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छोटे देश का बड़ा दिल, India को दिया इतना बड़ा दान

Kenya
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जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

अर्थात आप किसी से ज्ञान प्राप्त कर रहे हो तो उसकी जाति के बारे में ध्यान न दो क्योंकि उसका कोई महत्व नहीं होता है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे तलवार का महत्व उसे ढकने वाले म्यान से ज्यादा होता है।

आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी, बूँद बूँद से तालाब भरता है। इस दुनिया में हर मदद करने वाले व्यक्ति का मोल होता है। आपको याद होगा की रामायण में कैसे छोटे छोटे गिलहरियों ने, कंकर कंकर डाल के सेतु बनाने में अपना योगदान दिया था। गिलहरियां कोई बहुत बड़ी जीव नहीं होती हैं, लेकिन उनका यह योगदान काफी बड़ा था। ऐसी ही एक सहायता भारत को भी मिली है। भारत (India) इस वक़्त कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। इस वायरस से निपटने के लिए कई देश, भारत के तरफ मदद का हाथ बढ़ा रहे है। इन्हीं सारे देशों में एक नाम east African देश Kenya का भी है। दरअसल, केन्या ने कोविड-19 रिलीफ के तहत भारत को 12 टन फूड प्रोडक्ट्स दान दिए है। ये जो सिर्फ 12 टन अनाज है, इसपर कई लोग केन्या का मजाक उड़ा रहे हैं। कुछ का कहना है की यह गरीब देश है, ऐसा है, वैसा है। पर मैं आपको बता दूँ की केन्या, जिसे कई लोग गरीब देश भी बोलते हैं, सुपर पावर देश अमेरिका की भी मदद कर चूका है। जी हाँ ! केन्या ने अमेरिका को 14 गायें दान में दी थी।

ये बात 9/11 हमलें की है। 9/11 का हमला जब हुआ, अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर, तो इसने सिर्फ अमेरिका को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिला के रख दिया था। उस समय ये, अमेरिका के सबसे बड़े त्रासदी में से एक मानी जा रही थी। लोगों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का नाम सुना, ओसामा बिन लादेन का नाम सुना, मनहट्टेन, अमेरिका का नाम सुना, पर केन्या के लोग तो इस खबर से बेखबर थे।

दरअसल, केन्या में कई सारी जन-जातियां ऐसी हैं जो प्राकृतिक जीवन जीती हैं और उनके पास ज़्यादा रिसोर्सेज नहीं हैं। इनोसाइन नाम का गाँव जो की केन्या-तंज़ानिया बॉर्डर पर है, जहाँ मसाई जन-जाति के लोग रहते हैं, उन्हें कई दिनों तक पता ही नहीं चला था की अमेरिका पर ऐसा अटैक हुआ है। उन्हें ये बाद तब पता चली जब वहां का ही एक लड़का, किमेली नाइयोमाः, जो की अमेरिका के Stanford University में पढाई कर रहा था, उन्हें बताया की आंतकवादियों ने एक खतरनाक हमला किया है।

जब किमेली ने, मसाई जन-जाति को बताया की अमेरिका की एक बड़ी ऊँची बिल्डिंग में प्लेन घुसा दिया गया है तो, वो तो बिलीव ही नहीं कर पाए। उन्होंने तो पहले विश्वास ही नहीं किया की इतनी ऊँची बिल्डिंग भी हो सकती है। मसाई जन-जाति के लोग, भोले भाले लोग, जिन्होंने अपना जीवन सिर्फ एक झोपड़ी में ही बिताया है, ये सोचा भी नहीं था की इतनी ऊँची बिल्डिंग भी होती है जो आसमान को छू ले। उन्होंने तो सबसे ऊँची चीज़ सिर्फ girraffe ही देखी थी। लेकिन फाइनली जब उन्हें बताया और समझाया गया तो सबसे पहले उन्होंने अमेरिकन्स के दर्द को समझा।

उन्होंने ये खबर सुनने के बाद, अमेरिका के लोगों का मदद करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने उसी स्टूडेंट के हाथों एक चिट्ठी भेजवाई। केन्या का जो कैपिटल है नैरोबी, वहां पर us embassy है, उस embassy के जो deputy head थे, उनके नाम एक चिट्ठी लिखी गयी। उस deputy head ने जब वो चिट्ठी पढ़ा तो वो उस जन-जाति के लोगों से मिलने आएं। जब वो वहां पहुंचे तो देखा की सभी लोग उनके स्वागत में खड़े हैं और साथ हीं 14 गायें एक लाइन से खड़ी की गयी है।


वहां के लोग हाथ में पोस्टर लिए हुए थे जिसमें लिखा था, “हम मसाई जन-जाति के लोग, इस संकट की घड़ी में अमेरिका के साथ खड़े हैं और अमेरिकन्स के मदद के लिए ये 14 गायें दान करना चाहते हैं।” वे लोग गायों को बहुत पवित्र मानते हैं, गायें उनके लिए पूजनीय है। जब deputy head ने उनकी ये दरियादिली देखी तो उनकी आँखे नम हो गयी। हालाँकि, उन 14 गायों को कुछ international laws के कारण, ले तो नहीं जाया जा सका, लेकिन उन गायों को बेच के एक ज्वेलरी खरीदी गयी जो 9/11 के मेमोरियल म्यूजियम में रखा गया है।

जब अमेरिका के लोगों को इस बारे में जानकारी मिली तो वे लोग बहुत खुश हुए। उन्होंने तो एक ऑनलाइन पेटिशन भी sign की और गवर्नमेंट से अपील की कि उन्हें तो वो 14 गायें ही चाहिए। अमेरिकन्स ने दिल से केन्या के लोगों का, उस मसाई जन-जाति को धन्यवाद दिया। आज इसी देश ने हम भारतवासियों के लिए, इस संकट की घड़ी में अनाज भेजा है।

केन्या ने कोविड-19 राहत प्रयासों के तौर पर भारत को 12 टन फूड प्रोडक्ट्स दान दिए है। इनमें चाय, कॉफी और मूंगफली जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। केन्या ने ये सामग्री इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी को दी है। इन सामग्रियों के पैकेट को महाराष्ट्र में बांटा जाएगा। केन्या, महामारी के इस दौर में भारत की सरकार और उसके लोगों के साथ एकजुटता दिखाना चाहती है। आप इस संख्या को मत देखिये की कितना सा अनाज भेजा है। आप दान करने वाले दिल को देखिये। देखिये की उनका दिल कितना बड़ा है। अगर भगवान श्री कृष्ण को सुदामा द्वारा दिए गए एक मुट्ठी चावल से शर्म नहीं आयी, वो छोटे नहीं हो गए तो फिर भला कौन से उनसे बड़े हैं।

साँई इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाय।।

केन्या ने वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को ध्यान में रखते हुए ये मदद भेजा है। केन्या के लोगों से सिर्फ एक ही बात सिखने को मिलती है की मुस्कान बांटते चलिए, मदद करते चलिए और सबसे बड़ी बात की संकट की घड़ी में एक दूसरे का साथ निभाते चलिए। क्योंकि जो बिना किसी स्वार्थ के साथ देता है, उसका हाथ हमेशा पकड़ लेना चाहिए। वो आपका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। हम भारतवासी, केन्या की इस मदद के लिया उनका तहे दिल से शुक्रियाअदा करते उन्हें सलाम करते हैं।