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Automatic Coach Washing Plant : अब इस नए आधुनिक तरीके से होगी Train की सफाई, बचेगा 80 प्रतिशत पानी

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धरती का 3\4 हिस्सा पानी है फिर भी देश सहित दुनियाभर में पानी की कमी बनी ही रहती है। पानी, पिने के साथ साथ कई तरह से उपयोग में आता है। जिसमें हर दिन कई लाख करोड़ लीटर पानी बर्बाद भी होता है। इसी को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने बिहार के जयनगर में Automatic Coach Washing Plant लगाया गया है। इस प्लांट के लगने से प्रति दिन लगभग 80% पानी की बचत होगी।

इस Automatic Coach Washing Plant की ख़ासियत :

पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर जोन का पहला Automatic Coach Washing Plant सहरसा और जयनगर में बनने वाला था। जिसे समस्तीपुर मंडल प्रशासन द्वारा प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया था, जिसे इसी महीने की शुरुआत में मंजूरी मिल गयी थी। रेलवे बोर्ड से इसके लिए टेंडर निकाला गया था। और अब यह जयनगर रेलवे स्टेशन पर बन कर तैयार हो गया है। ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने के लिए रेल प्रशासन ने जगह भी चिन्हित कर लिया था। जिसे जयनगर में वाशिंग पिट परिसर में ही प्लांट को स्थापित किया गया है।

एक प्लांट के निर्माण पर लगभग सवा दो करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस प्लांट के लगने से महज 10 मिनट के अंदर ट्रेनों के सभी 24 कोचों की बाहरी हिस्से की धुलाई और सफाई हो जाती है। इस प्लांट में एक दिन में 11 ट्रेन की 250 से अधिक कोचों की धुलाई और सफाई होगी। मैन्युअली तरीके से एक बार में 24 कोचों की धुलाई और सफाई में लगभग सवा घंटे की बचत होगी।

इस आधुनिक प्लान्ट से बहुत ही कम समय में उच्च गुणवत्ता वाली सफाई होगी, साथ ही लगभग 80% पानी की बचत भी होगी। क्यूंकि मशीन से धुलाई और सफाई में इस्तेमाल होने वाले 80 प्रतिशत पानी रिसाइकिल होगी। जिसे दोबारा उपयोग में लाकर दूसरे रैंक की धुलाई व सफाई की जाएगी। कोच की धुलाई में कम मात्रा में पानी, साबुन और कीटाणुनाशकों का उपयोग होगा, जो पर्यावरण के अनुकूल होगा। ट्रेन भी समय से अपने गंतव्य स्थान के लिए खुल पाएगी। प्लांट के लगने से ट्रेनों के रंग भी काफी समय तक बनने रहेंगे और सुन्दर दिखेंगे।

प्लांट लगने से पहले मैन्युअल तरीके से 22 से 24 कोचों की धुलाई व सफाई में तकरीबन 12000 से 14000 लीटर पानी का उपयोग किया जाता था। लेकिन ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट में मशीन के जरिए 22 से 24 कोचों की धुलाई व सफाई में मात्र 6000 लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी। इसमें से 4000 लीटर पानी को रिसाइकिल किया जा सकेगा। और अगर इसे जोड़ा जाये तो प्लांट चालू होने से हर रोज 1 लाख 24 हजार लीटर पानी और हर साल 453 लाख लीटर पानी बचेगा। ​