

manish-narwal
Spread It

टैलेंट के फूल हर एक क्षेत्र में खिलते हैं। खेलों की दुनिया में भी अपनी खुशबू फैलाने वाले लाजवाब फूलों की कमी नहीं है। आज खेल के जगत में महकते फूलों में मनीष नरवाल (Manish Narwal) एक फेमस पर्सनालिटी हैं। टोक्यो पैरालिंपिक (Tokyo Paralympic) में भारतीय खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यह भारत का अब तक के पैरालिंपिक और ओलम्पिक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। आज जानते हैं मनीष नरवाल की कहानी जिन्होंने टोक्यो पैरालिंपिक में भारत की झोली में इस सीज़न का दूसरा स्वर्ण पदक डाला है।

भारतीय पैरा निशानेबाज मनीष नरवाल ने 4 सितम्बर को एक शूटिंग रेंज में P4-मिक्स्ड 50m पिस्टल SH1 फाइनल में स्वर्ण पदक जीता। 19 वर्षीय मनीष ने न केवल गोल्ड मेडल जीता बल्कि 218.2 अंक हासिल करके पैरालंपिक रिकॉर्ड भी बनाया। क्वालीफिकेशन में सातवें स्थान पर रहने वाले मनीष की फाइनल में शुरुआत बेहद खराब रही और उन्होंने पहले प्रतियोगिता चरण में केवल 87.2 अंक जुटाए। 18वें शॉट के बाद मनीष ड्रमैटिक रूप से चौथे स्थान पर आ गए। लेकिन अपने 19वें और 20वें शॉट में 19 वर्षीय भारतीय ने सनसनीखेज 10.8 और 10.5 का लक्ष्य बनाकर पहला स्थान हासिल कर लिया।

आपको बता दें की मनीष, अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) से सम्मानित हैं। उन्हें 2020 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मनीष मूलरूप से सोनीपत जिले के रहने वाले हैं और 28 वर्ष पूर्व उनके पिता दिलबाग सिंह नरवाल, फरीदाबाद आकर रहने लगे थे। मनीष, सेक्टर-70 रायल हैरिटेज सोसायटी IMT में रहते हैं। उनके पिता दिलबाग सिंह (Dilbag Singh) का आज अपना व्यवसाय है। मनीष ने अब तक ओलम्पिक के अलावा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 19 और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 17 पदक जीते हैं। वर्ष 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में मनीष ने एक गोल्ड और ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है। इसके अलावा मनीष ने पैरा शूटिग में 10 विश्व रिकॉर्ड भी बनाए हैं। उन्होंने फ्रांस से ओलंपिक कोटा हासिल किया, लेकिन कोरोना वायरस के कारण ओलंपिक खेलों को स्थगित कर दिया गया था जो की इस साल आयोजित हो पाया।

अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने पर मनीष के पिता ने कहा था कि “यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि बेटे की वजह से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और खेल मंत्री जैसे बड़े हस्तियों से मिलने का मौका मिला। आज मैं मनीष की तरफ से चिंता मुक्त हो गया हुआ हूं।” मनीष ने एक बार फिर अपने पिता का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है साथ ही साथ पूरे देश को उनपर गर्व है।

आपको शायद ही पता होगा की मनीष नरवाल असल में फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन दिव्यांगता की चुनौतियां थी। मगर ये चुनौतियां मनीष के एथलीट बनने के इरादे को डिगा नहीं सकी। मनीष ने पिता और सहयोगियों की सलाह पर 2016 में शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया, जो की उनके जीवन का सफल फैसला साबित हुआ। नरवाल ने हरियाणा के फरीदाबाद में शूटिंग करनी शुरू की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।

मनीष के स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “टोक्यो पैरालिंपिक से गौरव जारी है। यंग और टैलेंटेड मनीष नरवाल की शानदार उपलब्धि। उनका स्वर्ण पदक जीतना भारतीय खेलों के लिए एक विशेष क्षण है। उन्हें बधाई। आने वाले समय के लिए शुभकामनाएं।” इसके अलावा हरयाणा सरकार ने उन्हें 6 करोड़ देने की घोषणा की है। मनीष आज हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा हैं, जिसने अपनी मेहनत और शारीरिक अक्षमता के बावजूद भी ये गौरवपूर्ण क्षण लाया है।