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मधुक्रांति पोर्टल और हनी कॉर्नर का शुभारंभ, मधुमक्खी पालकों को होगा फायदा

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कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar ) ने NAFED के मधुक्रांति पोर्टल और हनी कॉर्नर का शुभारंभ किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया। इस पोर्टल को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर हनी और अन्य मधु उत्पादों को ऑनलाइन उपलब्‍ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस पोर्टल पर मधुमक्खी पालकों और इस काम से जुड़े लोगों को रजिस्ट्रेशन करना होगा। शहद की खरीद-बिक्री का भी यहां पर डेटा रहेगा।

मधुक्रांति पोर्टल, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और हनी मिशन के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की एक पहल है। यह शहद की गुणवत्ता और मिलावट के स्रोत की जांच करने में भी मदद करेगा। इस परियोजना के लिए नेशनल बी बोर्ड और इंडियन बैंक के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, शहद उत्पादों की बिक्री के लिए नेफेड के आउटलेट भी स्थापित किए जा रहे हैं।

तोमर ने कहा कि “हनी मिशन से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि होगी। यह मीठी क्रांति पूरे देश में फैलनी चाहिए और भारतीय शहद को वैश्विक मानकों पर खरा उतरना चाहिए। भारत में 1.2 लाख टन शहद का उत्पादन होता है, जिसमें से आधा का निर्यात किया जाता है। शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों का निर्यात दोगुना हो गया है। इन पहलों से व्यापार में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता आएगी।”

शहद कई गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका उपयोग आयुर्वेद में कई बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है और प्राचीन काल में इसे देवताओं का अमृत भी कहा जाता है। शहद में वजन को बढ़ने से रोकने के गुण पाए जाते हैं और यह वजन के बढ़ने की गति को धीमा कर देता है। शहद में एंटीओबेसिटी प्रभाव भी होते है। यह मुंहासों, एसिडिटी, झुर्रियों को बेहतर बनाने, दमा, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों से लड़ने में कारगर होते हैं।

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