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अब देवभूमि की सड़कों पे फर्राटे से दौड़ेंगी गाड़िया, देखें पूरी रिपोर्ट

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गंगा और यमुना का उद्गम स्थल देवभूमि उत्तराखंड (uttrakhand), यहां समय समय पर देवी देवताओं ने अवतार लिया है। इसी पवित्र स्थल के हिम शिखरों पर चार धाम, केदारनाथ (Kedarnath), बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री बसी हुई है। उत्तराखंड राज्य के हिम शिखरों पर बसे चार धामों के मार्गो ने कई दुर्घटनाओं से गुजरते हुए पगडंडियों से सड़कों तक का सफर तय किया है।

प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थयात्री और देशी-विदेशी पर्यटक चार धाम एवं सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी और औली में एडवेंचर खेलों के लिए उत्तराखंड की यात्रा करते हैं। इस यात्रा में यात्रियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब, देश में उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अच्छी खबर है।

सभी मौसम में यह यात्रा सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए परिवहन मंत्रालय द्वारा 12,000 करोड़ रुपए की लागत से चार धाम महामार्ग विकास परियोजना की आधारशिला रखी गयी।  इस प्रोजेक्ट के तहत चार धाम नेशनल हाईवे, एक under construction two-lane express National Highway होगी। इस परियोजना में 900 किलोमीटर National Highway शामिल हैं जो पूरे उत्तराखंड राज्य को जोड़ेगा। इस परियोजना में कई सारे बाईपास, पुल, पार्किंग,हेलीपैड्स, और helicopter emergency response services, आदि भी होंगे।

इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2016 को देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा रखी गई थी। इस परियोजना के तहत लगभग 554 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण,  utility duct का निर्माण, साथ हीं क्रैश बैरियर लगाने का काम भी पूरा हो चुका है।

एनएच 94 यानी की ऋषिकेश से धारासू सेक्शन में चम्बा टनल को बना लिया गया है। इस परियोजना में 53 पैकेज हैं, जिसमे से कई पैकेज पर काम चल रहा है, जबकि कुछ पैकेज under process हैं।

इस पूरे प्रोजेक्ट को 7 सेक्शन में डिवाइड करके काम किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत होती है ऋषिकेश से। आईये चलते हैं और जानते हैं इन सातों सेक्शन के बारे में।

  • इसका पहला सेक्शन है ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग, जिसकी टोटल लम्बाई 140 किलोमीटर, जिसमे 2166 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 58 का विकास किया जायेगा।
  • दूसरा सेक्शन है रुद्रप्रयाग से बद्रीनाथ, बद्रीनाथ यानि माना तक nh-58 को upgrade किया जायेगा, जिसकी  कुल लम्बाई होगी 160 किलोमीटर है इसमें 1542 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • तीसरा सेक्शन है रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड, यानि की केदारनाथ, जिसकी टोटल लम्बाई 76 किलोमीटर है और इस प्रोजेक्ट में 1106 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें एनएच 109 को अपग्रेड किया जायेगा।
  • इस प्रोजेक्ट का चौथा सेक्शन है ऋषिकेश से धारासू , जिसमे  एनएच 94 का विकास होगा। इसकी कुल लम्बाई 144 किलोमीटर होगी  जिसमे 1627.50 करोड रुपए खर्च होंगे।
  • पांचवां सेक्शन है धारासू से यमुनोत्री, जिसकी टोटल लम्बाई 95 किलोमीटर है। और इसमें 1920 करोड रुपए की लागत से एनएच 94 का विकास होगा।
  • छठा सेक्शन है धारासू से गंगोत्री, जिसमे 124 किलोमीटर  की लम्बाई के साथ  एनएच 108 का विकास 2079 करोड रुपए की लागत से होगा।
  • इस प्रोजेक्ट का लास्ट सेक्शन है टनकपुर से पिथौरागढ़। इसकी टोटल लम्बाई 148 किलोमीटर है और इसमें 1557 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 125 का विकास किया जायेगा ।
  • इस प्रोजेक्ट में टोटल 132 पूल बनाये जायेंगे जिसमे से 25 मेगा bridges होंगे जो हाई फ्लड लेवल को झेल सकती है।
  • इसके अलावा 3889 छोटे छोटे पुलिया बनाये जायेंगे साथ हीं जगह-जगह रिवर प्रोटक्शन वॉल भी बनाया जायेगा जो राजमार्गों की सुरक्षा का हल बनेगी।
  • 13 बाईपास कई शहरों को ट्राफिक फ्री बना देगी। जहाँ जहाँ landslide का खतरा है वहां स्टील जाली, soil nailing, Gavin wall, square Mesh vegetation, geo synthetic ट्रीटमेंट की आधुनिक तकनीक का उपयोग करके landslide को रोका जायेगा।
  • चार धाम यात्रा सभी मौसमों में सुगम एवं आनंदमई बनाने के लिए 18 जगहों पर road site amenities बनाये जायेंगे, जहां पर food plaza,restaurants और dormateries जैसे फैसिलिटीज available होंगे।

इसके अलावा  145 bus और 9 ट्रक ways भी विकसित होंगे जो क्षेत्र के व्यवसाय उन्नति में अहम भूमिका निभाएंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत चार बड़े पुल का निर्माण होगा, जिसमें marine point sone viaduct तथा सोन गंगा अलकनंदा नदी के पानी से सोन गंगा की 775 मीटर लंबी माउंटेन बायोडाटा राजमार्ग को 25 मीटर ऊंचा पहुंचा देगी। दो महत्वपूर्ण टनल और जगह-जगह emergency laybays भी विकसित की जायेगी।

चार धाम क्षेत्र की नदियां और हिमगिरी का पानी सड़कों की बर्बादी में अहम भूमिका निभाते हैं। बारिश के दिनों में यह यात्राएं और भी दुर्गम और दुष्ट हो जाती है। इस यात्रा में लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस परियोजना से, सभी मौसमों में यहाँ की यात्रा सुगम एवं आनंदमई हो जाएगी। साथ हीं इस प्रोजेक्ट से इंडिया चाइना बॉर्डर एरिया में भी सिक्योरिटी मिलेगी क्यूंकि बॉर्डर एरिया तक डायरेक्ट कनेक्टिविटी होगी।

वर्ष 2022 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। चारधाम राजमार्ग विकास परियोजना उत्तराखंड राज्य की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति तथा पहाड़ी क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इसके पूरा होते हीं पर्यटक चौबीसों घंटे इन स्थानों की यात्रा कर सकेंगे।