फुल वॉल्यूम 360° देश

कृषि को Digital India से जोड़ने की दिशा में सरकार की नई पहल

आत्मनिर्भर-कृषि-app
Spread It

सरकार के विभिन्न विभागों के पास ऐसी कई जानकारियों का भंडार है जो किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती हैं। इनके साथ समस्या बस यह है ये जानकारियां विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है जो किसानों के हित के लिए तो हैं लेकिन ये उनको आसानी से समझ में नहीं आती है। इस कमी को दूर करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के अंग ‘किसान मित्र’ ने ली है। इसके तहत वह विभिन्न मंत्रालयों /विभागों जैसे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र (NWIC) के डेटा को आत्मनिर्भर कृषि एप पर एकत्र कर रहा है जो कि किसानों के लिए उपलब्ध होगा।

देगा मौसम और मिट्टी की जानकारी

आत्मनिर्भर कृषि एप को किसानों को कृषि संबंधित बारीक से बारीक जानकारी उपलब्ध कराने और मौसम संबंधी जानकारी व अलर्ट सुविधा देने के लिए बनाया गया है। इसके जरिए किसानों को मिट्टी के प्रकार, मिट्टी की सेहत, नमी, मौसम और पानी उपलब्धता से संबंधित आंकड़ों को एकत्र किया गया है और कृषि-जोत स्तर पर प्रत्येक किसान के लिए फसल चयन, उर्वरक आवश्यकताओं और पानी की जरूरत संबंधित जानकारियों का विश्लेषण भी एप पर किया गया है। फसलों की रोपाई और बुवाई के लिए मौसम की जानकारी काफी अहम होती है। खेती-बाड़ी में लगे किसानों के लिए मौसम का हाल जानना जरूरी है वरना उनकी फसल और उपज को नुकसान पहुंच सकता है। पहले मिल गई जानकारी से वे तैयार पैदावार से लेकर खेत में लगी फसलों के लिए पूर्व में ही व्यवस्था कर लेते हैं।

पांच चरणों में की गई है परिकल्पना

इस एप की परिकल्पना 5 चरणों में की गई है:

  1. आंकड़ों का एकत्रीकरण
  2. केंद्रीकृत दृष्टिकोण का निर्माण
  3. स्थानीय विशेषज्ञता (केवीके) समर्थित संवाद और दृष्टिकोण को विकसित करना
  4. मशीन लर्निंग इनफेरेनसेंस का लाभ उठाना
  5. निरंतर सुधार

इसके जरिए किसानों के पास होगी साक्ष्य-आधारित जानकारी

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने एप लॉन्च के मौके पर कहा, “भारत सरकार ने स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, बाजार और आपूर्ति श्रृंखला को सहयोग करने, महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले दो प्रमुख वर्ग किसान और प्रवासी श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए एक मजबूत प्रणाली के लिए निर्बाध रूप से काम किया है। किसान मित्र की पहल से आत्मनिर्भर कृषि एप के जरिए किसानों के पास आईएमडी, इसरो, आईसीएआर और सीजीडब्ल्यूए जैसे हमारे शोध संगठनों द्वारा उत्पन्न साक्ष्य-आधारित जानकारी होगी।”

उन्होंने कहा कि यह जानकारी (किसानों द्वारा फसल पैटर्न, छोटे किसानों की जोत के मशीनीकरण या पराली जलाने संबंधी निर्णय लेने के लिए उपयोग किए जाने की स्थिति में) सुनिश्चित करेगी कि सभी निर्णय, पानी एवं पर्यावरण के स्थायित्व की महत्ता व संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को ध्यान में रखकर लिए जाए। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए बेसिक फोन पर आसान भाषा में जानकारी के साथ उपलब्ध एप, फैसले लेने की प्रक्रिया के दौरान समावेशिता को भी बढ़ाएगा।

12 भाषाओं में है उपलब्ध

यह एप 12 भाषाओं में उपलब्ध हैं। इस एप की कई विशेषताएं है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं:

  1. भाषा को सरल बनाकर आंकड़ों को किसानों के लिए आसान बनाना
  2. एप के एंड्रॉइड और विंडोज संस्करण गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं और किसान, स्टार्ट-अप, केवीके, एसएचजी या एनजीओ इसका निःशुल्क इस्तेमाल कर सकेंगे।
  3. देश के दूर-दराज के इलाकों में कनेक्टिविटी के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, एप को न्यूनतम बैंडविड्थ पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  4. एप किसान से किसी तरह की जानकारी एकत्रित नहीं करता है। यह जरूरी आंकड़े (आंकड़ा देखें) प्रदान करने के लिए खेत की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर है। किसी स्थान से संबंधित आंकड़े उस क्षेत्र का पिनकोड दर्ज करके एकत्र किया जा सकेगा।

इफको के एमडी और सीईओ ने की प्रशंसा

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFCo) के एमडी और सीईओ डॉ. यूएस अवस्थी ने एप की प्रशंसा करते हुए कहा “आत्मनिर्भर कृषि एप भारत सरकार की एक बेहतरीन पहल है जो किसानों को डिजिटल रूप में उपयोगी और सही जानकारी प्रदान करता है।” वहीं इंडियन सेंटर फॉर सोशल ट्रांसफॉर्मेशन के फाउंडर ट्रस्टी राजा सीवान ने कहा,“भारतीय सीएसटी देश में डिजिटल परिवर्तन में अपनी भूमिका निभाने और सीएसआईआर 4 पैरडाइम इंस्टीट्यूट (CSIR 4PI), बेंगलुरु में स्थित राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से उत्कृष्टता की संस्कृति का प्रसार करने के लिए खुश है।”

किसानों की सहायता के लिए हैं और भी कई एप

इसके अलावा किसानों की सहायता के लिए और भी कई एप हैं। इनमें से एक किसान योजना एप है। इस कृषि मोबाइल एप के जरिए किसान सरकारी योजनाओं संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस पर राज्य की योजनाओं के विषय में बताया जाता है। इस एप की मदद से किसानों को सरकारी योजना की जानकारी लेने के लिए इधर-उधर भागना नहीं पड़ता है और इससे समय की भी बचत होती है।

वहीं पिछले साल 26 नवंबर को देशी दुधारू मवेशियों की गुणवत्ता में सुधार के लिए आईसीएसटी का प्लेटफॉर्म, ई-पशुहाट लॉन्च किया गया। एम किसान ऍप्लिकेशन सी डैक पुणे की मदद से कृषि एवं सहकारिता विभाग की आईटी टीम द्वारा विकसित किया गया है I इसका उपयोग mKisan पोर्टल पर पंजीकरण के बिना भी विभिन्न स्तरों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों द्वारा भेजे जा रहे परामर्श और सूचना प्राप्त करने के लिए किसानों और अन्य सभी हित धारकों द्वारा किया जा सकता है I एग्री पोर्टल एप्लिकेशन के जरिए भारत के कृषि व्यापारी और किसान बिना किसी शुल्क के अपने मोबाइल के माध्यम से नवीनतम मूल्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं I

भारत सरकार कृषि जगत को डिजिटल इंडिया से जोड़ने की कर रही है पूरी कोशिश

1 जुलाई को भारत के डिजिटल इंडिया पहल को 6 साल पूरे हो गए हैं I इन 6 सालों के दौरान भारत सरकार ने कृषि जगत को इस मुहिम से जोड़ने की पूरी कोशिश की है I इसका एक बेहतरीन उदहारण सरकार द्वारा लॉन्च किया गया राष्ट्रीय कृषि बाजार(e NAM) है। यह एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जो मौजूदा एपीएमसी मंडियों के नेटवर्क से कृषि संबंधित उपायों के लिए राष्ट्रीय बाजार के रूप में बनाया गया था। ई-नाम का कवरेज आज बढ़कर 1 हजार एपीएमसी बाजारों और एफपीओ (फार्मर ऑर्गनाईजेशन) के संग्रह पॉइंट तक पहुंचा है।

लॉजिस्टिक सेवाओं तक डिजिटल पहुंच में सुधार के लिए ‘किसान रथ’ मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया। इस एप पर 30 अप्रैल तक 1,73,13,301 सेवा प्रदाता, व्यापारी, एफपीओ किसान और कमीशन एजेंट रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इसके माध्यम से देशभर के किसान पूरे देश में अपने कृषि उत्पादों को खरीद-बेच सकते हैं।

भारत की योजनाएं बनाएंगी भारत को आत्मनिर्भर

भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारे देश की लगभग 70% आबादी किसान हैं। वे भारत के लिए रीढ़ की हड्डी के समान हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 10.07 करोड़ परिवार खेती पर निर्भर हैं। यह संख्या देश के कुल परिवारों का 48 फीसदी है। ये किसान ही हैं जिनकी वजह से आज देश खाद्यान्न उत्पादन में बहुत जल्द आत्मनिर्भर बनने जा रहा है। सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की है। इनमे से पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और ई-नाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रमुख हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ समय से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है और इन योजनाओं की मदद से जल्द ही भारत विश्व में कृषि उत्पादन में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन जाएगा।

Add Comment

Click here to post a comment