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PM Modi जलियां वाला बाग स्मारक का पुनर्निर्मित परिसर आज राष्ट्र को करेंगे समर्पित

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जलियांवाला बाग अब नए स्वरूप में देश के सामने आ रहा है, ताकि हमेशा के लिए जलियांवाला बाग के शहीद देशवासियों की स्मृति में अंकित रहें। आपको याद दिला दें, अमृतसर का यही वह बाग है, जहां 13 अप्रैल, 1919 की शाम अंग्रेजी सरकार ने भीषण नरसंहार किया था। अंग्रेज सैनिकों ने निहत्थे भारतीयों पर लगातार 10 मिनट तक गोलियां बरसायी थी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे।

PM Modi जलियां वाला बाग स्मारक का पुनर्निर्मित परिसर राष्ट्र को कर रहे हैं समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज, 28 अगस्त की शाम 6:25 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसी जलियांवाला बाग स्मारक का पुनर्निर्मित परिसर राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। स्मारक में निर्मित संग्रहालय दीर्घाओं का भी उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जयेगा। 13 अप्रैल, 1919 को घटित विभिन्न घटनाओं को दर्शाने के लिए एक साउंड एंड लाइट शो की व्यवस्था भी की गई है। परिसर में विकास से जुड़ी कई पहल की गई हैं।

पंजाब की स्थानीय स्थापत्य शैली के अनुरूप धरोहर संबंधी विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य किए गए हैं। शहीदी कुएं की मरम्मत की गई है और नवविकसित उत्तम संरचना के साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है। जलियांवाला बाग का केंद्रीय स्थल माने जाने वाले ज्वालास्मारक की मरम्मत करने के साथ-साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है। यहां स्थित तालाब को एक लिलीतालाब के रूप में फिर से विकसित किया गया है और लोगों को आने-जाने में सुविधा के लिए मार्गों को चौड़ा किया गया है।

अंग्रेजी सरकार की हिंसा और क्रूरता का वह रूप था बेहद भयावह

अंग्रेजी सरकार की हिंसा और क्रूरता वह रूप भयावह था। कहते हैं कि जलियांवाला बाग में 15 हजार से अधिक लोग इकट्ठा थे। जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के अपने सैनिकों को उन पर गोलियां चलाने के आदेश दिए। यह कहा गया है कि अंग्रेज सैनिकों ने कुल 1650 राउंड गोलियां चलाईं, जिससे चारों तरफ लोग मरकर और घायल होकर गिर रहे थे।

उस रात घायलों के लिए डॉक्टरी सहायता तक नहीं पहुंची थी

जलियांवाला बाग की दीवार पर गोलियों के निशान अब भी मौजूद हैं। यह बात कही जाती है कि उस रात जालियांवाला बाग में घायल हुए लोगों को कोई डॉक्टरी सहायता नहीं पहुंची। न ही लोगों को अपने मृतकों और घायलों को मैदान से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई।

ब्रिटिश सरकार ने जलियांवाला बाग नरसंहार को छिपाने की भरपूर कोशिश की थी

ब्रिटिश सरकार ने जलियांवाला बाग नरसंहार को छिपाने की भरपूर कोशिश की थी। लेकिन जब बात फैलने लगी तो उसने एक जांच कमेटी (हंटर कमेटी) गठित कर दी और मामले को दबाने की हर संभव कोशिश की। अपनी रिपोर्ट में हंटर कमेटी ने इस बात को स्वीकार किया कि फायरिंग के दौरान 379 लोग मारे गए, जिनमें 337 पुरुष और 41 बच्चे शामिल थे।

जलियांवाला बाग नरंसहार के बाद रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि त्याग दी थी

इस नरसंहार की सूचना मिलने के बाद रवींद्रनाथ ठाकुर ने वायसराय चेम्सफोर्ड को पत्र लिखकर अपनी नाइटहुड की उपाधि वापस कर दी थी। महात्मा गांधी ने भी घटना का तीखा विरोध किया था। नरसंहार की इस घटना ने भारतीय नागरिकों और अंग्रेजों के बीच निश्चित दूरी बना दी थी।