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किसानों के फायदे के लिए भारत में दूसरा सबसे बड़ा Gene bank, PGR एप किया गया लॉन्च

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एक समय था जब बरसात के दिनों में पत्तों और बांस की कमची से बनी टाट से शरीर को ढककर किसान कृषि संबंधी कार्य करते थे। कृषि में सुविधाओं का काफी अभाव था, बीजों के संरक्षण की कोई सुविधा नहीं थी और हर तरह का कृषि संबंधी कार्य मानवीय शारीरिक श्रम से किया जाता था। फिर धीरे धीरे कृषि में वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी ने दस्तक दी और किसानों के सर से भार थोड़ा कम हुआ। इसी भार को कम करने के लिए सरकार की तरफ से तमाम तरह के प्रयास किए जाते रहे हैं। हाल ही में देश में लॉन्च हुआ सीड जीन बैंक (Gene bank) इस दिशा में एक बड़ी पहल है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने पूसा परिसर में नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सिज (NBPGR) में राष्ट्रीय जीन बैंक को लॉन्च किया है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जीन बैंक है।

लगभग 22 करोड़ के निवेश से बनाये गए इस जीन बैंक को आने वाले समय में बीजों को किस तरह से संरक्षित रखा जाए, इसको ध्यान में रखते हुए लॉन्च किया गया है। लॉन्चिंग के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कहते हैं कि कृषि क्षेत्र के समक्ष जो चुनौतियां हैं उन्हें स्वीकार करते हुए उन पर विजयी प्राप्त करने में भारत के किसान पूरी तरह सक्षम हैं, हमारे किसान बिना किसी बड़ी शैक्षणिक डिग्री के भी कुशल मानव संसाधन है।

किसानों को क्या फायदा है ?

दरअसल, भीषण प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप, सुनामी या युद्ध जैसी मानवजनित आपदाओं से धरती की बहुमूल्य जैव संपदा पूरी तरह नष्ट न हो, इसके लिए जीन या सीड बैंक बनाएं जाते हैं। इसमें दुर्लभ या लुप्तप्राय प्रजातियों व ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व वाली प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए बीजों या जीवों के जीन को इन जीन बैंकों में रखा जाता है। इनका ये फायदा होता है कि किसी आपदा की स्थिति में इन जीन्स या बीजों से संबंधित प्रजाति को फिर से पैदा किया जा सकता है।

केंद्र द्वारा शुरू किये गए इस बीज बैंक बनाने के पीछे किसानों को मुश्किल समय में फायदा पहुंचाना है। प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा आदि जैसी आकस्मिक स्थितियों के दौरान लघुकालिक और मध्यकालिक फसल किस्मों के बीजों की आपूर्ति करने में यह मदद करेगा।

पीजीआर एप किया गया लॉन्च

किसानों की सहूलियत के लिए पीजीआर मैप (PGRMap) नामक एक एप भी लॉन्च किया गया है। जिसके माध्यम से कोई भी किसान अपने आस पास वन्य अनुवांशिक संसाधनों के पाए जाने के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसमें लाभार्थी को 3,50,000 परिग्रहणों की जानकारी मिल सकेगी।

हमें अक्सर सलाह दी जाती है कि गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लो, वर्तमान को पढ़ो और उसके परिपेक्ष्य में भविष्य को गढ़ने के लिए काम करो। फिर वह देश हो, समाज हो, इंसान हो, पशु हो या किसी प्रकार का बीज हो। सबके लिए यही धारणा लागू होती है। और देश में बनाये गए ये सीड बैंक भी इसी का उदाहरण हैं, जो मुश्किल समय में किसानों की मदद करेंगे।