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भारत और ओलंपिक

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खेलों का कुंभ कहा जाने वाला ओलंपिक चार सालों पर आयोजित किया जाता है। इसकी शुरुआत 1896 में हुई थी। पहले ओलंपिक खेलों का आयोजन ग्रीस की राजधानी एथेंस (Athens) में किया गया था। तब इस में 14 टीमों ने हिस्सा लिया था। पहले ओलंपिक में कुल 43 तरह की प्रतियोगितायें हुई थी जिनमें कुल 241 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इस में भारत की ओर से कोई प्रतिभागिता नहीं थी।

ओलंपिक के शुरुआत के चार साल बाद 1900 में दूसरी बार ओलंपिक खेलों का आयोजन पेरिस में हुआ। 1900 में भारत ने पहली बार इन मुकाबलों में हिस्सा लिया था। भारत की ओर से एक अकेले खिलाड़ी नार्मन प्रिचर्ड (Norman Pritchard) ने इस ओलंपिक में भाग लिया था और उन्होंने 2 सिल्वर मेडल भी अपने नाम किये थे।

नार्मन एक ब्रिटिश-इंडियन अभिनेता और खिलाड़ी थे। ओलंपिक मेडल जीतने वाले वो पहले भारतीय के साथ-साथ पहले एशियाई भी थे। उन्होंने 200 मीटर हर्डल रेस (पुरुष) और 200 मीटर की ही रेस (पुरुष) में मेडल जीते थे। दोनों ही में उन्हें सिल्वर मेडल मिला था। हालांकि ओलंपिक के कई इतिहासकारों का कहना है कि नार्मन ने 1900 में द ग्रेट ब्रिटेन के लिए प्रतिस्पर्धा में भाग लिया था।

1900 के बाद 20 साल बाद लिया था भारत ने ओलंपिक में हिस्सा

1900 के बाद भारत ने 20 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद 1920 के ओलंपिक में अपनी टीम भेजी थी। उसके बाद से भारत हर समर ओलंपिक में हिस्सा लेता आ रहा है। 1920 समर ओलंपिक का आयोजन एंटवर्प (Antwerp), बेल्जियम में हुआ था। इस ओलंपिक में भारत ने अपनी टीम तो भेजी थी पर कोई मेडल भारत के हिस्से में नहीं आ सका था। गौरतलब है कि भारत की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का गठन 1927 तक नहीं हुआ था।

भारत को पुरुषों की फील्ड हॉकी में मिले हैं सबसे ज्यादा स्वर्ण


भारत 1920 से सभी गर्मी के (समर) ओलंपिक खेलों में भाग लेता आ रहा है। 1928 में, भारत की पहली हॉकी टीम ने ओलंपिक में प्रवेश किया और स्वर्ण पदक जीता था। यह पुरुषों की फील्ड हॉकी में भारत द्वारा जीते गए लगातार छह स्वर्ण पदकों में से पहला पदक था। भारत को लगातार 6 साल, 1928, 1932, 1936, 1948, 1952 और 1956 में पुरुषों की फील्ड हॉकी ने स्वर्ण दिलाया था।

ओलंपिक खेलों में भारत के जीते गए 28 पदकों में से ग्यारह उसकी हॉकी (क्षेत्र) टीम ने जीते हैं, जिसमें भारत के अब तक जीते गए नौ स्वर्ण पदकों में से आठ स्वर्ण इस खेल में आए हैं। दूसरा स्वर्ण अभिनव बिंद्रा ने 2008 में पुरुषों की एयर राइफल शूटिंग में जीता था। भारत ने 1964, 1968, 1988, 1992 में और 1998 के बाद से हर शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लिया है।
108 साल के बाद भारत में आये थे एक से अधिक ओलंपिक मेडल

1900 में 2 रजत पदक के बाद भारत की झोली में पूरे 108 साल बाद 2008 में बीजिंग ओलंपिक में 3 पदक आये। जिनमें 1 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक थे। पुरुषों की एयर राइफल शूटिंग में भारत के शूटर अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक जीता था वहीं कुश्ती में सुशील कुमार और मुक्केबाजी में विजेंद्र सिंह ने कांस्य पदक जीता था।

बीजिंग ओलंपिक में 302 प्रतिस्पर्धाओं के लिए कुल 204 टीमों ने हिस्सा लिया था। जिनमें कुल 10942 खिलाड़ी शामिल हुए थे। जिसमें सबसे ज्यादा 48 स्वर्ण पदक चीन ने जीते थे। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने कुल 112 मेडल जीते थे जिनमें 36 गोल्ड थे।

2008 ओलंपिक में भारत ने बनाई थी पदक जीतने वाले शीर्ष 50 देशों में जगह

साल 2004 में हुए एथेंस ओलंपिक में भारत पदक तालिका में 66वें स्थान पर था। एथेंस ओलंपिक में भारत को एकमात्र रजत पदक निशानेबाजी की स्पर्धा में राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने दिलाया था। 2008 ओलंपिक में 1 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक के साथ भारत ने पदक जीतने वाले शीर्ष 50 देशों की लिस्ट में जगह बना ली थी।

1980 के बाद भारत ने हॉकी में नहीं जीता कोई पदक

भारत ने आखिरी बार मास्को ओलंपिक (1980) में हॉकी (पुरुष) में स्वर्ण जीता था। 1980 के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 8 बार ओलंपिक में हिस्सा लिया पर वक बार भी पदक नहीं जीत पाए। एथेंस ओलंपिक (2004) में भारतीय हॉकी टीम (पुरुष) 7वें स्थान पर थी। वहीं भारत में राष्ट्रीय खेल का दर्जा पाने वाली हॉकी के लिए भारतीय टीम 2008 के ओलंपिक खेलों में क्वालीफाई भी नहीं कर पाई थी 2016 में भारतीय टीम (पुरुष) ने रियो ओलंपिक में 8वां स्थान प्राप्त किया था।

अगर बात करें महिला टीम की तो उन्होंने पहली बार 1980 में ओलंपिक में हिस्सा लिया था। यह ओलंपिक के इतिहास में पहली बार था जब महिलाओं के लिए प्रतिस्पर्धा आयोजित की गयी हो। मास्को ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चौथा स्थान प्राप्त किया था। दूसरी बार भारतीय महिला हॉकी टीम की भागीदारी रियो ओलंपिक (2016) में देखने को मिली। इस में उन्हें 12वां स्थान मिला था। टोक्यो ओलंपिक के लिए भारत की महिला और पुरूष दोनों ही हॉकी टीमों ने क्वालीफाई किया है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में होना था पर कोरोना महामारी की वजह से अब इसका आयोजन 2021 में किया जाना है।

भारत का अब तक का ओलंपिक में प्रदर्शन


1900 में पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने के बाद भारत 1920 से लगातार समर ओलंपिक में हिस्सा लेता आ रहा है। वही साल 1964, 1968, 1988, 1992 में और 1998 के बाद से हर शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत भाग लेता आ रहा है। भारत ने समर ओलंपिक में अब तक 28 मेडल जीते हैं जिसमें 9 स्वर्ण, 7 रजत और 12 कांस्य पदक हैं।

भारत के जीते 28 पदकों में सबसे ज्यादा हॉकी में 11 पदक हैं वहीं भारत ने सबसे ज्यादा लंदन ओलंपिक (2012) में 6 पदक जीते थे जिनमें 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज थे। भारत ने 2012 में कोई स्वर्ण पदक नहीं जीता था।

1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964, 1980 और 2008 में भारत ने एक-एक स्वर्ण पदक जीता है। जिसमें केवल 2008 में भारत ने शूटिंग में स्वर्ण पाया था बाकी के सभी साल भारत को स्वर्ण पुरूष हॉकी ने दिलाये हैं।

टोक्यो ओलंपिक में भारत की भागीदारी

टोक्यो ओलंपिक (2020-21) के लिए अब तक भारत के 70 से ज्यादा खिलाड़ी चुने जा चुके हैं। जिनमें तीरंदाजी में 4, एथलेटिक्स में 11, बॉक्सिंग में 9, शूटिंग में 15, टेबल टेनिस में 4 और कुश्ती में 8 खिलाड़ी चुने गए हैं। वहीं फील्ड हॉकी के लिए भारत की महिला और पुरुष दोनों ही टीमों ने क्वालीफाई किया है।
भारत की ओर से पिछले 20 सालों में घुड़सवारी के लिय ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाले फवाद मिर्ज़ा पहले खिलाड़ी है। साथ हीं फेंसिंग के लिए क्वालीफाई करने वाली भवानी देवी पहली भारतीय महिला बनी हैं। प्रणति नायक ने टोक्यो ओलंपिक में जिमनास्टिक्स के लिए क्वालीफाई किया है। इस कैटेगरी में क्वालीफाई करने वाली वो दूसरी भारतीय हैं।