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जानिए UPSC टॉपर शुभम कुमार की पूरी कहानी

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बिहार के शुभम ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है “एक बिहारी सौ पर भरी”. तीसरे अटेम्प्ट में UPSC टॉपर बनने वाले शुभम ने दिखा दिया है की बिहारियों में कितना दम है। आज हर किसी को शुभम की सफलता पर नाज है। संघ लोक सेवा आयोग यानी की UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा यानी की CSE 2020 का अंतिम परिणाम 24 सितंबर को घोषित कर दिया है। इस सिविल सेवा परीक्षा में कुल 761 उम्मीदवार पास हुए हैं। बता दें, इस परीक्षा में शुभम कुमार ने पहला स्थान हासिल किया है।

मूल रूप से कटिहार के निवासी शुभम बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उनके दादा दादी चाहते थे की वो बड़े अधिकारी बने। शुभम ने इसके पहले वर्ष 2019 की परीक्षा में 290वीं रैंक हासिल की थी। शुभम के पिता उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। शुभम ने बताया कि उन्हें कभी भी यह उम्मीद नहीं थी कि वह यूपीएससी की परीक्षा टॉप करेंगे बल्कि उन्हें तो यह भी उम्मीद नहीं थी कि उनका नाम लिस्ट में भी आएगा मगर भगवान के आशीर्वाद और परिवार के आशीर्वाद की वजह से उन्होंने यह कारनामा कर दिखाया।

शुभम ने दसवीं विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल पूर्णिया से पास किया और 12वीं चिन्मया विद्यालय बोकारो से पास किया है। उन्होंने 2018 में IIT मुंबई से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। शुभम ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म करने के बाद परिवार वालों से उन्होंने बातचीत की और फिर सभी ने उन्हें UPSC की तैयारी करने के लिए कहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की और अपना ध्यान पूरी तरीके से यूपीएससी की पढ़ाई पर ही केंद्रित रखा। अब आईएएस बनने के बाद वह लोगों के लिए काम करना चाहते हैं और समाज के लिए ज्यादा से ज्यादा काम करना चाहते हैं। शुभम ने बताया कि वह चाहते हैं कि उन्हें बिहार कैडर मिले ताकि वह अपने राज्य में ही अपनी सेवाएं दे।

शुभम का कहना है की बिहार उनकी पहली च्वाइस और मध्यप्रदेश उनकी दूसरी च्वाइस। वहीं उन्होंने बताया की उनका जो एटीट्यूड रहा है उसके आधार पर वो आईएएस में ही फिट बैठते हैं।

शुभम ने गांव में रहकर तैयारी करने वालों के लिए भी बड़ा संदेश दिया है। शुभम का कहना है कि डिजिटल मीडिया के इस आधुनिक दौर में तैयारी काफी आसान हो गई है। UPSC की तैयारी के लिए अब ऐसा नहीं है कि बड़े शहरों में खास कोचिंग को ज्वाइन किया जाए। बड़े शहरों में ही नहीं गांव में भी तैयारी हो सकती है और हर हाल में सफलता मिल सकती है। परीक्षा की तैयारी तो छात्र कहीं भी रहकर कर सकता है। बस छात्र को ईमानदारी से इस तैयारी के लिए लक्ष्य बनाकर समर्पित होना पड़ेगा। डेडिकेटेड होकर हर तैयारी और बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। ऑनलाइन से लेकर यूट्यूब पर एक से बढ़कर एक मटेरियल है जो तैयारी करने वालों का लक्ष्य आसान कर सकते हैं। डिजिटल युग में बिहार में रहकर भी तैयारी की जा सकती है।

शुभम अपने लक्ष्य और अपनी तैयारी को लेकर इतने डेडिकेटेड थे कि वह घर वालों से भी 24 घंटे में 5 मिनट से अधिक बात नहीं करते थे। शुभम के पिता देवानंद सिंह का कहना है कि रात में खाना खाने के बाद वह खुद शुभम को फोन लगाते थे, लेकिन 5 मिनट से अधिक बात नहीं करते थे। घर वालों को भी पता था कि शुभम का लक्ष्य UPSC में अच्छा रैंक लाना है। शुभम का कहना है कि रिजल्ट आने से 24 घंटे पहले भी घर में पापा से बात हुई थी, लेकिन रैंक को लेकर सोचा भी नहीं था टॉप होगा। शुभम का कहना है कि उनकी तरह कोई भी बच्चा टॉप कर सकता है बस उसके लक्ष्य ईमानदारी से निर्धारित होने चाहिए। शुभम ने कहा कि बिहार का कोई भी छात्र ऐसी सफलता ला सकता है, वह गांव में रहकर भी UPSC क्रैक कर सकता है। बस लक्ष्य को लेकर समर्पण होना चाहिए।

आपको बता दें इस साल यूपीएससी 2020 परीक्षा में कुल 761 उम्मीदवारों में से 545 पुरुषों और 216 महिला उम्मीदवार सफल हुई हैं। इस बार भी लड़कियों ने UPSC रिजल्ट में बाजी मारी है। इस बार टॉप 5 में 3 लड़कियों ने अपनी जगह बनायीं है। आपको बता दें जहाँ शुभम को पहला स्थान मिला है वही भोपाल में मैनिट से इलेक्ट्रिकल इंजिनीयरिंग में ग्रेजुएट जागृति अवस्थी ने दूसरा स्थान पाया है। टाॅप 25 उम्मीदवारों में 13 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। इस बार के कामयाब उम्मीदवारों में 25 दिव्यांग श्रेणी के भी उम्मीदवार हैं। भोपाल की जागृति अवस्थी ने यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम 2020 में ओवरऑल सेकंड रैंक पर टॉप किया है, जबकि महिलाओं की ट्रेनिंग में जागृति टॉप पर है। वहीँ अंकिता जैन को तीसरा, यश शुक्ला को चौथा और ममता यादव को पांचवा स्थान मिला है। वहीं 2015 UPSC की टॉपर रही टीना दबी की बेहन रिया दबी ने इस साल UPSC में 15वां रैंक पाया है।

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