फुल वॉल्यूम 360° खेल

‘Golfer Aditi Ashok’ : Olympic में हार कर भी Aditi ने रचा इतिहास

aditi-ashok
Spread It

Olympic खेलों में ऐसे कई सारे सेक्शंस हैं जिसमें भारत आज तक खेला ही नहीं है और कुछ सेक्शंस ऐसे हैं जिसमें खेलने के बाद भी आज तक मेडल नहीं जीता है। उन्हीं खेलों में से एक है Golf . ऐसे तो इंडिया में गोल्फ को अमीरों का खेल कहा जाता है। क्यूंकि बॉलीवुड की फिल्मों में अमीरों को ही इसे खेलते दिखाया जाता है। लेकिन हर खेल की तरह इस खेल में भी लगन, जूनून और हुनर की हीं जरूरत होती है। जापान की राजधानी Tokyo में Tokyo Olympic 2020 खेले गये। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ी अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ इतिहास रच रहें हैं तो कुछ हार कर भी दिल जीत रहे हैं। इन्हीं में से एक है अदिति अशोक (Aditi Ashok)। Aditi ने Olympic खेलों में हार कर भी इतिहास रच दिया है। 23 साल की इस Golfer ने Tokyo Olympic में अपने खेल में हार कर भी सबकी तालियां बटोरी है।


भारतीय गोल्फर Aditi Ashok, Tokyo Olympics में भले ही मेडल ना जीत पाई हों, लेकिन सभी का दिल जरूर जीता है। Aditi ने आखिरी होल्स में मेडल गंवा दिया। Olympic में 13वें होल तक Aditi दूसरे स्थान पर चल रही थीं लेकिन आखिरी पांच होल में वह Japan की मोने इनामी और New Zeeland की लीडिया से पिछड़ गईं। और चौथे राउंड में अदिति ने तीन, अंडर 68 का कार्ड खेला। मुकाबले में Aditi 15 अंडर 269 स्कोर के साथ 4th no. पर रहीं। इन सब के बावजूद Rio Olympic में 41वें स्थान पर रही Aditi ने Tokyo Olympic में यादगार प्रदर्शन किया।


5 साल की उम्र से Golf खेलने वाली बेंगलुरु की Aditi भारत की सर्वश्रेष्ठ Women Golfer कही जा सकती है। वे यूरोपियन टूर जीतने वाली 1st Women Golfer हैं। Olympic में Golf की शुरुआत साल 1900 के पेरिस खेलों में हुआ था। ये खेल Olympic के अगले संस्करण का भी हिस्सा रहा। लेकिन इसके बाद ओलंपिक में यह खेल नहीं दिखा। आखिरकार 112 सालों के बाद 2016 के Rio Olympic में गोल्फ की वापसी हुई। भारत की तरफ से Rio ओलंपिक में शिव चौरसिया, अनिर्वण लाहिड़ी और अदिति अशोक ने डेब्यू किया। टोक्यो ओलंपिक में अदिति के अलावा तीन और गोल्फरों अनिर्बान लाहिड़ी, उदयन माने और दीक्षा डागर को मौका मिला।


29 मार्च 1998 को बेंगलुरु के एक Middle Class Family में जन्मीं गोल्फर अदिति अशोक ने महज 5 साल की उम्र में गोल्फ खेलना शुरू किया था। लेकिन तब बेंगलुरु में सिर्फ तीन गोल्फ कोर्स थे। गोल्फ सीखने की जिद के आगे पिता झुके और अदिति को कर्नाटक गोल्फ एसोसिएशन ड्राइविंग रेंज ले जाने लगे। धीरे धीरे Aditi ने गोल्फ को ही अपना करियर बना लिया। महज़ 13 साल की उम्र में Aditi पहली बार सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने 2011 में बेंगलुरु में खेली गई Indian Open Pro Championship में भारत की जानी-मानी गोल्फर Smriti Mehra से जीत हासिल की। फिर Aditi ने 2013 में Asian Youth खेल  और 2014 में हुए Youth Olympic खेल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

इसके बाद 17 साल की उम्र में Aditi ने मोरक्को में हुए लल्ला आइचा टूर स्कूल (Lalla Aicha Tour School) जीता था। इस जीत के साथ वह क्वालिफाइंग स्कूल जीतने वाली पहली भारतीय और सबसे कम उम्र की गोल्फर बन गईं। 2016 में अदिति ने 3-अंडर 213 के स्कोर के साथ हीरो महिला इंडियन ओपन का खिताब जीता। साथ ही वह लेडीज यूरोपियन टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय गोल्फर बन गईं। इस जीत के दो हफ्ते बाद उन्होंने कतर लेडीज ओपन में अपनी दूसरी जीत हासिल की और उस सीजन के ऑर्डर ऑफ मेरिट में दूसरा स्थान हासिल किया था। इस शानदार प्रदर्शन के चलते उन्होंने 2016 का रूकी ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता। 2017 में अदिति भारत की पहली Ladies Professional Golf Association खिलाड़ी बनीं। खेलों में दिए जाने वाले अर्जुन अवार्ड से  अदिति को 2020 में सम्मानित किया गया।


हर बेटी के लिए उसके पिता आदर्श रहते हैं। और अदिति के पिता का भी अपनी बेटी की सफलता में बड़ा हाथ रहा है। Aditi के पिता अशोक गुडलामणि 2016 के Rio Olympic में अपनी बेटी के कैडी बनकर गए थे। जिसका मतलब यह था कि अशोक रियो में अपनी बेटी का बैग गोल्फ कोर्स में उठाया करते थे। और टोक्यो ओलंपिक में अदिति की मां माहेश्वरी अशोक अपनी बेटी की कैडी बनकर गई हैं।

अदिति ने क्वालिफाइंग लिस्ट में 45वां स्थान हासिल कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। इससे पहले अदिति ने रियो ओलंपिक में 18 साल की उम्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गई थीं। 28 जून 2021 के वर्ल्ड रैंकिंग के मुताबिक Aditi 178 no. पर हैं।