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खत्म हुआ इंतजार, अब निर्मली से सरायगढ़ की दूरी 298 किलोमीटर से घटकर 22 किलोमीटर हुई

koshi maha setu
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कोसी के इलाके के लोगों का 86 साल का इंतजार पूरा हो गया। 2003 में जिस कोसी महासेतु की आधारशिला अटल बिहारी वाजपेयी जी ने रखी थी, उस पुल का उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। पुल बनाने में 17 साल लग गए। इसके साथ ही पीएम ने समस्तीपुर मंडल के मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी, समस्तीपुर-दरभंगा-जयनगर, समस्तीपुर-खगड़िया खंडों के रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।

इस महासेतु के बनने से सीमांचल और मिथिलांचल के 9 जिले (दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) के लोगों को सहूलियत मिली है। पहले निर्मली से सरायगढ़ तक का सफर दरभंगा-समस्तीपुर-खगड़िया-मानसी-सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर का है। महासेतु के निर्माण से यह दूरी मात्र 22 किलोमीटर में सिमट गई।

1887 में निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज लिंक बनाया गया था। यह लिंक 1934 में विनाशकारी आपदा की वजह से तबाह हो गया था। इसके बाद कोसी और मिथिलांचल में दूरी बढ़ गई थी। 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला रखी थी। जिसके बाद से इस सेतु के चालू होने का इंतजार हो रहा था। 1.9 किलोमीटर लंबे कोसी रेल महासेतु को बनाने में 516 करोड़ रुपए की लागत आई।

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