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जानें, कितना महत्वपूर्ण है QUAD शिखर सम्मेलन, भारत के क्या हैं मुद्दे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 24 सितंबर को वाशिंगटन में क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी इसमें भाग लेंगे।

क्या है क्वाड

क्वाड यानि चतुर्भुज सुरक्षा संवाद’ (QUAD- Quadrilateral Security Dialogue), इसकी स्थापना साल 2007 में हुई। क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच अनौपचारिक रणनीतिक वार्ता मंच है। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समन्वय स्थापित करना है।

इसी वर्ष चारों देशों के नेता 12 मार्च को वर्चुअल माध्यम से आयोजित क्वाड के पहले शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। 24 सितंबर को होने वाली बैठक में पहले हुई बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और साझा हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

क्यों है महत्वपूर्ण

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ पार्थसारथी बताते हैं कि “दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा हिंद महासागर के माध्यम से होर्मुज के जलडमरूमध्य से जाता है। उन तेल आपूर्ति की सुरक्षा पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए आवश्यक है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रतिद्वंद्विता भी है। ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच की तरह अस्थिरता रही। यमन में एक समस्या है। यह सब उस क्षेत्र में हो रहा है। चीनी अब चारों ओर सुविधाएं विकसित कर रहे हैं। वे बड़े पैमाने पर क्षेत्र का रणनीतिक नियंत्रण लेने की कोशिश कर रहे हैं। जाहिर है इसके हमारे लिए गंभीर सुरक्षा निहितार्थ हैं और इसलिए हम शांति बनाए रखने के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग में एक रणनीति विकसित कर रहे हैं। पार्थसारथी कहते हैं कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत एक साथ आएं हैं।

चीन को जवाब

क्वाड देशों की बैठक को लेकर अक्सर चीन सवाल उठाता रहता है। दरअसल, हिंद महासागर बहुत में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता रहा है लेकिन भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित देशों के इस समूह द्वारा इस तरह के प्रयासों का विरोध किया जा रहा है। ऐसे में चीन को लगता है कि क्वाड देश उसके विरोध में बनाया गया समूह है।


कुछ समय पहले चीन द्वारा क्वाड समूह को एशिया का नाटो कहा गया। इसके जवाब में हाल ही में टू प्लस टू की वार्ता के लिए भारत आए ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री स्पष्ट किया कि क्वाड एक ऐसा मंच है, जहां 4 देश अपने लाभ और दुनिया के लाभ के लिए सहयोग करने आए हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि नाटो (चीन द्वारा) जैसा शब्द शीत युद्ध का शब्द है। क्वाड भविष्य को देखता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों और नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) या ऐसे किसी अन्य संगठनों के बीच कोई संबंध नहीं देखते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि वास्तविकता को गलत तरीके से पेश न किया जाए।

भारत के मुद्दे

विदेश मंत्रालय के अनुसार शिखर सम्मेलन नेताओं के बीच बातचीत के लिए एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा। यह एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के उनके साझा दृष्टिकोण पर आधारित होगा।


भारत कोविड महामारी की रोकथाम के प्रयासों के हिस्से के रूप में वे क्वाड वैक्सीन पहल की समीक्षा करेंगे, जिसकी घोषणा इस साल मार्च में की गई थी। वे समकालीन वैश्विक मुद्दों जैसे महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।