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Ganga Expressway: देश को मिलेगा दूसरा सबसे बड़ा गंगा एक्सप्रेसवे, भूमि अधिग्रहण का काम हुआ पूरा

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जहाँ का लहजा थोड़ा ठंडा और बातें गरम सी लगती हैं, जहाँ गंगा, यमुना, सोन जैसी नदियां, अपनी कल-कल बहती धाराओं से भूमि को पवित्र करती हैं, जहाँ दुनियां का सातवाँ अजूबा कहे जाने वाला ताजमहल स्थित हैं, उस उत्तर प्रदेश की भूमि पर फिर से एक नया कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। दरसअल, उत्तर प्रदेश को एक और एक्सप्रेसवे मिलने की पूरी तैयारी हो गयी है जो राज्य के पूर्वी हिस्से को पश्चिमी हिस्से से जोड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे, भारत का दूसरा सबसे लंबा ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ होगा। इसका निर्माण इसी साल सितंबर तक शुरू होने वाला है।


India’s Second Longest ‘Ganga Expressway’ यानी की भारत का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, जो की उत्तर प्रदेश में एक और एक्सप्रेसवे है, की पुष्टि हो गई है। यह नया गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा होगा। इस एक्सप्रेसवे को मेरठ से प्रयागराज तक बनाने की योजना है। यह मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज जाएगा।


इस एक्सप्रेसवे की मदद से दिल्ली और प्रयागराज के बीच यात्रा के समय को मौजूदा 10-11 घंटे से घटाकर सिर्फ 6-7 घंटे करने की उम्मीद है। इस एक्सप्रेस-वे पर एक हवाई पट्टी भी बनाई जाएगी जिससे भारतीय वायु सेना के विमान आपात स्थिति में उतर सकेंगे। इस हवाई पट्टी का निर्माण सुल्तानपुर जिले में किया जाएगा।


अब जानते हैं की किस शहर में कितना किलोमीटर एक्सप्रेसवे बनेगा। मेरठ में 15km, हापुड़ में 33km, बुलंदशहर में 11km, अमरोहा में 26km, संभल में 39km, बदायूं में 92km, शाहजहांपुर में 40km, हरदोई में 99km, उन्नाव में 105km, रायबरेली में 77km, प्रतापगढ़ में 41km और प्रयागराज में 16km का एक्सप्रेसवे बनेगा। इस एक्सप्रेस-वे की सबसे अधिक लंबाई उन्नाव जिले में 105 किमी. होगी।


12 जिलों की 30 तहसीलों से होकर गुजरने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए लगभग 36,000 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है और अगले 26 महीनों में इसके पूरा होने का अनुमान है। आपको बता दे की वाहनों को केवल स्पेसिफिक टोल प्लाजा के माध्यम से ही इस एक्सप्रेसवे में प्रवेश करने या बाहर निकलने की अनुमति होगी। इसके लिए दो मुख्य टोल प्लाजा मेरठ और प्रयागराज में बनाये जायेंगे। हालांकि रास्ते में 15 रैंप टोल प्लाजा भी होंगे।


इस आवंटित बजट में से 9500 करोड़ रुपए जमीन अधिग्रहण में खर्च होगा जबकि लगभग 20,000 करोड़ रुपए कंस्ट्रक्शन वर्क में खर्च होगा। ये एक्सप्रेसवे स्टार्टिंग में 6 लेन का होगा और इस एक्सप्रेसवे को 8 लेन तक एक्सटेंड किया जायेगा। Uttar Pradesh Expressway Industrial Development Authority यानी की UPEIDA द्वारा इस एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है। UPEIDA के अनुसार अनुमानित समय में काम पूरा करने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को 12 पैकेजों में विभाजित किया गया है। इस एक्सप्रेस-वे से करीब 519 गांव जुड़ेंगे। यह मेरठ के बिजौली गांव के पास से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव में समाप्त होगा। इस एक्सप्रेस-वे के एक किनारे पर 3.75 मीटर चौड़ाई की सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा, जिससे परियोजना क्षेत्र के आसपास के गांवों के निवासियों को सुगम परिवहन मिल सके।


कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे के साथ लगभग 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 929 कल्वर्टस, 7 रोड ओवरब्रिज, 28 फ्लाईओवर और 8 डायमंड इंटरचेंज होंगे। इसके साथ ही रेलवे ओवरब्रिज की चौड़ाई 120 मीटर होगी। दिसंबर 2023 तक इस गंगा एक्सप्रेसवे की बनकर तैयार हो जाने की सम्भावना है। जाहिर सी बात है, इस गंगा एक्सप्रेसवे के बन जाने से उत्तर प्रदेश और साथ ही साथ भारत के नाम एक और रिकॉर्ड होगा।