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Delhi-Mumbai Expressway: भारत का पहला एक्सप्रेसवे जहाँ जांनवरों को भी है आने की इजाजत

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दिलवालों की शहर दिल्ली से अपने कन्धों पर सपने ढ़ोने वाले लोग अब बड़ी आसानी से मायानगरी मुंबई का सफर तय कर सकेंगे, क्योंकि अब दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी कम होने वाली है। अब देश को अपना सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे मिलने वाला है। दिल्ली (Delhi) से मुंबई (Mumbai) तक बन रहा ये एक्सप्रेस-वे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। यह देश की जनता के लिए एक अहम सौगात है।

दिल्ली से मुंबई तक बन रहा ये एक्सप्रेस-वे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। 1380 किमी लंबे इस आठ लेन वाली एक्सप्रेस-वे के जरिए, पहले दिल्ली से मुंबई तक जो दूरी तय करने में 24 घंटे लगते थे, उसे महज 12 घंटे में ही तय किया जा सकेगा। 98 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा ये एक्सप्रेसवे भारत के विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली (Delhi), हरियाणा (Haryana), राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), गुजरात (Gujarat) और महाराष्ट्र (Maharashtra) से होकर गुजरेगा। इस हाईवे प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी और इसके तहत फाउंडेशन स्टोन 9 मार्च 2019 को रखा गया था।

जब ये एक्सप्रेसवे बनना शुरू हुआ था, तो सरकार का दावा था कि ये दुनिया का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होगा और ऐसा था भी, लेकिन इसी बीच, चीन में इससे भी लंबा एक एक्सप्रेस वे बनकर तैयार हो गया। इसी साल जून में बीजिंग से उरुमकि के बीच ये एक्सप्रेसवे शुरू हो गया है। इस एक्सप्रेस-वे की वजह से जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों तक आना जाना आसान हो जाएगा। अभी इस एक्सप्रेस-वे में आठ लेन हैं लेकिन ट्रैफिक के मुताबिक इसे 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे की खास बात ये है की इसपर टोल कलेक्शन रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी (Radio Frequency Identification Technology) के जरिए होगा, जो की एक वायरलेस सिस्टम है।

यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) एशिया का पहला और दुनिया का दूसरा एक्सप्रेसवे होगा जहां बिना किसी रिस्ट्रिक्शन के वाइल्डलाइफ मूवमेंट जारी रहेगा। यह एशिया का ऐसा पहला एक्‍सप्रेस-वे होगा जिसमें जानवरों के गुजरने के लिए ओवरपास होंगे क्‍योंकि यह एक्‍सप्रेस-वे कई वाइल्‍डलाइफ सेंचुरीज से होकर गुजरता है। इसके निर्माण में वन्यजीवों के लिए ग्रीन ओवरपास की सुविधा दी जाएगी। इसके अंतर्गत आठ लेन की दो सुरंग बनाई जाएगी। इनमें से एक सुरंग पहले राजस्थान के मुकुंदरा सेंक्चुरी के नीचे से बनाई जा रही है, वहीं दूसरी सुरंग महाराष्ट्र के माथेरान ईको सेंसिटिव जोन में बनाई जाएगी। इसके साथ ही वन्यजीव अवाज़ से डिस्टर्ब न हों, इसके लिए साइलेंट कॉरिडोर भी बनाया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट में 12 लाख टन स्टील का इस्तेमाल होगा, जिससे 50 ब्रिज बनाए जा सकते हैं, तो वहीं 80 लाख टन सीमेंट की भी खपत होगी। इस एक्सप्रेस-वे के किनारे रिजॉर्ट्स, फूड कोर्ट्स, रेस्टोरेंट्स, फ्यूल स्टेशंस, लॉजिस्टिक पार्क जैसी सुविधाएं होंगी। पूरे एक्‍सप्रेस-वे पर कहीं भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं होगा, केवल एंट्री और एग्जिट पर हीं टोल टैक्स देना होगा। एक्सेस कंट्रोल, हाईवे होगा, यानी की हाइवे की बीच में एक तरफ से दूसरी तरफ कोई भी आ जा नहीं सकेगा। इस एक्‍सप्रेस-वे को बनाते वक़्त पर्यावरण का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा होने के बाद फ्यूल की खपत में 32 करोड़ लीटर की कमी आएगी। CO2 उत्सर्जन में 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी जो कि चार करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। हाइवे पर हर 500 मीटर पर रेन वॉटर हार्वेसटिंग सिस्टम होगा। एक्सप्रेसवे के किनारे 20 लाख पेड़ लगेंगे, जिससे पर्यावरण को फायदा होगा। इसके साथ ही इस एक्सप्रेसवे पर हैलीपैड भी बनाया जाएगा। कोई एक्सीडेंट होने पर हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सर्विस की सुविधा रहेगी, जिससे पीड़ितों को जल्द से जल्द निकाला जा सकेगा।

इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से सरकार को सालाना 1000 से 1500 करोड़ रूपए की कमाई होगी। इसके साथ ही अपने सपनों को अपने कन्धों पर ढ़ोने वाले लोग, अब पहले की तुलना में महज आधे समय में दिल्ली से मुंबई तक का सफर तय कर सकेंगे। इस एक्सप्रेसवे की मार्च 2023 तक बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है।

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