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Tokyo Paralympics में भारत की भाविना ने रचा इतिहास, Silver Medal कन्फर्म

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मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है।
इस वाक्य को सही कर दिखाया है भारत की पैरालंपिक टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल (Bhavina Patel) ने।


भारत की भाविना पटेल ने टोक्यो में चल रहे पैरालम्पिक में इतिहास रच दिया है। उन्होंने टेबल टेनिस इवेंट के महिला एकल क्लास 4 में फाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही उनके नाम मेडल कंफर्म हो गया है। सेमीफाइनल में भाविना का सामना आज, 28 अगस्त को चीन की झांग मिआ से था। जिन्हें हरा कर भाविना ने फाइनल में जगह बना रजत पदक (Silver Medal) कन्फर्म कर लिया है।


सेमीफाइनल में भाविना पटेल ने सर्बिया की राकोविच को 3-0 से मात देकर यह मैच अपने नाम किया और अंतिम-4 में जगह बनाई। भाविना ने यह मैच 11-5, 11-6, 11-7 से जीता।

इससे पहले भाविना पटेल ने एकल क्लास 4 के क्वाटर फाइनल में ब्राजील की जिओसी डी ओलिविएरिआ को 3-0 से हराया। भाविना ने राउंड-16 में 23 मिनट तक चले मुकाबले में जिओसी को 12-10, 13-11 और 11-6 से हराया। भाविना ने सर्विस से 19 अंक जीते जबकि 13 अंक गंवाए। भाविना ने पहला गेम 12-10 से, दूसरा गेम 13-11 से और तीसरे गेम 11-6 से जीता।


सेमीफाइनल में जगह बनाने के बाद पैरालंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना पटेल ने कहा कि वह खुद को दिव्यांग नहीं मानती और टोक्यो खेलों में उनके प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि कुछ भी असंभव नहीं है।


12 महीने की उम्र में पोलियो की शिकार हुईं भाविना ने कहा की वो खुद को दिव्यांग नहीं मानती, उन्हें हमेशा से यकीन था कि वो कुछ भी कर सकती हैं और उन्होंने साबित कर दिया कि वो किसी से कम नहीं है और पैरा टेबल टेनिस भी दूसरे खेलों से पीछे नहीं है।

भाविना पहली भारतीय महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरालम्पिक खेलों के फाइनल में जगह बनाई है।