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झारखंड के इन गरीब Olympic खिलाड़ियों का बदला जीवन

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टोक्यो ओलिंपिक खेलों में इस बार भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल, 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज़ पर कब्जा जमाया। जिन्होंने मेडल जीता उनकी तो तारीफ पूरे देश में हो ही रही है पर इस बीच हमें उन खिलाड़ियों के मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिन्होंने ने जी जान लगा कर अपना सौ प्रतिसत दिया पर मेडल से चूक गए। आज हम ऐसी ही झारखंड की बेटियों की बात करेंगे जिन्होंने ओलंपिक में भारत का परचम लहराया।

तीरंदाज दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) और हॉकी खिलाड़ी निक्की प्रधान तथा सलीमा ओलिंपिक में खेलों का हिस्सा बनी थी। दीपिका कुमारी एक भारतीय पेशेवर तीरंदाज हैं। बता दें, अभी वो विश्व की नंबर 1 रैंकिंग पर है। उन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में महिला व्यक्तिगत recurve स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने डोला बनर्जी और बोम्बायला देवी के साथ महिला टीम recurve स्पर्धा में भी इसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था।

अभी हाल में ही रांची की तीरंदाज दीपिका कुमारी ने पेरिस में खेली गयी विश्व कप तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक लगाई है। यह हैट्रिक दीपिका ने महज पांच घंटों में तीन स्वर्ण पदक जीतकर लगाई है। दीपिका ने कोमोलिका बारी (Komolika Bari) और अंकिता भगत (Ankita Bhagat) के साथ मिलकर recurve महिला का स्वर्ण पदक जीता। इसके एक घंटे बाद ही दीपिका ने अपने पति अतनु दास (Atanu Das) के साथ मिलकर मिश्रित युगल का खिताब भी जीत लिया। दूसरा गोल्ड जीतने के लगभग तीन घंटे बाद ही दीपिका ने दिन का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण एकल recurve महिला का खिताब भी अपने नाम कर लिया।

इस साल वर्ल्ड कप में कई पदक जीतने वाली दीपिका अच्छी फॉर्म में चल रही थीं और टोक्यो ओलम्पिक खेलों में 27 साल की इस खिलाड़ी से भारत के लिए तीरंदाजी का पहला ओलंपिक पदक जीतने की उम्मीद थी। लेकिन ओलम्पिक में तीसरी बार उतरी दीपिका के ऊपर ओलंपिक का दवाब दिखा और वो मेडल से चूक गयी। इस बात को खुद दीपिका ने स्वीकार किया है।

मेडल जीतने, ना जीतने से जरूरी होता है खिलाड़ी का प्रदर्शन। झारखंड की इन बेटियों के साथ साथ भारत की ओर से ओलंपिक में गए सभी ने उम्दा प्रदर्शन किया था। इसी क्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने दीपिका, निक्की प्रधान (Nikki Pradhan) और सलीमा (Salima) के परिवार को सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री ने निक्की प्रधान और सलीमा के परिजनों को घोषणा के अनुसार 50-50 लाख रुपये की सहायता राशि दी।

किसी भी खिलाड़ी के लिए खासकर जिसे मूलभूत सुविधाएं भी ना मिली हों ओलंपिक में क्वालीफाई करना एक बड़ी बात है। तमाम दिक्कतों के बीच ज़िंदगी गुज़ार करके ओलंपिक के लिए न केवल इन खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया बल्कि वहां बेहतरीन प्रदर्शन भी किया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार ओलम्पिक के सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। टक्कर के मुकाबले में भारतीय महिला टीम मेडल से एक कदम दूर रह गयी पर हारकर भी पूरी दुनिया को अपने खेल से कायल कर गईं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आप खेल में अपना जौहर दिखाएं, सरकार आपकी और परिवार की चिंता करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहला मौका है, जब खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी जा रही है और अब तक 40 लोगों को नियुक्ति दी जा चुकी है। मौके पर निक्की प्रधान के परिजनों ने कहा कि लगता है, अब घर की मरम्मत हो जाएगी। इनका घर लंबे समय से क्षतिग्रस्त था। बरसात के कारण अभी काम भी रूका हुआ है। आपको बता दें, झारखंड से आने वाली ये खिलाड़ी काफी गरीब परिवार से तालुख रखती हैं।

हमारे देश में बहुत से ऐसे टैलेंटेड खिलाड़ी हैं जो आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाते हैं। ऐसे में अगर उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक तौर पर मदद मिले तो खिलाड़ी और बेहतर कर पाएंगे।