देश फुल वॉल्यूम 360°

शीतलता की छांव लिए तरुण चलें स्वर्ग की ओर

tarun gogoi
Spread It

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का 23 नवंबर, सोमवार को निधन हो गया। वह हफ्तों तक अस्पताल में पोस्ट-कोविड जटिलताओं के साथ अपने जीवन के लिए जूझ रहे थे। उनकी मृत्यु कई अंग की विफलता के कारण हुई। वह असम के तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री और दशकों तक राज्य में कांग्रेस का चेहरा रहे। वह 86 वर्ष के थे और राजनीति में बहुत सक्रिय थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर तरूण गोगोई के साथ अपनी एक तस्वीर को साझा करते हुए ट्वीट किया है, “श्री तरुण गोगोई जी एक लोकप्रिय नेता और एक अनुभवी प्रशासक थे, जिन्हें असम के साथ-साथ केंद्र में भी राजनीतिक अनुभव था। उनके निधन से मैं बहुत दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी सहानुभूति उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति।“

गोगोई, 25 अगस्त को कोरोनोवायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए थे और उन्हें अगले दिन गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह कोविड -19 से उबर गए थे और दो महीने बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन पोस्ट-कोविड जटिलताओं के कारण, उन्हें 2 नवंबर को फिर से भर्ती होना पड़ा था, और नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन पर रखा गया था।

मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, उन्हें राज्य की राजकोषीय स्थिति में सुधार के अलावा उग्रवादी विरोध को समाप्त करने और हिंसा को कम करने का श्रेय दिया जाता है। असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की, जिसके दौरान गोगोई के पार्थिव शरीर को अंतिम सम्मान देने के लिए गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में रखा जाएगा। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार 26 नवंबर को होगा।

राजनीति सफर

-तरुण गोगोई पहली बार 1968 में जोरहाट के म्युनिसिपल बोर्ड के सदस्य चुने गए।

-गोगोई 6 बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुके हैं। साल 1971 से 85 तक वह जोरहाट लोकसभा सीट से जीते। इसके बाद 1991 से 96 और 1998-2002 तक उन्होंने कलियाबोर सीट का प्रतिनिधित्व किया। फिलहाल इस सीट से उनके बेटे गौरव गोगोई सांसद हैं।

-तरुण गोगोई का कद उस वक्त बढ़ा जब साल 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अगुआई में वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के जॉइंट सेक्रेटरी चुने गए। साल 1985 से 1990 तक वह पार्टी के महासचिव भी रहे। तब प्रधानमंत्री राजीव गांधी थें। जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने उनकी कैबिनेट में (1991-96) खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री का कार्यभार संभाला।

-वह 1986 से 90 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहें। इसके बाद 1996 में वह दोबारा इस पद के लिए चुने गए।

-गोगोई चार बार विधायक भी रहे। उन्होंने सबसे पहले मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से (1996-98) जीत हासिल की। इसके बाद 2001 से वह तिताबर विधानसभा सीट से चुने जाते रहे।

-साल 2001 में हुए विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की तो तरुण गोगोई को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद रिकॉर्ड तीन बार वह लगातार सीएम चुने गए।

-लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। असम की 14 लोकसभा सीट से कांग्रेस कुल 3 ही जीत पाई. जबकि बीजेपी ने 7 सीटें जीतीं, जो असम से किसी भी पार्टी द्वारा लोकसभा चुनाव में जीती गईं सबसे ज्यादा सीटें हैं।

-चुनाव से पहले गोगोई ने ऐलान किया था कि अगर कांग्रेस 14 सीटों में से 7 पर जीत हासिल नहीं कर पाई तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जुलाई 2014 में उन्होंने संकेत दे दिया था कि वह 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।