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रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने स्‍वदेशी मल्‍टी मोड ग्रेनेड को किया सेना के हवाले, जानें इसकी खासियत

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देश में पहली बार किसी प्राईवेट कंपनी ने सेना के लिए गोला-बारूद बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने नागपुर की एक प्राईवेट कंपनी द्वारा DRDO की मदद से तैयार किए एक लाख हैंड-ग्रेनेड थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे को सौंपे। मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड प्रथम विश्व-युद्ध के उन ग्रेनेड्स की जगह लेंगे जो भारतीय सेना अभी तक इस्तेमाल करती आई थी।

मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड की ख़ास बातें

  • यह ग्रेनेड न सिर्फ बेहद घातक है बल्कि इस्तेमाल करने के लिहाज से सुरक्षित और विश्वसनीय भी है।
  • यह ग्रेनेड ऑफेंसिव और डिफेंसिव दोनों तरीकों से काम करता है।
  • इसकी सटीकता 99 फीसद से अधिक है।
  • मार्च 2021 में मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड के प्रोडक्शन की मंजूरी मिली थी।
  • पांच महीने के भीतर-भीतर 1 लाख से अधिक मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड बनाए गए हैं।
  • इन आधुनिक हैंड ग्रेनेड्स का डिजाइन डीआरडीओ की टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लैब ने तैयार किया है।

बल्क प्रोडक्शन से पहले थलसेना ने ईईएल कंपनी के हैंड ग्रेनेड्स के पिछले तीन-चार सालों के दौरान कई बार ट्रायल किए थे। ये ट्रायल मैदानी इलाकों में, रेगिस्तान में, पहाड़ों पर गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में किए गए थे। ट्रायल सफल होने के बाद ही कंपनी को मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड बनाने का मौका दिया गया था।