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Jallianwala Bagh Smarak : जर्जर हुए बलिदान की ये जगह अब सुनाएगी उनके वीरता की कहानी

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भारत की आज़ादी, कल्याण और प्रगति के लिये अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान वीरों को हमारा सत सत नमन हैं। वैसे तो भारत को आज़ाद करने के लिए देश में कई सारे आंदोलन हुए लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड, स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा अध्याय है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। इस भीषण हत्याकांड की याद में यहाँ पर स्मारक का निर्माण भी करवाया गया था। लेकिन अब यह स्मारक जर्जर हालत में पहुंचता जा रहा। इसकी महत्ता को बचा के रखने के लिए अब इस परिसर को फिर से संवारा गया है। आजादी की लड़ाई में शहीद हुए लोगों की स्मृति में बने जलियांवाला बाग स्मारक (Jallianwala Bagh Smarak) का फिर से निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा किया गया। इसके साथ ही इस स्मारक में निर्मित म्यूजियम गैलरी का भी उद्घाटन किया गया।

जलियांवाला बाग स्मारक उन लोगों के याद में बनाया गया है जो 13 अप्रैल, 1919 की कुख्यात घटना में शहीद हुए थे। इसके जर्जर हालत में होने के कगार पर आने से पहले इसका पुनर्निर्माण कराया गया है। जलियांवाला बाग में लंबे समय से बेकार पड़ी और कम उपयोग वाली इमारतों को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाकर उनमें चार गैलरीज निर्मित की गई है। ये गैलरीज उस समय में पंजाब में घटित विभिन्‍न घटनाओं के विशेष ऐतिहासिक महत्‍व को दर्शाती हैं। इन घटनाओं को दिखाने के लिए audio-visual technology के माध्यम से प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें मैपिंग और 3डी चित्रण शामिल हैं।

13 अप्रैल 1919 को अपनी जान गंवाने वाले वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए निर्मित यह स्मारक, राष्ट्र को समर्पित की जाएगी। इस परिसर में विकास से जुड़े कई कार्य किए गए हैं। आर्किटेक्ट्स ने युग के दौरान पंजाब में हुई घटनाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक साउंड एंड लाइट शो की स्थापना की गई है।

पंजाब की स्थानीय आर्किटेक्चरल स्टाइल के अनुरूप इसका पुनर्निर्माण कार्य किया गया है। शहीदी कुएं की मरम्मत की गई है और नए तरिके से इसका निर्माण किया गया है। इस बाग़ का केंद्रीय स्‍थल माने जाने वाले ‘ज्वाला स्मारक’की मरम्मत करने के साथ-साथ इसका पुनर्निर्माण किया गया है। इस बाग़ का निर्माण यहीं खत्म नहीं होता है। यहां स्थित तालाब को ‘लिली तालाब’ के रूप में फिर से स्वस्छ और विकसित किया गया है। इसके साथ ही लोगों को आने-जाने में सुविधा के लिए यहां स्थित मार्गों को चौड़ा किया गया है।

इसमें अनेक नई और कई आधुनिक सुविधाओं को जोड़ा गया है। इसके अलावा मोक्ष स्‍थल, अमर ज्योत और फ्लैग मास्ट को समाहित करने के लिए अनेक नए क्षेत्रों का विकास किया गया है। अब आइये चलते हैं और जानते हैं जालियांवाला बाग के दिल दहला देनेवाले हत्याकांड के बारे में।

जालियांवाला बाग अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के करीब एक छोटा सा बगीचा है। यहां 13 अप्रैल, 1919 यानी की बैसाखी के दिन, रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी। इसमें जनरल डायर नामक अंग्रेज अफसर ने बेवजह भीड़ पर गोलियां चलवा दी थीं, जिसमें बूढ़े, महिलायें और बच्चें सहित सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हो गए थे। इस घटना का देशभर इतना व्यापक असर पड़ा था कि इसी के बाद अंग्रेजी हुकूमत की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। इस स्मारक में लौ के रूप में एक मीनार बनाई गई है जहाँ शहीदों के नाम अंकित हैं। यहाँ आज भी वह कुआँ मौजूद हैं जिसमें लोग, गोलीबारी से बचने के लिए कूद गए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।

जलियांवाला बाग को रिनोवेट करने की मांग लंबे समय से हो रही थी। अब यह स्मारक एक नए रंग-रूप में नजर आएगा। राष्ट्र को समर्पित इस स्मारक का उद्धाटन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। अब यह बात कहना शायद गलत ना होगा कि जलियावाला ये बाग़ हमारे अगले कई पीढ़ियों को भारत की आज़ादी, कल्याण और प्रगति के लिये अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान वीरों के वीरता की कहानी नए अंदाज में सुनाएगा। ये आजादी हमें कई सहादतों के बाद मिली है, इसीलिए आप सभी से नम्र निवेदन होगा कि अपने आजादी का सही इस्तेमाल करें। जिए और जीने दे।