देश फुल वॉल्यूम 360°

जागरूकता का पैमाना सबको है अपनाना

aids day
Spread It

पूरे विश्व में प्रतिवर्ष “World AIDS Day” 1 दिसम्बर को लोगों को एड्स के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है। World AIDS Day मनाने का उद्देश्य HIV संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में हर उम्र के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। Human Immunodeficiency Viruses (HIV) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी के कारण AIDS होता है।

विश्व एड्स दिवस पहली बार 1987 में जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेट्टर द्वारा मनाया गया था, वे जिनेवा, स्विटज़रलैंड में विश्व स्वास्थ्य संगठन में एड्स पर वैश्विक कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने डॉ जोनाथन मान,एड्स पर वैश्विक कार्यक्रम के निदेशक के सामने अपने विचार रखे। यह सुनने के बाद, डॉ मान इस विचार से प्रभावित हुए और उन्होंने इसे मंजूरी दे दी और इस तरह 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाने लगा।

विश्व एड्स दिवस 2020 का थीम “Ending the HIV/AIDS epidemic: resilience and impact” है। 2030 तक इसे प्राप्त करने की विधि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि लाइफ-सेविंग एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी उन सभी तक पहुंचे जो संक्रमित हैं और एचआईवी के साथ रहने वाले सभी व्यक्ति अपनी स्थिति को जाने। WHO ने सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरुआत अगस्त 1987 में की थी।

यह महामारी रोग HIV टिशू में पाया जाता है और जो रक्त, सेमेन, स्तन के दूध आदि के माध्यम से फैलता है। यह रोग एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज  है और यह रक्त ट्रांसमिशन और अन्य चीजों के माध्यम से भी ट्रांसमिट हो सकता है। एचआईवी के कई लक्षण हैं और उनमें से कुछ में जोड़ों का दर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, वजन में कमी, कमजोरी, अन्य शामिल हैं।

1959 में अफ्रीका के कॉन्गो में एड्स का पहला मामला सामने आया था, जिसमें कि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जब उसके रक्त की जांच की गई तो पुष्टि हुई कि उसे एड्स है। एड्स आज के आधुनिक समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान की संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इतने सालों बाद भी अबतक एड्स का कोई प्रभावी इलाज नहीं है।

Add Comment

Click here to post a comment

Featured