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देश में आयुष चिकित्सा का बढ़ावा देने के लिए Parliament से हुए दो Bill Pass

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आयुष मंत्रालय के दो महत्वपूर्ण बिल संसद में पास हो गए। इन विधेयकों के पास होने से देश में भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी की चिकित्सा शिक्षा में बड़े पैमाने पर सुधार के लिए रास्ते साफ हो गए हैं। राज्य सभा में आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने ‘राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021’ और होम्योपैथी की चिकित्सा शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2021 को पेश किया।

भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक, 2021 और होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक, 2021 राज्यसभा में 11 अगस्त को पास कर दिए गए। इससे पहले दोनों विधेयक लोकसभा से 10 अगस्त को पास हो चुके थे। ये दोनों विधेयक मौजूदा भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 2020 और होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 2020 की जगह लेंगे।

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को दी गई हैं शक्तियां

2020 अधिनियम के पारित होने से पहले, केंद्रीय परिषद के पुनर्गठन के लिए स्वीकृति प्रदान करने हेतु 1973 के अधिनियम में संशोधन किया गया था। यह संशोधन 2018 में किया गया था। इस संशोधन के एक वर्ष के भीतर केंद्रीय परिषद का पुनर्गठन किया जाना था। 2019 से 2021 के बीच इस समयावधि को एक साल से बढ़ाकर चार साल कर दिया गया। 1973 के अधिनियम में यह प्रावधान करने के लिए भी संशोधन किया गया था कि जब तक परिषद का पुनर्गठन नहीं किया जाता, तब तक उसकी शक्तियों का प्रयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाएगा। चूंकि, राष्ट्रीय आयोग की स्थापना में समय लग रहा था और केंद्रीय परिषद का पुनर्गठन नहीं किया गया था, इसलिए बोर्ड को ये शक्तियां दी गई हैं।

राष्ट्रीय आयोग का किया गया गठन


राष्ट्रीय आयोग का गठन 5 जुलाई, 2021 को केंद्रीय परिषद का स्थान लेने के लिए किया गया था और उसी तारीख को 1973 के अधिनियम को निरस्त कर दिया गया था। 2021 का बिल तय करता है कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स 1973 के अधिनियम के तहत प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों और कार्यों को 2020 के अधिनियम के तहत मान्य किया जाए और यह आने वाले समय में भी लागू रहेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है होम्योपैथिक चिकित्सा


इस चिकित्सा का 200 साल पुराना विज्ञान होने के बावजूद, होम्योपैथिक चिकित्सा से किसी भी स्वास्थ्य संबंधी खतरे को साबित करने वाले अध्ययन सामने नहीं आया हैं। होम्योपैथी के योग्य और पंजीकृत चिकित्सक अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की तरह अपने पेशे की सीमाओं के भीतर कार्य करते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय दिशानिर्देशों द्वारा विनियमित किया जाता है। शोध अध्ययनों ने होम्योपैथी की प्रभावकारिता को सिद्ध किया है। हालांकि, विभिन्न परिस्थितियों में इसके लाभों को साबित करने के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त अधिक बड़े अध्ययनों की आवश्यकता है। यद्यपि, होम्योपैथी पारंपरिक चिकित्सा को प्रतिस्थापित करने में अभी सक्षम नहीं है, लेकिन इसका उपयोग विभिन्न स्थितियों और सामान्य बीमारियों के लिए सुरक्षित और प्रभावी रूप से किया जाता है। यह पारंपरिक चिकित्सा के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करती है और इसे पूरक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।

कई तरह के रोगों में है उपयोगी


होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होने के लिए पारंपरिक चिकित्सा के साथ या अकेले किया जा सकता है। एक शोध में पाया गया कि होम्योपैथी चिंता और हल्के से गंभीर अवसाद के उपचार में उपयोगी है। एक अन्य अध्ययन से संकेत मिलता है कि होम्योपैथिक उपचार ने न केवल कैंसर से पीड़ित लोगों में थकान को कम किया बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में समग्र रूप से सुधार किया।

हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही लें दवा


यह याद रखें कि होम्योपैथी मामूली रोजमर्रा की बीमारियों के लिए एक सुरक्षित और आसान उपाय तो है, लेकिन इसे किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए। चिकित्सक कई कारकों पर विचार करते हैं, जिसमें आपकी आयु, स्थिति, बीमारी की गंभीरता, चरण और आपके पिछले इतिहास को शामिल करके सही दवा की पहचान करते हैं, जो आपके तेजी से ठीक होने के लिए सबसे अच्छा है।