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अब रेशम उत्पादन में भारत बनेगा आत्मनिर्भर

smriti-irani
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भारत आत्मनिर्भरता की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। हाल हीं में, Ministry of Textiles और Ministry of Agriculture ने देश में सेरीकल्चर गतिविधियों को बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया। इसके तहत भारत अगले दो वर्षों में रेशम उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जायेगा। इस समझौता ज्ञापन को Textiles Minister स्मृति ईरानी और Minister of State for Agriculture परषोत्तम रूपाला की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया।

यह समझौता ज्ञापन, कृषि विज्ञान केंद्रों में वृक्ष आधारित एग्रो-फॉरेस्ट्री मॉडल स्थापित करने और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से गतिविधियों की संभावनाओं को तलाशने पर केंद्रित होगा। यह प्रशिक्षण भी बढ़ाएगा, टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देगा और रेशम किसानों या पालनकर्ताओं के लिए स्थायी आजीविका का निर्माण करेगा।

पिछले छह वर्षों में भारत के कच्चे रेशम उत्पादन में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में 90 लाख लोग इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से कृषि आय 20 से 30 प्रतिशत बढ़ जाएगी। रेशम एक प्रकार का महीन, चमकीला रेशा है, जिससे कपड़े बुने जाते हैं। ये रेशे कुछ कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाये जाते है।

ईरानी ने अस्वच्छ और अप्रचलित जांघ रीलिंग प्रथा को मिटाने के उद्देश्य से महिला रेशम रीलर्स को Buniyaad Reeling Machines वितरित कीं। Buniyaad मशीन उपलब्ध कराने के लिए 8,000 महिला जांघ रीलर्स की पहचान की गई है और Silk Samagra Phase I के तहत 5,000 महिलाओं को पहले ही समर्थन दिया जा चुका है।

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